किसानों को बेहतर सुविधा देने के लिए सरकार का प्रयास: शिवराज सिंह चौहान
सारांश
Key Takeaways
- किसानों के लिए उन्नत साधनों की उपलब्धता
- जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना
- कस्टम हायरिंग सेंटर का महत्व
- आर्थिक सहायता योजनाओं के तहत समर्थन
रायसेन, ११ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और मौसम की चुनौतियों के बीच, केंद्र सरकार का उद्देश्य है कि सभी किसानों को उन्नत फसल किस्में, सही फसल अनुशंसा और आधुनिक कृषि यंत्रों की सुविधा एक साथ उपलब्ध कराई जाए। ताकि वे कम लागत में, अधिक उत्पादन के साथ सुरक्षित और टिकाऊ खेती कर सकें।
मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में आयोजित उन्नत कृषि महोत्सव के दौरान संवाददाताओं से बात करते हुए चौहान ने कहा कि जलवायु परिवर्तन अब बहुत ही प्रमुख मुद्दा बन चुका है। अनियमित बारिश, पश्चिमी विक्षोभ और तापमान में अस्थिरता के कारण खेती पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। वैज्ञानिक संस्थान ऐसी फसल किस्में विकसित कर रहे हैं, जो अधिक तापमान सहन कर सकें, अधिक पानी की स्थिति में भी टिकाऊ रहें और कम पानी में भी अच्छा प्रदर्शन कर सकें। इन किस्मों को तेजी से किसानों तक पहुंचाने के प्रयास जारी हैं।
शिवराज सिंह ने स्पष्ट किया कि सरकार का ध्यान केवल व्यक्तिगत मशीन सब्सिडी तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण स्तर पर साझा उपयोग के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर और फार्म मशीनरी बैंक का नेटवर्क विकसित करना है। ऐसे केंद्र पंचायतों, किसान समूहों, एफपीओ और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से स्थापित किए जा रहे हैं, जहां छोटे और सीमांत किसान आधुनिक कृषि उपकरण किराए पर ले सकें।
उन्होंने बताया कि केंद्र की सब-मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मेकनाइजेशन जैसी योजनाओं के तहत परियोजना लागत पर ४० से ८० प्रतिशत तक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि लगभग ३० लाख रुपये तक की परियोजनाओं पर पंचायतों और किसान संगठनों को मजबूत समर्थन मिल सके।
एक सवाल के जवाब में मंत्री चौहान ने स्पष्ट किया कि एमपी लैड्स का उद्देश्य स्थायी सामुदायिक परिसंपत्तियां बनाना है। जैसे सड़कें, स्कूल, स्वास्थ्य सुविधाएं और स्थिर जिम आदि, जबकि कस्टम हायरिंग सेंटर संचालन और किराये के मॉडल पर आधारित होते हैं, जिनके लिए अलग प्रकार की व्यवस्था और संचालन ढांचा चाहिए।
उन्होंने कहा कि कस्टम हायरिंग सेंटरों को हम एमपीएलएडीएस से नहीं, बल्कि कृषि मशीनीकरण और संबंधित योजनाओं से ही बढ़ावा दे रहे हैं, ताकि नीति की भावना और पारदर्शिता दोनों बनी रहे।
चौहान ने यह भी कहा कि भले ही एमपी लैड्स से सीधे कस्टम हायरिंग सेंटर नहीं बनते, लेकिन सांसद और विधायक अपने क्षेत्रों में कृषि मशीनीकरण योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। वे किसान समूहों, एफपीओ और पंचायतों के प्रस्तावों को राज्य और केंद्र सरकार के समक्ष प्रभावी ढंग से उठाकर, स्वीकृति, निगरानी और समस्याओं के समाधान में सहयोग कर सकते हैं। योजनाओं का लाभ सही मायने में अंतिम छोर के किसान तक पहुंचता है।