'खेत बचाओ अभियान' का राष्ट्रीय शुभारंभ 1 जून को रायसेन से, शिवराज सिंह चौहान ने किया देशव्यापी जनांदोलन का आह्वान
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 31 मई 2026 को देशभर के कृषि विज्ञान केंद्रों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों और वरिष्ठ कृषि अधिकारियों के साथ वर्चुअल संवाद किया — यह संवाद 1 जून को मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के रामसिया गाँव से प्रस्तावित 'खेत बचाओ अभियान' के राष्ट्रीय शुभारंभ से ठीक एक दिन पहले हुआ। मंत्री ने इस अभियान को महज एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि 'धरती माँ को बचाने और आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों की रक्षा करने का राष्ट्रीय दायित्व' बताया।
अभियान का उद्देश्य और विषय-क्षेत्र
खेत बचाओ अभियान के तहत किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, मिट्टी परीक्षण, सॉयल हेल्थ कार्ड, प्राकृतिक खेती, फसल चयन, जल संरक्षण, हरी खाद और कम वर्षा की स्थिति में वैकल्पिक कृषि पद्धतियों पर जागरूक किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, नकली खाद, नकली बीज और नकली कीटनाशकों की पहचान भी अभियान के प्रमुख विषयों में शामिल है।
चौहान ने स्पष्ट किया कि केवल सलाह देना पर्याप्त नहीं होगा — खेत स्तर पर डेमो, वैज्ञानिक प्रमाण और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से किसानों का विश्वास अर्जित करना होगा। उन्होंने बढ़ते तापमान, रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित उपयोग, मिट्टी के स्वास्थ्य में गिरावट और जलवायु संकट को खेती के सामने खड़ी 'गंभीर चुनौतियाँ' बताया।
रोडमैप और निगरानी तंत्र
चौहान ने निर्देश दिए कि 30 जून 2026 तक का विस्तृत रोडमैप तैयार किया जाए, जिसमें यह स्पष्ट हो कि कौन अधिकारी, वैज्ञानिक या टीम किस तिथि को किस गाँव में जाएगी। उन्होंने डैशबोर्ड आधारित मॉनिटरिंग, पूर्व नियोजित जिला कार्यक्रम और स्थानीय स्तर पर समुचित व्यवस्थाओं पर विशेष बल दिया।
गौरतलब है कि यह अभियान ऐसे समय में शुरू हो रहा है जब देश के कई हिस्सों में मानसून की अनिश्चितता और मिट्टी की उर्वरता में लगातार गिरावट कृषि उत्पादकता के लिए बड़ी चिंता बन चुकी है।
राजनीतिक और संस्थागत भागीदारी
चौहान ने बताया कि उन्होंने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से फोन पर व्यक्तिगत चर्चा की है और केंद्रीय मंत्रियों, सांसदों, विधायकों तथा अन्य जनप्रतिनिधियों से भी अभियान में सहभागिता की अपील की जा रही है। उन्होंने केंद्र, राज्य, ICAR, कृषि विश्वविद्यालय, कृषि विज्ञान केंद्र और किसान हितैषी संस्थाओं को एकजुट होकर काम करने का आह्वान किया।
किसानों को मिलेंगी सरकारी योजनाओं की जानकारी
अभियान को बहुउद्देश्यीय स्वरूप देते हुए किसान क्रेडिट कार्ड, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN), फसल बीमा योजना, सॉयल हेल्थ कार्ड, मिनी बीज किट, दलहन-तिलहन मिशन और कृषि यंत्रीकरण जैसी योजनाओं का लाभ भी किसानों तक पहुँचाने की योजना है। चौहान के अनुसार, इससे खेत बचाने के साथ-साथ किसान की आय, जागरूकता और कृषि प्रबंधन क्षमता को भी मजबूत किया जा सकेगा।
प्रचार-प्रसार पर जोर
मंत्री ने अधिकारियों और वैज्ञानिकों से कहा कि वे बिना संकोच मीडिया से संवाद करें, क्योंकि यह अभियान 'धरती, खेती और अन्नदाता के भविष्य से जुड़ा हुआ है।' उन्होंने कहा कि जितनी तेजी से यह जानकारी गाँव-गाँव पहुँचेगी, अभियान उतना ही प्रभावशाली बनेगा। आने वाले हफ्तों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जमीनी स्तर पर यह अभियान किस हद तक किसानों की कृषि पद्धतियों में वास्तविक बदलाव ला पाता है।