'प्रगति' पहल लॉन्च: शिवराज सिंह चौहान बोले — 20 लाख किसानों की आय बदलेगी, 20 हजार कृषि-उद्यमी तैयार होंगे
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 7 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में राष्ट्रीय पहल 'प्रगति' का शुभारंभ किया। इस बहु-साझेदार कार्यक्रम का लक्ष्य देशभर के 20 लाख छोटे और सीमांत किसानों की आय, उत्पादकता और आजीविका में सुधार लाना है — और इसके लिए 20 हजार ग्रामीण युवाओं को कृषि-उद्यमी के रूप में तैयार किया जाएगा। इसे भारत में समावेशी, टिकाऊ और जलवायु-संवेदनशील कृषि परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मुख्य घोषणाएँ और पहल का उद्देश्य
शुभारंभ समारोह में शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि विकसित भारत का सपना विकसित कृषि और समृद्ध गाँवों के बिना साकार नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि सरकार का ध्यान केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है — लागत घटाकर किसानों की शुद्ध आय बढ़ाना, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहन देना और कृषि को वास्तविक अर्थों में लाभकारी बनाना इस नीति के मूल में है।
मंत्री ने जोर दिया कि छोटी जोत वाले किसानों के लिए परंपरागत खेती अब पर्याप्त नहीं रही। उन्होंने वैल्यू एडिशन, प्रोसेसिंग और कृषि-आधारित उद्यमिता को आय वृद्धि का मुख्य माध्यम बताया। 'प्रगति' इसी सोच का विस्तार है, जो किसानों को तकनीक, मशीनीकरण, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और बाज़ार से जोड़ेगी।
किन राज्यों में लागू होगी योजना
यह पहल देश के आठ प्रमुख कृषि राज्यों — मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, असम और झारखंड — में लागू की जाएगी। गाँव स्तर पर तैयार किए जाने वाले कृषि-उद्यमी मिट्टी परीक्षण, कृषि मशीन सेवाएँ, वित्तीय संपर्क, बाज़ार कनेक्ट और वैकल्पिक आय के अवसर उपलब्ध कराएँगे।
गौरतलब है कि ये आठ राज्य मिलकर देश के कुल कृषि उत्पादन में बड़ी हिस्सेदारी रखते हैं और यहाँ लघु एवं सीमांत किसानों की संख्या सर्वाधिक है।
विविधीकरण और तकनीक पर ज़ोर
चौहान ने बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन जैसे सहायक क्षेत्रों को किसानों की आय में गुणात्मक वृद्धि का साधन बताया। उन्होंने ड्रोन, डिजिटल सलाह और वैज्ञानिक खेती को भविष्य की कृषि का आधार बताते हुए कहा कि राज्यवार कृषि रोडमैप और वैज्ञानिक फसल योजना के ज़रिये व्यापक बदलाव लाया जाएगा।
महिला भागीदारी को विशेष महत्व
कार्यक्रम में शिवराज सिंह चौहान ने महिला भागीदारी को इस बदलाव की धुरी बताया। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में 'कृषि सखी' और महिला उद्यमी इस पहल में केंद्रीय भूमिका निभाएँगी और एक-एक उद्यमी पूरे गाँव की तस्वीर बदल सकता है।
यह ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने को लेकर नीति-निर्माताओं का ध्यान लगातार बढ़ रहा है। 'प्रगति' को केवल एक योजना नहीं, बल्कि परिवर्तन का संकल्प बताते हुए मंत्री ने कहा कि यह गाँवों को आत्मनिर्भर, रोज़गारयुक्त और सशक्त बनाने का माध्यम बनेगी।
आगे की राह
कृषि मंत्रालय के अनुसार राज्यवार क्रियान्वयन की विस्तृत रूपरेखा जल्द जारी की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल की सफलता कृषि-उद्यमियों के प्रशिक्षण की गुणवत्ता और बाज़ार संपर्क की मज़बूती पर निर्भर करेगी। यदि ज़मीनी स्तर पर क्रियान्वयन प्रभावी रहा, तो 'प्रगति' ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकती है।