कपास क्रांति मिशन को उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन की सराहना, शिवराज ने रखी उत्पादकता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की रूपरेखा
सारांश
मुख्य बातें
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन को 7 जुलाई 2026 को उपराष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में केंद्र सरकार के प्रस्तावित कपास उत्पादकता मिशन (कपास क्रांति) की विस्तृत जानकारी दी गई। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि मंत्रालय और कपड़ा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिशन की पूरी रूपरेखा प्रस्तुत की। उपराष्ट्रपति ने मिशन के समग्र दृष्टिकोण की सराहना करते हुए नवाचार को तेजी से किसानों तक पहुँचाने के लिए समयबद्ध मंजूरी प्रणाली विकसित करने पर जोर दिया।
मिशन के तीन प्रमुख आयाम
बैठक में कपास क्रांति मिशन के तीन केंद्रीय स्तंभों पर विशेष चर्चा हुई। पहला, अनुसंधान, आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक खेती के तरीकों के ज़रिए प्रति एकड़ कपास की उत्पादकता में वृद्धि करना। दूसरा, 'कस्तूरी कॉटन सर्टिफिकेशन' और 'किसान कपास ऐप' जैसी पहलों के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाले कपास की सतत उपलब्धता सुनिश्चित करना। तीसरा, वस्त्र उद्योग में नवाचार और टिकाऊ विकास को गति देने के लिए नई पीढ़ी के प्राकृतिक रेशों के उपयोग को प्रोत्साहित करना।
गौरतलब है कि भारत दुनिया के सबसे बड़े कपास उत्पादक देशों में से एक है, फिर भी प्रति एकड़ उत्पादकता के मामले में वह अमेरिका, ब्राज़ील और ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रतिस्पर्धियों से पीछे बना हुआ है। ऐसे में यह मिशन उस अंतर को पाटने का प्रयास है।
उपराष्ट्रपति की प्राथमिकताएँ
राधाकृष्णन ने प्रति एकड़ पैदावार बढ़ाने की आवश्यकता पर विशेष बल देते हुए कहा कि भारत को प्रमुख कपास उत्पादक देशों के बराबर पहुँचने के लिए स्पष्ट, व्यावहारिक और मापने योग्य लक्ष्य निर्धारित करने चाहिए। उनके अनुसार, उत्पादकता में वृद्धि से किसानों की आय बढ़ेगी, उद्योग को बेहतर गुणवत्ता का कच्चा माल मिलेगा और देश की निर्यात क्षमता भी मजबूत होगी।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उच्च गुणवत्ता वाले कपास की बढ़ती माँग को पूरा करने के लिए अपनी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति और सुदृढ़ करनी होगी।
जन-जागरूकता और प्रचार-प्रसार पर जोर
उपराष्ट्रपति ने सुझाव दिया कि मिशन की सफल पहलों और नवाचारों को टेलीविजन डॉक्यूमेंट्री और अन्य जनसंचार माध्यमों के ज़रिए अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाया जाए। उनका मानना था कि व्यापक प्रचार-प्रसार से किसानों और संबंधित हितधारकों को मिशन का अधिकतम लाभ मिल सकेगा।
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार कृषि क्षेत्र में प्रौद्योगिकी-आधारित हस्तक्षेपों को तेज़ करने पर ज़ोर दे रही है और किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
आगे की राह
बैठक में बाज़ार की ज़रूरतों के अनुरूप रणनीतियाँ तैयार करने और मिशन के व्यापक प्रचार-प्रसार पर सहमति बनी। मिशन के क्रियान्वयन में कृषि मंत्रालय और कपड़ा मंत्रालय की संयुक्त भूमिका होगी, जो भारतीय कपास को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक प्रीमियम उत्पाद के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।