कपास उत्पादकता मिशन को मंत्रिमंडल की मंजूरी: ₹5,659 करोड़ से 32 लाख किसानों को फायदा

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कपास उत्पादकता मिशन को मंत्रिमंडल की मंजूरी: ₹5,659 करोड़ से 32 लाख किसानों को फायदा

सारांश

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹5,659 करोड़ के कपास उत्पादकता मिशन को हरी झंडी दी — यह महज़ एक कृषि योजना नहीं, बल्कि 'खेत से विदेश' तक की महत्वाकांक्षी रणनीति है। 32 लाख किसानों की आजीविका, कस्तूरी कॉटन ब्रांड और 2031 तक उत्पादकता में 70% उछाल का लक्ष्य — भारत के वस्त्र क्षेत्र के लिए यह बड़ा दांव है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 5 मई 2026 को कपास उत्पादकता मिशन (2026-27 से 2030-31) के लिए ₹5,659.22 करोड़ की मंजूरी दी।
मिशन का लक्ष्य 2031 तक उत्पादकता 440 किग्रा/हेक्टेयर से बढ़ाकर 755 किग्रा/हेक्टेयर करना और 498 लाख गांठ उत्पादन करना है।
लगभग 32 लाख किसान इस मिशन से लाभान्वित होंगे।
प्रारंभिक चरण में 14 राज्यों के 140 जिलों में प्रौद्योगिकी विस्तार और 2,000 जिनिंग/प्रसंस्करण कारखानों के आधुनिकीकरण की योजना।
कस्तूरी कॉटन भारत पहल के तहत भारतीय कपास को वैश्विक प्रीमियम ब्रांड के रूप में स्थापित किया जाएगा।
कार्यान्वयन कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय और वस्त्र मंत्रालय संयुक्त रूप से करेंगे; ICAR के 10 संस्थान और AICRP के 10 केंद्र शामिल।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 5 मई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कपास उत्पादकता मिशन (2026-27 से 2030-31) के लिए ₹5,659.22 करोड़ की स्वीकृति दी। इस मिशन का लक्ष्य भारत के कपास क्षेत्र में घटती उत्पादकता, गुणवत्ता संबंधी चिंताओं और बाधाओं को दूर करना है। 2031 तक कपास उत्पादकता को 440 किलोग्राम/हेक्टेयर से बढ़ाकर 755 किलोग्राम/हेक्टेयर करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिससे लगभग 32 लाख किसान लाभान्वित होंगे।

मिशन का उद्देश्य और विज़न

यह मिशन भारत सरकार के 5-एफ विजन — खेत से रेशा से कारखाने से फैशन से विदेश (Farm to Fiber to Factory to Fashion to Foreign) — के अनुरूप तैयार किया गया है। मिशन के तहत रोग और कीट प्रतिरोधी उच्च उपज वाली किस्मों (HYV) के बीजों का विकास, आधुनिक कृषि प्रौद्योगिकियों का विस्तार और उद्योग को न्यूनतम संदूषण वाली कपास की आपूर्ति सुनिश्चित करना प्रमुख प्राथमिकताएँ हैं। साथ ही, उच्च गुणवत्ता वाली कपास के निर्यात को बढ़ावा देना भी इसका अहम उद्देश्य है।

मुख्य तकनीकी पहलें

मिशन के अंतर्गत उच्च घनत्व रोपण प्रणाली (HDPS), एकीकृत कपास प्रबंधन और अतिरिक्त लंबे रेशे वाली कपास (ELS) को बढ़ावा दिया जाएगा। देशभर में कपास परीक्षण इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक और मान्यताप्राप्त सुविधाओं से सुदृढ़ किया जाएगा ताकि वैश्विक मानकीकरण सुनिश्चित हो सके। इसके अलावा, 2,000 जिनिंग और प्रसंस्करण कारखानों के आधुनिकीकरण की भी योजना है।

किसानों को सशक्त बनाने की योजना

बाज़ार मंडियों के डिजिटल एकीकरण के ज़रिए किसानों को पारदर्शी मूल्य निर्धारण, प्रत्यक्ष बाज़ार पहुँच और ई-प्लेटफॉर्म के माध्यम से बेहतर लाभ प्राप्ति का अवसर मिलेगा। कस्तूरी कॉटन भारत पहल के तहत भारतीय कपास को एक प्रीमियम, टिकाऊ और वैश्विक स्तर पर विश्वसनीय उत्पाद के रूप में स्थापित किया जाएगा। कपास अपशिष्ट को 2 प्रतिशत से कम करने का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है।

कार्यान्वयन ढाँचा

इस मिशन का कार्यान्वयन कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय और वस्त्र मंत्रालय संयुक्त रूप से करेंगे। इसमें भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के 10 संस्थान, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) का एक संस्थान और प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों के राज्य कृषि विश्वविद्यालयों में अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (AICRP) के 10 केंद्र शामिल होंगे। प्रारंभिक चरण में 14 राज्यों के 140 जिलों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

फाइबर विविधीकरण और टिकाऊ भविष्य

मिशन के तहत भारत के फाइबर आधार को विविध बनाने के लिए अलसी, रेमी, सिसल, मिल्कवीड, बांस और केले जैसे प्राकृतिक रेशों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। कपास अपशिष्ट की रिसाइक्लिंग और सर्कुलर अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देकर पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने और उद्योग के लिए अतिरिक्त मूल्य स्रोत उत्पन्न करने की भी योजना है। यह मिशन भारत के वस्त्र क्षेत्र को बदलती वैश्विक माँग के अनुरूप ढालने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ऐसे समय में आई है जब भारत की कपास उत्पादकता वैश्विक औसत से काफी पीछे है और पिछले कई वर्षों में सुधार की गति धीमी रही है। 5-एफ विजन और कस्तूरी कॉटन ब्रांड जैसी पहलें दिशा सही दिखाती हैं, लेकिन असली परीक्षा बीज विकास से लेकर बाज़ार तक की पूरी मूल्य श्रृंखला में समन्वित क्रियान्वयन की होगी। ICAR और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों की भागीदारी से अनुसंधान को ज़मीन तक पहुँचाने की कोशिश सराहनीय है, परंतु 14 राज्यों और 140 जिलों में एक साथ काम करने की जटिलता को देखते हुए निगरानी तंत्र की मज़बूती ही इस मिशन की सफलता तय करेगी।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कपास उत्पादकता मिशन क्या है और इसे कब मंजूरी मिली?
कपास उत्पादकता मिशन एक पाँच वर्षीय केंद्रीय योजना है, जिसे 5 मई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹5,659.22 करोड़ के परिव्यय के साथ मंजूरी दी। यह मिशन 2026-27 से 2030-31 तक चलेगा और भारत के कपास क्षेत्र की उत्पादकता, गुणवत्ता और निर्यात क्षमता बढ़ाने पर केंद्रित है।
इस मिशन से कितने किसानों को फायदा होगा?
मिशन के अनुसार लगभग 32 लाख कपास किसान इससे लाभान्वित होंगे। इन किसानों को उन्नत बीज, आधुनिक कृषि प्रौद्योगिकी, प्रशिक्षण और डिजिटल बाज़ार पहुँच जैसी सुविधाएँ मिलेंगी।
2031 तक कपास उत्पादकता का क्या लक्ष्य है?
मिशन का लक्ष्य 2031 तक कपास की उत्पादकता को वर्तमान 440 किलोग्राम/हेक्टेयर से बढ़ाकर 755 किलोग्राम/हेक्टेयर करना है। इससे कुल उत्पादन 498 लाख गांठ (प्रत्येक गांठ में 170 किलोग्राम) तक पहुँचने की उम्मीद है।
कस्तूरी कॉटन भारत पहल क्या है?
कस्तूरी कॉटन भारत एक ब्रांडिंग और ट्रेसिबिलिटी पहल है जिसके तहत भारतीय कपास को वैश्विक बाज़ार में एक प्रीमियम, टिकाऊ और विश्वसनीय उत्पाद के रूप में स्थापित किया जाएगा। इस मिशन के तहत इसकी पहचान और प्रमाणीकरण सुनिश्चित करने पर विशेष ज़ोर दिया जाएगा।
इस मिशन का कार्यान्वयन कौन करेगा?
मिशन का कार्यान्वयन कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय और वस्त्र मंत्रालय संयुक्त रूप से करेंगे। ICAR के 10 संस्थान, CSIR का एक संस्थान और AICRP के 10 केंद्र इसमें शामिल होंगे; प्रारंभिक चरण में 14 राज्यों के 140 जिलों पर ध्यान केंद्रित रहेगा।
राष्ट्र प्रेस
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