पूसा खरीफ कॉन्फ्रेंस 2025: 22 राज्यों के कृषि मंत्रियों ने लिया प्राकृतिक खेती और कृषि सुधारों का राष्ट्रीय संकल्प
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), पूसा में 28 और 29 मई 2025 को आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय खरीफ कॉन्फ्रेंस में 22 राज्यों के कृषि मंत्री पहली बार एक साथ एक मंच पर एकत्रित हुए। इस सम्मेलन में खरीफ सीजन की तैयारियों से लेकर प्राकृतिक खेती, मिट्टी की सेहत और किसानों की आय बढ़ाने तक पर साझा सहमति बनी। कृषि सुधारों को केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित न रखकर जन आंदोलन का रूप देने का संकल्प इस सम्मेलन की केंद्रीय भावना रही।
मुख्य घटनाक्रम
सम्मेलन के पहले दिन वरिष्ठ कृषि अधिकारियों ने खरीफ सीजन की तैयारियों — बीज आपूर्ति, उर्वरक वितरण, जल प्रबंधन और फसल योजनाओं — पर विस्तृत समीक्षा की। दूसरे दिन राज्यों के कृषि मंत्रियों ने रात तक विचार-मंथन किया और कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सामूहिक सहमति बनाई।
सम्मेलन में विशेष रूप से यह तय किया गया कि खरीफ रणनीति अब केवल उत्पादन वृद्धि तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता, मिट्टी की गुणवत्ता सुधार और किसानों की आय में वृद्धि जैसे बहुआयामी लक्ष्य भी शामिल होंगे।
प्राकृतिक खेती और 'खेत बचाओ अभियान'
सम्मेलन में सबसे उल्लेखनीय पहल यह रही कि कृषि मंत्रियों ने नीतिगत स्तर के साथ-साथ व्यक्तिगत रूप से भी प्राकृतिक खेती अपनाने का संकल्प लिया। शिवराज सिंह चौहान ने सभी राज्यों से अपील की कि वे अपने-अपने स्तर पर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दें, ताकि किसानों के सामने एक व्यावहारिक उदाहरण प्रस्तुत हो सके।
'खेत बचाओ अभियान' को भी सम्मेलन में प्रमुखता दी गई। चौहान ने स्पष्ट किया कि खेत बचाने का अर्थ केवल भूमि की रक्षा नहीं, बल्कि पर्यावरण, मिट्टी की जैविक गुणवत्ता और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की सुरक्षा भी है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग पर रोक लगाने के लिए वैज्ञानिक जागरूकता अभियान चलाने की घोषणा की।
केंद्र-राज्य समन्वय और क्रियान्वयन तंत्र
सम्मेलन में यह सहमति बनी कि कृषि सुधारों को जन आंदोलन का स्वरूप देने के लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, कृषि विश्वविद्यालयों और वैज्ञानिक संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा। योजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन के लिए एक सुदृढ़ तंत्र विकसित करने पर भी सहमति बनी।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में हुआ है जब भारत में खरीफ सीजन की बुवाई की तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं और दलहन-तिलहन में आयात निर्भरता को कम करना सरकार की प्राथमिकता बनी हुई है।
सम्मेलन का संदेश
समापन सत्र में शिवराज सिंह चौहान ने सभी प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि 'बड़ा लक्ष्य पाने के लिए केवल बड़ा पद नहीं, बल्कि बड़ा संकल्प जरूरी होता है।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि कृषि को अब केवल एक विभागीय विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय मिशन के रूप में देखा जाना चाहिए।
यह दो दिवसीय सम्मेलन इस बात का संकेत है कि भारत कृषि क्षेत्र में नीति-निर्माण से लेकर जमीनी क्रियान्वयन तक एक समन्वित दृष्टिकोण की ओर बढ़ रहा है। आने वाले खरीफ सीजन में इन निर्णयों का असर किसानों तक कितना पहुँचता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।