22 राज्यों के कृषि मंत्रियों ने प्राकृतिक खेती को दिया समर्थन, पूसा सम्मेलन में बना साझा रोडमैप
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 30 मई 2026 को जानकारी दी कि 22 राज्यों के कृषि मंत्रियों ने प्राकृतिक खेती को केवल नीतिगत स्तर पर नहीं, बल्कि व्यक्तिगत रूप से अपने खेतों में अपनाकर किसानों के बीच विश्वास बढ़ाने की पहल की है। यह घोषणा नई दिल्ली के पूसा परिसर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय खरीफ सम्मेलन के समापन पर की गई।
सम्मेलन में क्या हुआ
22 राज्यों के कृषि मंत्री एक मंच पर एकत्र हुए और किसानों की आजीविका सुधारने, कृषि क्षेत्र को सुदृढ़ करने तथा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए समन्वित रणनीति पर विचार-विमर्श किया। सम्मेलन में खरीफ फसलों की तैयारी, दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता, उर्वरकों का संतुलित उपयोग, प्राकृतिक खेती और प्रस्तावित 'खेत बचाओ अभियान' जैसे विषयों पर साझा रोडमैप तैयार किया गया।
केंद्रीय कृषि मंत्री का रुख
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सम्मेलन में स्पष्ट किया कि कृषि भूमि की रक्षा केवल उत्पादन का प्रश्न नहीं, बल्कि पर्यावरण, राष्ट्र और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने राज्य सरकारों से प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने और अनावश्यक जटिलताओं को दूर करने का आग्रह किया, ताकि किसान सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ उठा सकें।
चौहान ने उर्वरकों के संदर्भ में कहा कि रासायनिक उर्वरकों पर पूर्ण प्रतिबंध सरकार का लक्ष्य नहीं है, बल्कि उनका वैज्ञानिक, संतुलित और विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करना है। इसके लिए देशव्यापी जन-जागरूकता अभियान और संस्थागत पहल चलाने का आह्वान किया गया।
निगरानी और क्रियान्वयन तंत्र
मंत्री चौहान ने यह भी रेखांकित किया कि यह अभियान केवल अपील तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने समन्वित व्यवस्था, निगरानी तंत्र और विशेष नियंत्रण कक्ष स्थापित करने का सुझाव दिया, जिससे जमीनी स्तर पर ठोस परिणाम सुनिश्चित हो सकें। गौरतलब है कि यह सम्मेलन प्रतिबद्धता, समन्वय और जमीनी क्रियान्वयन के राष्ट्रीय मंच के रूप में उभरा।
व्यापक कृषि लक्ष्य
सम्मेलन में यह भी स्पष्ट किया गया कि खरीफ फसलों की योजना अब केवल मौसमी तैयारियों तक सीमित नहीं रहेगी। इसे दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता, मिट्टी के स्वास्थ्य की रक्षा, कृषि लागत के विवेकपूर्ण प्रबंधन और उत्पादकता में निरंतर वृद्धि जैसे व्यापक लक्ष्यों से जोड़ा जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब रासायनिक उर्वरकों की बढ़ती लागत और मिट्टी की घटती उर्वरता देश के कृषि क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक चुनौती बनती जा रही है।
आगे की राह
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार कृषि को उत्पादन के साथ-साथ मिट्टी के स्वास्थ्य, पर्यावरणीय स्थिरता, पोषण सुरक्षा और किसानों की समृद्धि से जोड़ी राष्ट्रीय जिम्मेदारी मानती है — यह संदेश इस सम्मेलन से एक बार फिर स्पष्ट हुआ। अब नजरें इस बात पर होंगी कि राज्य सरकारें इस साझा रोडमैप को जमीनी स्तर पर किस गति और प्रभावशीलता से लागू करती हैं।