14 जुलाई 2026
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त्रिपुरा कृषि मंत्री रतन लाल नाथ ने केंद्र के सामने रखे किसानों के लिए 6 अहम प्रस्ताव

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त्रिपुरा कृषि मंत्री रतन लाल नाथ ने केंद्र के सामने रखे किसानों के लिए 6 अहम प्रस्ताव

सारांश

त्रिपुरा के कृषि मंत्री रतन लाल नाथ ने नई दिल्ली में खरीफ सम्मेलन में केंद्र के सामने छह अहम प्रस्ताव रखे — हाइब्रिड धान विस्तार, जैविक खेती, फसल बीमा में बाढ़ कवरेज, उर्वरक आपूर्ति, बायो-फेंसिंग सहायता और ARC आलू तकनीक। राज्य के 96% छोटे किसानों की जीविका इन नीतिगत बदलावों पर टिकी है।

मुख्य बातें

त्रिपुरा कृषि मंत्री रतन लाल नाथ ने 29 मई 2026 को राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन — खरीफ अभियान 2026 में केंद्र के समक्ष कई प्रस्ताव रखे।
राज्य का लक्ष्य 2025-26 में 50,000 हेक्टेयर में हाइब्रिड धान की खेती; बजट में ₹10 करोड़ का प्रावधान।
26,600 हेक्टेयर में जैविक खेती शुरू, 26,800 किसान जुड़े; राज्य के 96% किसान छोटे और सीमांत।
15 लाख से अधिक किसान पिछले आठ वर्षों में फसल बीमा योजना में शामिल; बाढ़ को 'स्थानीय आपदा' में जोड़ने की माँग।
ऑयल पाम बायो-फेंसिंग सहायता ₹4,000 से बढ़ाकर ₹8,000 करने का अनुरोध।
ARC तकनीक से आलू उत्पादन तीन गुना बढ़ा; आरकेवीवाई-डीपीआर समाप्त होने से परामर्श शुल्क पुनर्बहाली की माँग।

त्रिपुरा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री रतन लाल नाथ ने 29 मई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन — खरीफ अभियान 2026 में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान के समक्ष राज्य के किसानों की दशा सुधारने के लिए कई ठोस प्रस्ताव रखे। इन प्रस्तावों में हाइब्रिड धान, जैविक खेती, फसल बीमा, उर्वरक आपूर्ति और आलू उत्पादन तकनीक जैसे अहम मुद्दे शामिल हैं।

धान और हाइब्रिड खेती का विस्तार

नाथ ने बताया कि त्रिपुरा के कुल सकल फसल क्षेत्र का लगभग 49 प्रतिशत हिस्सा धान की खेती के अंतर्गत आता है। राज्य सरकार वर्ष 2025-26 में 50,000 हेक्टेयर क्षेत्र में हाइब्रिड धान की खेती का लक्ष्य लेकर चल रही है, जिसके लिए राज्य बजट में ₹10 करोड़ का प्रावधान किया गया है। उन्होंने केंद्र सरकार से प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत हाइब्रिड धान के विस्तार हेतु विशेष सहायता देने का आग्रह किया।

जैविक खेती और छोटे किसानों की स्थिति

मिशन ऑर्गेनिक वैल्यू चेन डेवलपमेंट फॉर नॉर्थ ईस्टर्न रीजन योजना के तहत त्रिपुरा में 26,600 हेक्टेयर क्षेत्र में जैविक खेती शुरू की जा चुकी है और लगभग 26,800 किसान इससे जुड़ चुके हैं। नाथ ने रेखांकित किया कि राज्य के 96 प्रतिशत किसान छोटे और सीमांत श्रेणी के हैं, इसलिए इस योजना का दायरा पूरे त्रिपुरा और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों तक बढ़ाया जाना चाहिए।

फसल बीमा में बाढ़ को स्थानीय आपदा में शामिल करने की माँग

पिछले आठ वर्षों में राज्य के 15 लाख से अधिक किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के दायरे में लाया गया है। हालाँकि, भारी वर्षा के कारण निचले इलाकों में बाढ़ से धान की फसलों को होने वाले नुकसान को मौजूदा बीमा व्यवस्था में पर्याप्त रूप से शामिल नहीं किया गया है। कृषि मंत्री ने माँग की कि योजना के दिशा-निर्देशों में बाढ़ को भी 'स्थानीय प्राकृतिक आपदा' की श्रेणी में जोड़ा जाए, ताकि प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा मिल सके।

उर्वरक आपूर्ति और ऑयल पाम खेती

नाथ ने उर्वरक आपूर्ति के मुद्दे पर चिंता जताते हुए ब्रह्मपुत्र घाटी उर्वरक निगम लिमिटेड से राज्य को यूरिया की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने की माँग की। उन्होंने बताया कि त्रिपुरा में ऑयल पाम की खेती का दायरा बढ़ रहा है, जिसके लिए रासायनिक उर्वरकों की अधिक आवश्यकता होती है। साथ ही, ऑयल पाम की खेती में जैविक बाड़बंदी (बायो-फेंसिंग) के लिए दी जाने वाली सहायता राशि को ₹4,000 से बढ़ाकर ₹8,000 करने का अनुरोध भी किया गया।

आलू उत्पादन में तकनीकी नवाचार

नाथ ने बताया कि राज्य में एपिकल रूटेड कटिंग्स (ARC) तकनीक अपनाने से आलू उत्पादन लगभग तीन गुना बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि पेरू के लीमा स्थित अंतर्राष्ट्रीय आलू केंद्र के साथ हुए समझौते के तहत तकनीकी परामर्श जारी रखना आवश्यक है। चूँकि इस वर्ष आरकेवीवाई-डीपीआर योजना समाप्त कर दी गई है, इसलिए परामर्श शुल्क के प्रावधान को पुनः बहाल करने की माँग की गई।

इस सम्मेलन में 19 राज्यों के कृषि मंत्री, भारत सरकार के कृषि सचिव आतिश चंद्र तथा केंद्र सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। त्रिपुरा के इन प्रस्तावों पर केंद्र की प्रतिक्रिया और अगले खरीफ सीजन से पहले नीतिगत बदलाव की संभावना पर अब सबकी नज़रें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि पूर्वोत्तर के छोटे राज्यों की माँगें राष्ट्रीय कृषि नीति में कितनी प्राथमिकता पाती हैं। फसल बीमा में बाढ़ को 'स्थानीय आपदा' में शामिल न करना एक नीतिगत खामी है जो वर्षों से चली आ रही है और जलवायु परिवर्तन के दौर में और अधिक गंभीर होती जा रही है। ARC तकनीक जैसी सफलताओं के बावजूद, आरकेवीवाई-डीपीआर जैसी योजनाओं को बंद करना उन्हीं नवाचारों की नींव खोदने जैसा है जिन्हें केंद्र प्रोत्साहित करने का दावा करता है।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

त्रिपुरा के कृषि मंत्री ने केंद्र से क्या-क्या माँगें रखीं?
कृषि मंत्री रतन लाल नाथ ने हाइब्रिड धान विस्तार के लिए विशेष सहायता, फसल बीमा में बाढ़ को स्थानीय आपदा में शामिल करने, उर्वरक की निर्बाध आपूर्ति, बायो-फेंसिंग सहायता दोगुनी करने और ARC आलू तकनीक के लिए परामर्श शुल्क पुनर्बहाली जैसी माँगें रखीं। ये सभी प्रस्ताव 29 मई 2026 को नई दिल्ली में खरीफ अभियान सम्मेलन में रखे गए।
त्रिपुरा में हाइब्रिड धान खेती का लक्ष्य क्या है?
राज्य सरकार वर्ष 2025-26 में 50,000 हेक्टेयर क्षेत्र में हाइब्रिड धान की खेती का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसके लिए राज्य बजट में ₹10 करोड़ का प्रावधान किया गया है और केंद्र से प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत अतिरिक्त सहायता माँगी गई है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बाढ़ कवरेज की माँग क्यों उठाई गई?
त्रिपुरा के निचले इलाकों में भारी बारिश के कारण बाढ़ से धान की फसलों को नियमित नुकसान होता है, लेकिन मौजूदा बीमा दिशा-निर्देशों में इसे 'स्थानीय प्राकृतिक आपदा' की श्रेणी में नहीं रखा गया है। इस कारण प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा नहीं मिल पाता।
ARC तकनीक से त्रिपुरा में आलू उत्पादन पर क्या असर पड़ा?
एपिकल रूटेड कटिंग्स (ARC) तकनीक अपनाने के बाद त्रिपुरा में आलू उत्पादन लगभग तीन गुना बढ़ गया है। यह तकनीक पेरू के लीमा स्थित अंतर्राष्ट्रीय आलू केंद्र के साथ समझौते के तहत लागू की गई है, लेकिन आरकेवीवाई-डीपीआर योजना बंद होने से परामर्श शुल्क का प्रावधान खतरे में है।
त्रिपुरा में जैविक खेती की स्थिति क्या है?
मिशन ऑर्गेनिक वैल्यू चेन डेवलपमेंट फॉर नॉर्थ ईस्टर्न रीजन योजना के तहत राज्य में 26,600 हेक्टेयर में जैविक खेती शुरू हो चुकी है और लगभग 26,800 किसान इससे जुड़े हैं। राज्य के 96% किसान छोटे और सीमांत हैं, इसलिए इस योजना का विस्तार पूरे पूर्वोत्तर में करने की माँग की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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