त्रिपुरा कृषि मंत्री रतन लाल नाथ ने केंद्र के सामने रखे किसानों के लिए 6 अहम प्रस्ताव
सारांश
मुख्य बातें
त्रिपुरा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री रतन लाल नाथ ने 29 मई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन — खरीफ अभियान 2026 में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान के समक्ष राज्य के किसानों की दशा सुधारने के लिए कई ठोस प्रस्ताव रखे। इन प्रस्तावों में हाइब्रिड धान, जैविक खेती, फसल बीमा, उर्वरक आपूर्ति और आलू उत्पादन तकनीक जैसे अहम मुद्दे शामिल हैं।
धान और हाइब्रिड खेती का विस्तार
नाथ ने बताया कि त्रिपुरा के कुल सकल फसल क्षेत्र का लगभग 49 प्रतिशत हिस्सा धान की खेती के अंतर्गत आता है। राज्य सरकार वर्ष 2025-26 में 50,000 हेक्टेयर क्षेत्र में हाइब्रिड धान की खेती का लक्ष्य लेकर चल रही है, जिसके लिए राज्य बजट में ₹10 करोड़ का प्रावधान किया गया है। उन्होंने केंद्र सरकार से प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत हाइब्रिड धान के विस्तार हेतु विशेष सहायता देने का आग्रह किया।
जैविक खेती और छोटे किसानों की स्थिति
मिशन ऑर्गेनिक वैल्यू चेन डेवलपमेंट फॉर नॉर्थ ईस्टर्न रीजन योजना के तहत त्रिपुरा में 26,600 हेक्टेयर क्षेत्र में जैविक खेती शुरू की जा चुकी है और लगभग 26,800 किसान इससे जुड़ चुके हैं। नाथ ने रेखांकित किया कि राज्य के 96 प्रतिशत किसान छोटे और सीमांत श्रेणी के हैं, इसलिए इस योजना का दायरा पूरे त्रिपुरा और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों तक बढ़ाया जाना चाहिए।
फसल बीमा में बाढ़ को स्थानीय आपदा में शामिल करने की माँग
पिछले आठ वर्षों में राज्य के 15 लाख से अधिक किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के दायरे में लाया गया है। हालाँकि, भारी वर्षा के कारण निचले इलाकों में बाढ़ से धान की फसलों को होने वाले नुकसान को मौजूदा बीमा व्यवस्था में पर्याप्त रूप से शामिल नहीं किया गया है। कृषि मंत्री ने माँग की कि योजना के दिशा-निर्देशों में बाढ़ को भी 'स्थानीय प्राकृतिक आपदा' की श्रेणी में जोड़ा जाए, ताकि प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा मिल सके।
उर्वरक आपूर्ति और ऑयल पाम खेती
नाथ ने उर्वरक आपूर्ति के मुद्दे पर चिंता जताते हुए ब्रह्मपुत्र घाटी उर्वरक निगम लिमिटेड से राज्य को यूरिया की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने की माँग की। उन्होंने बताया कि त्रिपुरा में ऑयल पाम की खेती का दायरा बढ़ रहा है, जिसके लिए रासायनिक उर्वरकों की अधिक आवश्यकता होती है। साथ ही, ऑयल पाम की खेती में जैविक बाड़बंदी (बायो-फेंसिंग) के लिए दी जाने वाली सहायता राशि को ₹4,000 से बढ़ाकर ₹8,000 करने का अनुरोध भी किया गया।
आलू उत्पादन में तकनीकी नवाचार
नाथ ने बताया कि राज्य में एपिकल रूटेड कटिंग्स (ARC) तकनीक अपनाने से आलू उत्पादन लगभग तीन गुना बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि पेरू के लीमा स्थित अंतर्राष्ट्रीय आलू केंद्र के साथ हुए समझौते के तहत तकनीकी परामर्श जारी रखना आवश्यक है। चूँकि इस वर्ष आरकेवीवाई-डीपीआर योजना समाप्त कर दी गई है, इसलिए परामर्श शुल्क के प्रावधान को पुनः बहाल करने की माँग की गई।
इस सम्मेलन में 19 राज्यों के कृषि मंत्री, भारत सरकार के कृषि सचिव आतिश चंद्र तथा केंद्र सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। त्रिपुरा के इन प्रस्तावों पर केंद्र की प्रतिक्रिया और अगले खरीफ सीजन से पहले नीतिगत बदलाव की संभावना पर अब सबकी नज़रें टिकी हैं।