त्रिपुरा में सूखे का खतरा नहीं, 1,000 मिमी से अधिक बारिश; कृषि मंत्री रतन लाल नाथ ने दी जानकारी
सारांश
मुख्य बातें
त्रिपुरा के कृषि और किसान कल्याण मंत्री रतन लाल नाथ ने 23 जून 2026 को अगरतला में स्पष्ट किया कि राज्य में इस खरीफ सीजन में सूखे की आशंका न के बराबर है, क्योंकि अब तक 1,000 मिमी से अधिक वर्षा दर्ज की जा चुकी है। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि कृषि और किसान कल्याण विभाग किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क और तैयार है।
उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की पृष्ठभूमि
यह बयान केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्च-स्तरीय वर्चुअल बैठक के बाद आया। इस बैठक में देशभर के राज्यों के कृषि मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, जिला कलेक्टर और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), ICAR-CRIDA तथा भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के विशेषज्ञ शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य इस वर्ष अल-नीनो की संभावना और कमजोर मॉनसून की आशंका को देखते हुए खरीफ सीजन की तैयारियों की राष्ट्रीय समीक्षा करना था।
नाथ ने बताया कि केंद्रीय मंत्री चौहान ने पहले से ही सभी राज्यों को सतर्क कर दिया है और आवश्यक एहतियाती उपाय करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा, 'हमारे केंद्रीय कृषि मंत्री बहुत सक्रिय और तत्पर हैं। अल-नीनो के असर के कारण देश के कुछ हिस्सों में सूखे जैसे हालात पैदा हो सकते हैं, इसीलिए आज समीक्षा बैठक बुलाई गई थी।'
त्रिपुरा की स्थिति: मॉनसून सामान्य से अधिक
IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, त्रिपुरा सहित पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून इस वर्ष सामान्य से अधिक रहने की उम्मीद है। नाथ ने कहा, 'हमारे राज्य में पहले ही 1,000 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की जा चुकी है, इसलिए त्रिपुरा में सूखे की स्थिति की लगभग कोई संभावना नहीं है।' यह आँकड़ा राज्य को देश के उन राज्यों से अलग करता है जहाँ अल-नीनो का प्रभाव अधिक गंभीर हो सकता है।
किसानों के लिए एहतियाती तैयारियाँ
मंत्री ने बताया कि कृषि विभाग को खरीफ फसलों की उत्पादकता सुनिश्चित करने के लिए विशेष निर्देश दिए गए हैं। इनमें राज्यभर के किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज, रासायनिक उर्वरक और स्प्रेयर जैसे कृषि उपकरण उपलब्ध कराना शामिल है। नाथ ने कहा, 'धान, तिलहन और दालों जैसी खरीफ फसलों की खेती क्लस्टर में की जानी चाहिए, ताकि सामुदायिक स्तर पर रोपाई और बुवाई को बढ़ावा मिले और उत्पादकता में सुधार हो।'
इसके अतिरिक्त, जरूरत पड़ने पर जीवन-रक्षक सिंचाई सहायता प्रदान करने के लिए सिंचाई सुविधाएँ तैयार की जा रही हैं। राज्य सरकार ने कृषि उत्पादन की सुरक्षा के लिए आपातकालीन उपाय भी सुनिश्चित किए हैं।
राष्ट्रीय संदर्भ: अल-नीनो और खाद्य सुरक्षा
गौरतलब है कि भारत ने धान, गेहूँ जैसे खाद्यान्न के साथ-साथ मछली और अन्य कृषि उत्पादों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल कर ली है, फिर भी अल-नीनो की स्थिति देश के कुछ शुष्क क्षेत्रों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। केंद्र सरकार की यह समीक्षा बैठक उसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है जो किसी भी मौसमी संकट से पहले ही तैयारी सुनिश्चित करती है।
त्रिपुरा की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है, लेकिन मंत्री नाथ ने स्पष्ट किया कि सरकार किसी भी अप्रत्याशित परिस्थिति में किसानों को बिना किसी रुकावट के फसल सीजन पूरा करने देने के लिए प्रतिबद्ध है।