उत्तर प्रदेश में बाढ़ की स्थिति नियंत्रण में, खतरे के निशान से नीचे नदियाँ: जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने 22 अगस्त को स्पष्ट किया कि इस वर्ष प्रदेश में बाढ़ की स्थिति पिछले साल की तुलना में अभी तक उतनी गंभीर नहीं है। उन्होंने बताया कि कई क्षेत्रों में नदियों का जलस्तर बढ़ा है, परंतु फिलहाल कोई भी नदी खतरे के निशान से ऊपर नहीं बह रही। प्रशासन 24 घंटे निगरानी में जुटा है और आपात स्थिति से निपटने की तैयारियाँ पूरी हैं।
पिछले साल से कैसे अलग है इस बार की स्थिति
मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के अनुसार, पिछले वर्ष इस समय तक जिस स्तर की वर्षा हो चुकी थी, इस बार वैसी बारिश अभी तक नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि नेपाल, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश में भी वर्षा का स्तर उतना नहीं रहा जिसका सीधा असर उत्तर प्रदेश की नदियों और जलाशयों पर पड़ता। प्रदेश के कई बाँध और जलाशय भी पिछले साल की तुलना में अभी कम भरे हुए हैं।
घाघरा नदी पर विशेष नज़र
मंत्री ने खास तौर पर घाघरा नदी का उल्लेख किया और बताया कि इस बार नदी में जलप्रवाह अपेक्षाकृत अधिक है, जिसके पीछे ऊपरी क्षेत्रों में हुई बारिश को कारण बताया गया। हालाँकि प्रशासन स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए सक्रिय है। उन्होंने बताया कि बंधों पर 24 घंटे अधिकारी और कर्मचारी तैनात हैं ताकि कटाव या किसी गंभीर स्थिति को समय रहते संभाला जा सके।
किन जिलों पर है विशेष निगरानी
सोनभद्र, मिर्जापुर, ललितपुर, बांदा और महोबा समेत कई क्षेत्रों में बाँधों, जलाशयों और जल संरचनाओं की लगातार निगरानी की जा रही है। ये जलाशय सिंचाई, उद्योग और पेयजल की आवश्यकताओं की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं, इसलिए जलस्तर की नियमित जाँच अनिवार्य है।
कटाव प्रभावित क्षेत्रों में सतर्कता
मंत्री ने बताया कि पानी घटने के दौरान कई स्थानों पर कटान की समस्या उभरती है। ऐसे क्षेत्रों में अधिकारियों को विशेष निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। सरकार की प्राथमिकता है कि गाँवों, गरीब परिवारों और किसानों को किसी प्रकार की क्षति न हो। जिन क्षेत्रों में बाढ़ या कटाव का खतरा है, वहाँ प्रभावित गाँवों के निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की भी तैयारी रखी गई है।
बाढ़ सुरक्षा परियोजनाएँ और आगे की राह
स्वतंत्र देव सिंह ने दावा किया कि बाढ़ से बचाव के लिए निर्धारित परियोजनाएँ समय पर पूरी कर ली गई हैं। जहाँ ये परियोजनाएँ पूर्ण हो चुकी हैं, वहाँ किसी बड़े खतरे की आशंका फिलहाल नहीं है। यह ऐसे समय में आया है जब मानसून के सक्रिय रहने के कारण उत्तर भारत के कई राज्यों में नदियाँ उफान पर हैं। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में हर वर्ष मानसून सीजन में बाढ़ से लाखों लोग प्रभावित होते हैं और यह राज्य की सबसे बड़ी मौसमी चुनौतियों में से एक है।