उत्तर प्रदेश बाढ़: 13 जिलों के 173 गांव प्रभावित, 4,845 लोग सुरक्षित निकाले गए
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश में 18 अगस्त 2026 को बाढ़ की स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन नदियों के बढ़ते जलस्तर और आगामी बाढ़ के पूर्वानुमान को देखते हुए राज्य प्रशासन ने राहत एवं बचाव तंत्र को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है। राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने मंगलवार को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को जान-माल की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। अब तक प्रदेश के 13 जिलों के 173 गांव बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं और 4,845 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है।
प्रभावित क्षेत्रों का विवरण
बाढ़ से प्रभावित 13 जिलों में बदायूं, बहराइच, बलिया, बाराबंकी, बिजनौर, फर्रूखाबाद, गौतमबुद्धनगर, गोंडा, कासगंज, लखीमपुर खीरी, मुजफ्फरनगर, सीतापुर और उन्नाव शामिल हैं। कुल 13,058 हेक्टेयर कृषि एवं आवासीय भूमि जलमग्न हुई है और 84,362 लोग प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुए हैं। बाढ़ से 94 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिनमें 65 मकानों के लिए सहायता राशि वितरित की जा चुकी है।
राहत एवं बचाव कार्य
प्रशासन ने प्रभावित लोगों के लिए 1,263 बाढ़ शरणालय तैयार किए हैं, जिनमें फिलहाल 41 सक्रिय हैं और 1,045 लोग इनमें रह रहे हैं। बचाव अभियान में 428 नाव और मोटर बोट तथा 1,101 स्थानीय गोताखोर तैनात किए गए हैं। प्रदेश में 1,589 बाढ़ चौकियां सक्रिय हैं। प्रभावित लोगों के बीच 15,238 राहत खाद्यान्न पैकेट और 30,316 लंच पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। इसके अलावा 669 राहत चौपाल आयोजित की गई हैं।
स्वास्थ्य एवं पशुधन सेवाएं
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 724 मेडिकल टीमें और 534 एंबुलेंस तैनात हैं। अब तक 19,406 लोगों का उपचार किया गया है और 566 लोगों को एंटी-स्नेक वेनम उपलब्ध कराया गया है। स्वच्छ पेयजल के लिए 43,612 क्लोरीन टैबलेट और 23,476 ओआरएस पैकेट वितरित किए गए हैं। मच्छरजनित रोगों की रोकथाम के लिए 1,468 गांवों में लार्वीसाइडल का छिड़काव किया गया है। पशुधन के मोर्चे पर 6,067 पशु प्रभावित हुए हैं; 208 क्विंटल भूसा वितरित किया गया है, 11,465 बीमार पशुओं का उपचार और 4,04,036 पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है।
बलों की तैनाती और अलर्ट सिस्टम
आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रदेश में एनडीआरएफ की 16 टीमें तैनात की गई हैं। एसडीआरएफ की दो टीमें लखनऊ में और अन्य जिलों में भी तैनात हैं। 52 जिलों में पीएसी की तैनाती की गई है। 1 अगस्त से 18 अगस्त के बीच 1,40,52,16,262 एसएमएस अलर्ट भेजे गए हैं। राहत आयुक्त कार्यालय का नियंत्रण कक्ष प्रभावित जिलों से सतत संपर्क में है और हेल्पलाइन नंबर 1070 पर आने वाली शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है। 12,487 आपदा मित्रों को प्रथम प्रत्युत्तरकर्ता के रूप में प्रशिक्षित किया गया है।
नदियों की स्थिति और आगे का पूर्वानुमान
बाराबंकी में एल्गिन ब्रिज के पास घाघरा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। बदायूं के कचला ब्रिज और फर्रूखाबाद के फतेहगढ़ में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान पर है। लखीमपुर खीरी के पलियाकलां और शारदानगर में शारदा नदी तथा अयोध्या और बलिया के तुर्तीपार में घाघरा का जलस्तर भी खतरे के निशान के आसपास बना हुआ है। आने वाले दिनों में धर्मनगरी, गढ़मुक्तेश्वर, कचला ब्रिज, फतेहगढ़ और अंकिनघाट में गंगा, रिहंद बांध में रिहंद, बाणसागर बांध में सोन तथा कुशीनगर में गंडक नदी में बाढ़ की संभावना जताई गई है। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) की संयुक्त टीम ने बस्ती, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, आजमगढ़, मऊ और बलिया समेत छह जिलों का स्थलीय निरीक्षण पूर्व में ही कर लिया था। आगामी हफ्तों में नदियों के जलस्तर पर नज़र और कड़ी रखी जाएगी।