क्या प्रभारी मंत्री तत्काल संभालेंगे अपने जिले में बाढ़ राहत-बचाव की कमान?

सारांश
Key Takeaways
- बाढ़ राहत कार्य में प्रभारी मंत्रियों की जिम्मेदारी बढ़ी।
- 2,45,980 लोग सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किए गए।
- राहत सामग्री की सप्लाई के लिए 548 नावों का उपयोग।
- 284 बाढ़ शरणालय सक्रिय हैं।
- जलजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए क्लोरीन टैबलेट वितरित किए गए।
लखनऊ, 27 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश में लगातार मूसलाधार बारिश के चलते 17 जिलों में बाढ़ का संकट उत्पन्न हो गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस गंभीर परिस्थिति को देखते हुए बुधवार को बाढ़ प्रभावित जिलों के प्रभारी मंत्रियों को अपने-अपने जिलों में तुरंत राहत और बचाव कार्य का नियंत्रण संभालने का निर्देश दिया है。
उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों से भी आग्रह किया कि वे इस कार्य में सक्रिय रूप से भाग लें और प्रभावित व्यक्तियों की सभी आवश्यकताओं का ध्यान रखें। सीएम योगी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बाढ़ से प्रभावित किसी भी व्यक्ति को कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़े, और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने का कार्य सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही मवेशियों के लिए भी उचित व्यवस्थाएं की जाएं।
राहत आयुक्त भानु चंद्र गोस्वामी ने जानकारी दी है कि प्रदेश की 37 तहसीलें और 688 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं, जिनमें 2,45,980 लोग और 30,030 मवेशी सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किए गए हैं। बाढ़ ने कुल 27,061 हेक्टेयर क्षेत्र को प्रभावित किया है। राहत कार्य के तहत 548 नावों और मोटरबोट्स के माध्यम से राहत सामग्री पहुँचाई जा रही है।
बुधवार को 1,904 खाद्यान्न पैकेट और 11,350 लंच पैकेट वितरित किए गए हैं। कुल 284 बाढ़ शरणालय सक्रिय हैं, जहां 4,440 लोग अस्थायी रूप से निवास कर रहे हैं और 626 मेडिकल टीमों द्वारा उनकी स्वास्थ्य जांच की जा रही है। सरकार ने जलजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए 12,298 क्लोरीन टैबलेट और 4,422 ओआरएस पैकेट वितरण किए हैं।
प्रभावित क्षेत्रों में 996 बाढ़ चौकियाँ स्थापित की गई हैं, जो स्थिति की निगरानी कर रही हैं। बाढ़ से प्रभावित जिले हैं: बलिया, बहराइच, बदायूं, चंदौली, कानपुर नगर, हरदोई, फर्रुखाबाद, गोंडा, कासगंज, लखीमपुर खीरी, मेरठ, मीरजापुर, मुजफ्फरनगर, शाहजहाँपुर, उन्नाव, प्रयागराज और वाराणसी।