ओडिशा बाढ़: 8.63 लाख प्रभावित, ₹110 करोड़ मुआवजा जारी; 529 राहत शिविर सक्रिय
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा सरकार ने राज्य में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और पुनर्वास कार्यों में तेज़ी लाई है। राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने सोमवार, 3 अगस्त को भुवनेश्वर में जानकारी दी कि बाढ़ से 22 जिले, 85 ब्लॉक और 656 ग्राम पंचायतें प्रभावित हुई हैं, और कुल 8,63,909 लोग इस आपदा की चपेट में आए हैं। सरकार ने अस्थायी मुआवजे के रूप में ₹110 करोड़ की राशि सोमवार को ही विभिन्न जिलों को जारी करने की घोषणा की।
बाढ़ का दायरा और प्रभावित आबादी
मंत्री पुजारी के अनुसार, बाढ़ की मार से 1,458 गाँव और 15 शहरी निकाय बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। अब तक 2,67,301 लोगों को सुरक्षित स्थानों या राहत शिविरों में पहुँचाया जा चुका है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि हालात सुरक्षित होने तक किसी भी विस्थापित व्यक्ति को खतरे वाले इलाकों में वापस न जाने दिया जाए।
राहत शिविर और ज़रूरी सामग्री की आपूर्ति
प्रभावित क्षेत्रों में 529 राहत शिविर और 31 पशु राहत शिविर सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। विस्थापित लोगों को दूध, बिस्कुट, ब्रेड और अन्य ज़रूरी सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। मंत्री ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि बुज़ुर्गों की ज़रूरतों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
मुआवजे का ढाँचा
सरकार ने नियमों के अनुसार मुआवजे की दरें निर्धारित की हैं। पूरी तरह क्षतिग्रस्त पक्के मकान के लिए ₹1.20 लाख, आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त पक्के मकान के लिए ₹6,500, क्षतिग्रस्त झोपड़ी के लिए ₹8,000 और क्षतिग्रस्त गौशाला के लिए ₹3,000 दिए जाएँगे। पशुओं के नुकसान और घरेलू संपत्ति की क्षति के लिए भी अलग-अलग श्रेणियों में मुआवजा प्रदान किया जाएगा।
फसल नुकसान का आकलन
कृषि विभाग को जमीनी स्तर पर विस्तृत सर्वेक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। शुरुआती आकलन के अनुसार, धान सहित कई हेक्टेयर फसल क्षेत्र प्रभावित हुआ है और अन्य फसलें भी नुकसान की चपेट में आई हैं। सभी जिलों से रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद एक विस्तृत आकलन रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसके आधार पर किसानों को उचित मुआवजा दिया जाएगा।
सरकार की प्रतिबद्धता
मंत्री पुजारी ने स्पष्ट किया कि ₹110 करोड़ की अस्थायी राशि जिलों को तत्काल जारी की जा रही है और अंतिम मुआवजा जिला व जमीनी स्तर के विस्तृत आकलन के बाद दिया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि कोई भी पात्र लाभार्थी सहायता से वंचित नहीं रहेगा। यह ऐसे समय में आया है जब ओडिशा हर वर्ष मानसून के दौरान गंभीर बाढ़ की चपेट में आता है और राहत वितरण की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठते रहे हैं।