ओडिशा बाढ़: 3 की मौत, 748 गांव जलमग्न; 30,000 लोगों को सुरक्षित निकाला
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा में 29 जुलाई 2026 को भीषण बाढ़ ने तबाही मचाई — लगातार बारिश और नदियों का जलस्तर खतरनाक स्तर तक बढ़ने से कम से कम 3 लोगों की मौत हो गई और 2 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने एक आपात समीक्षा बैठक के बाद यह जानकारी दी।
मुख्य घटनाक्रम
मंत्री पुजारी के अनुसार, दोपहर तक 44 ब्लॉक, 243 ग्राम पंचायतें और 748 गांव बाढ़ की चपेट में आ चुके थे। सर्वाधिक प्रभावित जिलों में बालासोर, भद्रक, जाजपुर, मयूरभंज और क्योंझर शामिल हैं। इसके अलावा सुंदरगढ़, झारसुगुड़ा, बरगढ़, नुआपाड़ा, बलांगीर, कालाहांडी, रायगढ़ा, गजपति और मलकानगिरी के कुछ हिस्सों पर भी बारिश का असर देखा गया।
मृतकों का विवरण
तीनों मौतें क्योंझर जिले में दर्ज की गई हैं। फायर सर्विस कर्मचारी चंदन पटनायक की मृत्यु जलभराव हटाने के अभियान के दौरान एक चालू बिजली के तार की चपेट में आने से हुई। एक नाबालिग की मौत बाढ़ के पानी में डूबने से हुई, जबकि एक बुजुर्ग व्यक्ति की जान घर की दीवार गिरने से गई।
राहत एवं बचाव कार्य
अधिकारियों के अनुसार, प्रभावित 6 जिलों के निचले इलाकों से लगभग 30,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों और राहत केंद्रों में पहुंचाया गया है। अन्य संवेदनशील क्षेत्रों के निवासियों को भी सुरक्षित निकाला गया। राहत केंद्रों में पका हुआ भोजन, बच्चों के लिए पर्याप्त बेबी फूड, तथा बुजुर्गों और महिलाओं के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं।
नदियों और बांध की स्थिति
पुजारी ने बताया कि 226 गांवों में अभी भी जल-जमाव बना हुआ है। हालांकि, बालासोर जिले सहित कई इलाकों में जलस्तर धीरे-धीरे घट रहा है और लोग राहत केंद्रों से घर लौटने लगे हैं। छत्तीसगढ़ के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में नई बारिश की सूचना है, जिससे स्थिति फिर बिगड़ने की आशंका है। फिलहाल हीराकुंड बांध के 2 गेट खुले हैं और जलाशय का स्तर सुरक्षित संचालन सीमा के भीतर बताया जा रहा है।
आगे की स्थिति
यह ऐसे समय में आया है जब मानसून का मौसम अभी अपने चरम पर है। गौरतलब है कि ओडिशा प्रत्येक वर्ष बाढ़ से बड़े पैमाने पर प्रभावित होता है और इस बार छत्तीसगढ़ में हो रही बारिश से महानदी बेसिन में दबाव और बढ़ सकता है। राज्य प्रशासन स्थिति पर नज़र बनाए हुए है और राहत कार्य जारी है।