ओडिशा बाढ़: सात जिलों में 13.44 लाख लोग प्रभावित, 4.87 लाख को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा में बाढ़ की स्थिति 21 अगस्त को भी गंभीर बनी हुई है — राज्य के सात जिलों में 13,44,698 लोग बाढ़ के पानी से घिरे हैं और सैकड़ों गाँव अभी भी जलमग्न हैं। विशेष राहत आयुक्त कार्यालय में स्थित स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है।
प्रभावित जिले और आँकड़े
बाढ़ से सर्वाधिक प्रभावित जिलों में बालेश्वर, मयूरभंज, भद्रक, जाजपुर, केंदुझार, केंद्रपाड़ा और सुंदरगढ़ शामिल हैं। इन सात जिलों के 76 ब्लॉकों, 505 ग्राम पंचायतों, 1,703 गाँवों और 12 शहरी स्थानीय निकायों में रहने वाले लोग बाढ़ की चपेट में हैं।
राज्य सरकार के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में मयूरभंज, बालेश्वर, भद्रक, जाजपुर, केंद्रपाड़ा और केंदुझार में स्थिति सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण रही। हालाँकि अधिकारियों ने बताया कि प्रमुख नदियों का जलस्तर घट रहा है और वे खतरे के निशान से नीचे आ गई हैं।
राहत एवं बचाव कार्य
अब तक 4,87,350 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जा चुका है और उन्हें 880 राहत शिविरों में रखा गया है। प्रभावित क्षेत्रों में मुफ्त रसोई संचालित हैं, जहाँ अब तक 4,95,833 लोगों को पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया गया है। इसके अलावा 4,765 पॉलीथीन शीट/रोल प्रभावित परिवारों को वितरित किए गए हैं।
बचाव अभियान को मज़बूत करने के लिए 126 राहत एवं बचाव दल तैनात किए गए हैं — जिनमें 32 ओड्राफ टीम, 8 एनडीआरएफ टीम, 46 अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा टीम और 40 पुलिस/सिविल डिफेंस/स्थानीय टीम शामिल हैं। राहत कार्यों के लिए 210 नावों और विशेष उपकरणों की तैनाती की गई है। बचाव दल अब तक 492 कटे हुए गाँवों तक पहुँच चुके हैं और 124 आपातकालीन चिकित्सा निकासी की गई हैं।
स्वास्थ्य सेवाएँ और विशेष देखभाल
प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। अब तक 93 मेडिकल टीमें तैनात की गई हैं और 159 मेडिकल शिविर लगाए गए हैं, जहाँ 11,549 लोगों को चिकित्सा सहायता मिली है।
गर्भवती महिलाओं की देखभाल पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है — 150 गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य संस्थानों में स्थानांतरित किया गया है और 44 सुरक्षित संस्थागत प्रसव कराए गए हैं। राज्य सरकार ने बताया कि आवश्यक दवाइयों, एंटी-स्नेक वेनम, ओआरएस और आईवी फ्लूड का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। अब तक किसी भी प्रकार की महामारी फैलने की सूचना नहीं है।
निगरानी और आगे की स्थिति
स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर और जिला स्तरीय डिस्ट्रिक्ट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर के ज़रिये 24 घंटे स्थिति की निगरानी की जा रही है। नदियों का जलस्तर घटने के संकेत राहत की बात हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार बाढ़ के बाद पानी उतरने पर संक्रामक बीमारियों का खतरा बना रहता है। राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि राहत और पुनर्बहाली का कार्य तब तक जारी रहेगा जब तक सभी प्रभावित परिवार सामान्य जीवन में नहीं लौट जाते।