ओडिशा बाढ़: 2 लाख से अधिक प्रभावित, CM माझी ने बालेश्वर-भद्रक-जाजपुर में IAS अधिकारी तैनात किए
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा के कई जिलों में भारी बारिश और बाढ़ के कारण 2 लाख से अधिक लोग प्रभावित हो गए हैं। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने बुधवार, 29 जुलाई को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर स्पष्ट किया कि राज्य सरकार स्थिति पर व्यक्तिगत रूप से नज़र रख रही है और प्रत्येक नागरिक की जान व सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। बालेश्वर, भद्रक और जाजपुर जिले सबसे बुरी तरह प्रभावित बताए जा रहे हैं।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्यमंत्री माझी ने बताया कि उन्होंने मुख्य सचिव और विशेष राहत आयुक्त (SRC) के साथ बाढ़ की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की। तीनों सर्वाधिक प्रभावित जिलों — बालेश्वर, भद्रक और जाजपुर — में तीन वरिष्ठ IAS अधिकारियों को तैनात किया गया है, जो निकासी, राहत और बचाव कार्यों की सीधी निगरानी करेंगे।
उन्होंने कहा, 'राज्य के हर नागरिक की जान और सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। मेरी सरकार और मैं लगातार हो रही बारिश और कुछ नदियों में बाढ़ की स्थिति पर हर पल बारीकी से नजर रख रहे हैं।'
राहत व बचाव की तैयारी
राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ODRAF), अग्निशमन सेवा और पुलिस के जवानों को पूरी तरह अलर्ट पर रखा गया है। विशेष राहत आयुक्त कार्यालय और राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र को 24 घंटे सक्रिय रहने का निर्देश दिया गया है, ताकि नदियों के जलस्तर और समग्र बाढ़ स्थिति पर निरंतर नज़र बनी रहे।
यह ऐसे समय में आया है जब ओडिशा में मानसून की बारिश सामान्य से अधिक रही है और कई नदियाँ खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।
राहत शिविरों में व्यवस्था
मुख्यमंत्री माझी ने बताया कि सभी राहत शिविरों में सुरक्षित पेयजल, पका हुआ भोजन, आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएँ, सर्पदंश उपचार के लिए एंटी-वेनम और पशुओं के लिए पर्याप्त चारा उपलब्ध कराया गया है। चोरी और संपत्ति नुकसान को रोकने के लिए पुलिस ने संवेदनशील इलाकों में रात्रि गश्त भी बढ़ा दी है।
मुआवज़े का आश्वासन
अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि बाढ़ से हुए नुकसान का तत्काल आकलन किया जाए और जिन लोगों के घर व कृषि भूमि प्रभावित हुई है, उन्हें शीघ्र मुआवज़ा दिया जाए। मुख्यमंत्री ने प्रभावित नागरिकों से अपील की कि वे घबराएँ नहीं और प्रशासन द्वारा जारी सलाहों का पालन करें।
आगे की स्थिति
गौरतलब है कि ओडिशा बाढ़ प्रबंधन में अनुभवी राज्यों में गिना जाता है, फिर भी हर वर्ष मानसून के दौरान तटीय और निचले जिले बुरी तरह प्रभावित होते हैं। राज्य सरकार का प्रशासनिक तंत्र इस बार पहले से सक्रिय दिख रहा है, लेकिन नदियों के जलस्तर और बारिश की तीव्रता पर आने वाले दिनों में कड़ी नज़र रखी जाएगी।