कम बारिश पर कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना का आश्वासन: किसान निश्चिंत रहें, सरकार सतर्क
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंसाना ने 8 अगस्त 2026 को छतरपुर दौरे के दौरान प्रदेश के किसानों को स्पष्ट रूप से भरोसा दिलाया कि कम बारिश को लेकर उन्हें घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार और कृषि विभाग मौसम की स्थिति पर लगातार निगरानी बनाए हुए हैं और जमीनी स्तर पर योजनाओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है।
छतरपुर दौरे का मकसद
कृषि मंत्री कंसाना ने छतरपुर में अधिकारियों, कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में जिले में चल रही विभिन्न सरकारी योजनाओं की प्रगति और उनके क्रियान्वयन की समीक्षा की गई। मंत्री ने बताया कि कुछ समय से उनका जिले में दौरा नहीं हो पाया था, इसलिए अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ सीधा संवाद जरूरी था।
बैठक में क्या हुआ
बैठक के दौरान कोर ग्रुप की मासिक समीक्षा के साथ-साथ तिरंगा यात्रा से संबंधित तैयारियों पर भी चर्चा हुई। मंत्री ने बताया कि बैठक में यह देखकर संतोष हुआ कि जिले में जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बेहतर सामंजस्य कायम है। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं का संचालन सुचारू रूप से हो रहा है।
किसानों को सरकार का संदेश
मध्य प्रदेश के कई इलाकों में मानसून की कम बारिश के कारण किसान चिंतित हैं। इस पर कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार परिस्थितियों पर पूरी तरह नजर रखे हुए है। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग के अधिकारी और कर्मचारी सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को केवल कागजों तक सीमित न रखते हुए धरातल तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
योजनाओं को जमीन तक पहुँचाना प्राथमिकता
कंसाना ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जनकल्याण की योजनाओं का लाभ आम नागरिकों तक पहुँचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि योजनाएँ फाइलों में न रहें, बल्कि लाभार्थियों तक वास्तव में पहुँचें। यह ऐसे समय में आया है जब खरीफ सीजन के दौरान अपर्याप्त वर्षा किसानों की बुवाई और फसल को प्रभावित कर सकती है।
आगे की राह
कृषि विभाग की ओर से स्थिति की नियमित समीक्षा जारी रहेगी। कोर ग्रुप की बैठकें हर महीने होती हैं, जिनमें योजनाओं की प्रगति और समन्वय पर ध्यान दिया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून की स्थिति में शीघ्र सुधार नहीं हुआ, तो राज्य सरकार को राहत उपायों पर विचार करना पड़ सकता है।