मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरी तरह सक्रिय, झाबुआ-अलीराजपुर समेत पश्चिमी जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून 4 जुलाई 2026 तक पूरी तरह सक्रिय हो चुका है। राज्य के वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक ए.के. सिंह ने जानकारी दी कि अगले कुछ दिनों में झाबुआ और अलीराजपुर समेत पश्चिमी जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की प्रबल संभावना है, जबकि उत्तरी जिलों में बारिश की तीव्रता अपेक्षाकृत कम रहने का अनुमान है।
मानसून की स्थिति और पूर्वानुमान
मौसम वैज्ञानिक ए.के. सिंह के अनुसार, मध्य प्रदेश में मानसून अगले 5 दिनों तक सक्रिय बना रहेगा। इस दौरान कुछ क्षेत्रों में हल्की बारिश होगी, तो कुछ इलाकों में तेज़ बारिश की संभावना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौसम विभाग अधिकतम 5 दिनों का पूर्वानुमान जारी करता है, जिसमें भारी और अत्यधिक भारी बारिश वाले क्षेत्रों की पहचान की जाती है।
मानसून ब्रेक की संभावना
सिंह ने बताया कि मानसून का सक्रिय रहना पूरी तरह मानसून ट्रफ की स्थिति पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि कुछ दिनों बाद मानसून अस्थायी ब्रेक ले सकता है और फिर से सक्रिय हो सकता है — ऐसी स्थिति में विभाग समय पर सूचना जारी करता रहेगा। मानसून का मौसम सामान्यतः जून से सितंबर तक चलता है।
इस वर्ष मानसून में देरी
मौसम वैज्ञानिक के अनुसार, मध्य प्रदेश में आमतौर पर मानसून 15 या 16 जून को दस्तक देता है, किंतु इस वर्ष मानसून की एंट्री विलंबित रही और यह 24 जून के आसपास प्रदेश में पहुँचा। इसके अलावा पूरे राज्य को कवर करने में भी सामान्य से अधिक समय लगा।
किन जिलों में होगी सबसे अधिक बारिश
पश्चिमी जिलों — विशेषकर झाबुआ और अलीराजपुर — में भारी से बहुत भारी बारिश होने के आसार हैं। वहीं, उत्तरी मध्य प्रदेश में अत्यधिक वर्षा की संभावना फिलहाल कम बताई गई है। सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि जिलेवार बारिश का पैटर्न निरंतर बदलता रहता है, इसलिए नियमित अपडेट पर नज़र रखना ज़रूरी है।
अर्थव्यवस्था और समाज पर असर
ए.के. सिंह ने रेखांकित किया कि मानसून के चार महीने देश और समाज दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं — इसी अवधि में कृषि उत्पादन और आर्थिक दिशा काफी हद तक तय होती है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में कई राज्यों में मध्यम से तेज़ बारिश दर्ज की जा चुकी है और खरीफ फसलों की बुआई का मौसम चरम पर है।