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मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरी तरह सक्रिय, झाबुआ-अलीराजपुर समेत पश्चिमी जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

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मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरी तरह सक्रिय, झाबुआ-अलीराजपुर समेत पश्चिमी जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

सारांश

मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरी तरह सक्रिय हो चुका है, लेकिन इस बार एंट्री 24 जून को हुई — सामान्य से करीब 8-9 दिन देर से। झाबुआ और अलीराजपुर में भारी बारिश का अलर्ट है, जबकि मानसून ट्रफ की स्थिति के अनुसार बीच में ब्रेक भी संभव है।

मुख्य बातें

मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून 4 जुलाई 2026 तक पूर्ण रूप से सक्रिय हो गया है।
झाबुआ और अलीराजपुर समेत पश्चिमी जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी।
इस वर्ष मानसून 24 जून के आसपास पहुँचा — सामान्य तिथि 15-16 जून से विलंबित।
मौसम विभाग अधिकतम 5 दिनों का पूर्वानुमान जारी करता है; मानसून सितंबर तक सक्रिय रहेगा।
उत्तरी मध्य प्रदेश में अत्यधिक बारिश की संभावना फिलहाल कम; मानसून ट्रफ के अनुसार बीच में ब्रेक संभव।

मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून 4 जुलाई 2026 तक पूरी तरह सक्रिय हो चुका है। राज्य के वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक ए.के. सिंह ने जानकारी दी कि अगले कुछ दिनों में झाबुआ और अलीराजपुर समेत पश्चिमी जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की प्रबल संभावना है, जबकि उत्तरी जिलों में बारिश की तीव्रता अपेक्षाकृत कम रहने का अनुमान है।

मानसून की स्थिति और पूर्वानुमान

मौसम वैज्ञानिक ए.के. सिंह के अनुसार, मध्य प्रदेश में मानसून अगले 5 दिनों तक सक्रिय बना रहेगा। इस दौरान कुछ क्षेत्रों में हल्की बारिश होगी, तो कुछ इलाकों में तेज़ बारिश की संभावना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौसम विभाग अधिकतम 5 दिनों का पूर्वानुमान जारी करता है, जिसमें भारी और अत्यधिक भारी बारिश वाले क्षेत्रों की पहचान की जाती है।

मानसून ब्रेक की संभावना

सिंह ने बताया कि मानसून का सक्रिय रहना पूरी तरह मानसून ट्रफ की स्थिति पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि कुछ दिनों बाद मानसून अस्थायी ब्रेक ले सकता है और फिर से सक्रिय हो सकता है — ऐसी स्थिति में विभाग समय पर सूचना जारी करता रहेगा। मानसून का मौसम सामान्यतः जून से सितंबर तक चलता है।

इस वर्ष मानसून में देरी

मौसम वैज्ञानिक के अनुसार, मध्य प्रदेश में आमतौर पर मानसून 15 या 16 जून को दस्तक देता है, किंतु इस वर्ष मानसून की एंट्री विलंबित रही और यह 24 जून के आसपास प्रदेश में पहुँचा। इसके अलावा पूरे राज्य को कवर करने में भी सामान्य से अधिक समय लगा।

किन जिलों में होगी सबसे अधिक बारिश

पश्चिमी जिलों — विशेषकर झाबुआ और अलीराजपुर — में भारी से बहुत भारी बारिश होने के आसार हैं। वहीं, उत्तरी मध्य प्रदेश में अत्यधिक वर्षा की संभावना फिलहाल कम बताई गई है। सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि जिलेवार बारिश का पैटर्न निरंतर बदलता रहता है, इसलिए नियमित अपडेट पर नज़र रखना ज़रूरी है।

अर्थव्यवस्था और समाज पर असर

ए.के. सिंह ने रेखांकित किया कि मानसून के चार महीने देश और समाज दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं — इसी अवधि में कृषि उत्पादन और आर्थिक दिशा काफी हद तक तय होती है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में कई राज्यों में मध्यम से तेज़ बारिश दर्ज की जा चुकी है और खरीफ फसलों की बुआई का मौसम चरम पर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन अब पूर्ण सक्रियता से कुछ राहत मिली है। हालाँकि मौसम विभाग का '5 दिन से आगे कोई भरोसेमंद पूर्वानुमान नहीं' वाला रुख यह भी दर्शाता है कि जलवायु परिवर्तन के दौर में मानसून का व्यवहार पूर्वानुमान की सीमाओं को चुनौती दे रहा है। पश्चिमी जिलों में भारी बारिश का अलर्ट आपदा प्रबंधन तंत्र की तैयारी की भी परीक्षा है — पिछले वर्षों में झाबुआ और अलीराजपुर जैसे आदिवासी-बहुल जिलों में अचानक बाढ़ से जनजीवन प्रभावित हुआ है। राज्य सरकार की प्रतिक्रिया और स्थानीय प्रशासन की सतर्कता ही तय करेगी कि यह मानसून वरदान बनेगा या आपदा।
RashtraPress
4 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश में मानसून कब तक सक्रिय रहेगा?
मौसम वैज्ञानिक ए.के. सिंह के अनुसार, मध्य प्रदेश में मानसून सितंबर तक सक्रिय रहेगा। हालाँकि मानसून ट्रफ की स्थिति के आधार पर बीच-बीच में अस्थायी ब्रेक संभव है, जिसकी सूचना मौसम विभाग समय पर देता रहेगा।
झाबुआ और अलीराजपुर में भारी बारिश का अलर्ट क्यों जारी किया गया है?
मौसम विभाग के अनुसार, मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने के चलते मध्य प्रदेश के पश्चिमी जिलों — विशेषकर झाबुआ और अलीराजपुर — में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। उत्तरी जिलों में तुलनात्मक रूप से कम बारिश का अनुमान है।
इस वर्ष मध्य प्रदेश में मानसून देर से क्यों आया?
मौसम वैज्ञानिक ए.के. सिंह ने बताया कि आमतौर पर एमपी में मानसून 15 या 16 जून को पहुँचता है, लेकिन इस वर्ष यह करीब 24 जून के आसपास आया। पूरे राज्य को कवर करने में भी सामान्य से अधिक समय लगा।
मौसम विभाग कितने दिनों का पूर्वानुमान जारी करता है?
मौसम विभाग अधिकतम 5 दिनों का पूर्वानुमान जारी करता है, जिसमें यह बताया जाता है कि किन क्षेत्रों में तेज़ और किन में अत्यधिक तेज़ बारिश होगी। इससे आगे का पूर्वानुमान मानसून ट्रफ की स्थिति पर निर्भर करता है।
मानसून का देश की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ता है?
मौसम वैज्ञानिक ए.के. सिंह के अनुसार, मानसून के चार महीने — जून से सितंबर — देश और समाज दोनों के लिए निर्णायक होते हैं। इसी अवधि में कृषि उत्पादन और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की दिशा काफी हद तक तय होती है।
राष्ट्र प्रेस
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