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मध्य प्रदेश में मानसून सक्रिय: IMD का 6-7 जून को ओलावृष्टि और 70 km/h आंधी का अलर्ट

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मध्य प्रदेश में मानसून सक्रिय: IMD का 6-7 जून को ओलावृष्टि और 70 km/h आंधी का अलर्ट

सारांश

दक्षिण-पश्चिम मानसून की तेज़ रफ़्तार के साथ मध्य प्रदेश में मौसम बिगड़ा। IMD ने 6-7 जून को 30 से अधिक जिलों में ओलावृष्टि, बिजली गिरने और 70 km/h तक आंधी की चेतावनी दी है। भोपाल में 24 घंटे में 22.8 मिमी बारिश रिकॉर्ड हुई।

मुख्य बातें

IMD ने 6 और 7 जून को मध्य प्रदेश के दर्जनों जिलों में गरज-चमक, ओलावृष्टि और 70 km/h तक की आंधी की चेतावनी जारी की।
विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, हरदा, खंडवा और शहडोल में सबसे तीव्र मौसम गतिविधि का अनुमान।
पिछले 24 घंटों में भोपाल में 22.8 मिमी , सांवेर में 17 मिमी और रतलाम में 12 मिमी बारिश दर्ज।
सतना में 56 km/h , सीहोर में 48 km/h की तेज़ हवाएँ रिकॉर्ड की गईं।
किसानों को फ़सल कटाई-मड़ाई स्थगित रखने और जल निकासी सुनिश्चित करने की सलाह।
बारिश का दौर थमने के बाद अधिकतम तापमान में 2-4 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि संभव।

दक्षिण-पश्चिम मानसून की तेज़ होती रफ़्तार के बीच मध्य प्रदेश में मौसम ने अचानक करवट ली है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 6 और 7 जून के लिए राज्य के दर्जनों जिलों में गरज-चमक, आंधी, ओलावृष्टि और 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ़्तार से तेज़ हवाएँ चलने की चेतावनी जारी की है। विभाग के अनुसार शाम और रात के समय मौसम गतिविधियाँ और तीव्र हो सकती हैं।

किन जिलों में है सबसे ज़्यादा ख़तरा

IMD के ताज़ा बुलेटिन के अनुसार, विदिशा, रायसेन (भीमबेटका और सांची सहित), नर्मदापुरम (पचमढ़ी), हरदा, खंडवा (ओंकारेश्वर) और शहडोल में मध्यम स्तर की गरज-चमक के साथ ओलावृष्टि और 70 km/h तक की हवाओं का अनुमान है।

इसके अलावा श्योपुर (कूनो नेशनल पार्क), देवास, सीहोर, मुरैना, राजगढ़, उज्जैन (महाकालेश्वर), शिवपुरी, आगर, शाजापुर, इंदौर, खरगोन, बैतूल, छिंदवाड़ा, सिवनी, भोपाल (बैरागढ़), नरसिंहपुर, सागर, सतना (चित्रकूट), मैहर, रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में हल्की गरज-चमक के साथ 50 km/h तक की तेज़ हवाएँ चल सकती हैं।

पिछले 24 घंटों में दर्ज हुई बारिश

बीते 24 घंटों में भोपाल, इंदौर, उज्जैन, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के कई स्थानों पर वर्षा दर्ज की गई। भोपाल में 22.8 मिमी बारिश रिकॉर्ड हुई, जबकि सांवेर में 17 मिमी, बदनावर में 12.2 मिमी और रतलाम में 12 मिमी वर्षा हुई।

तेज़ हवाओं का असर भी स्पष्ट रहा — सतना में 56 km/h, सीहोर में 48 km/h और आगर में 44 km/h की रफ़्तार से हवाएँ चलीं।

मौसम अस्थिर क्यों है: मौसम विज्ञान की वजह

IMD के अनुसार, उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व उत्तर प्रदेश, झारखंड तथा पंजाब के ऊपर बने चक्रवाती परिसंचरण तंत्र, पश्चिमी विक्षोभ और राजस्थान से दक्षिण ओडिशा तक फैली ट्रफ लाइन मिलकर राज्य में मौसम को अस्थिर बनाए हुए हैं। दक्षिण-पश्चिम मानसून की तेज़ प्रगति से आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियाँ और बढ़ने का अनुमान है। गौरतलब है कि इस बार मानसून की रफ़्तार सामान्य से अधिक बताई जा रही है।

IMD ने यह भी संकेत दिया है कि बारिश और आंधी का यह दौर अगले कुछ दिनों तक जारी रहने के बाद अधिकतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हो सकती है।

आम जनता और किसानों के लिए सलाह

IMD ने आम नागरिकों को गरज-चमक के दौरान घरों के भीतर रहने, खुले मैदानों, पेड़ों और जलाशयों से दूरी बनाने तथा ढीली वस्तुओं को सुरक्षित करने की सलाह दी है।

किसानों से फ़सल की कटाई, मड़ाई और सुखाने का काम फ़िलहाल स्थगित रखने, खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था करने और खड़ी फ़सलों व कृषि ढाँचों को तेज़ हवाओं से बचाने की अपील की गई है। पशुपालकों को भी मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर रखने की हिदायत दी गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ज़मीनी स्तर पर किसानों तक समय पर सूचना पहुँचाने की व्यवस्था अभी भी पर्याप्त नहीं है।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश में 6-7 जून को कैसा मौसम रहेगा?
IMD के अनुसार 6 और 7 जून को राज्य के दर्जनों जिलों में गरज-चमक, ओलावृष्टि और 50 से 70 km/h तक की तेज़ हवाएँ चलने की संभावना है। शाम और रात के समय मौसम और अधिक बिगड़ सकता है।
किन जिलों में ओलावृष्टि का सबसे अधिक ख़तरा है?
विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, हरदा, खंडवा और शहडोल में मध्यम से तीव्र ओलावृष्टि और 70 km/h तक की हवाओं का अनुमान है। इंदौर, भोपाल, उज्जैन सहित 20 से अधिक अन्य जिलों में हल्की से मध्यम गरज-चमक की चेतावनी है।
किसानों को इस मौसम में क्या सावधानियाँ बरतनी चाहिए?
IMD ने किसानों को फ़सल की कटाई, मड़ाई और सुखाने का काम फ़िलहाल टालने की सलाह दी है। खेतों में जल निकासी की व्यवस्था करें और खड़ी फ़सलों व कृषि ढाँचों को तेज़ हवाओं से सुरक्षित रखें।
मध्य प्रदेश में मौसम इतना अस्थिर क्यों है?
IMD के अनुसार उत्तर प्रदेश, झारखंड और पंजाब के ऊपर बने चक्रवाती परिसंचरण, पश्चिमी विक्षोभ और राजस्थान से दक्षिण ओडिशा तक फैली ट्रफ लाइन मिलकर यह अस्थिरता पैदा कर रहे हैं। दक्षिण-पश्चिम मानसून की तेज़ प्रगति ने इसे और बढ़ाया है।
बारिश के बाद तापमान पर क्या असर होगा?
IMD के अनुमान के अनुसार बारिश और आंधी का दौर थमने के बाद अधिकतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हो सकती है। आने वाले दिनों में मानसून की प्रगति के साथ बारिश की गतिविधियाँ और बढ़ सकती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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