15 जुलाई 2026
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मध्य प्रदेश में मानसून सक्रिय: गोरमी में 72 मिमी बारिश, अशोकनगर में 70 km/h हवाएं, IMD का अलर्ट

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मध्य प्रदेश में मानसून सक्रिय: गोरमी में 72 मिमी बारिश, अशोकनगर में 70 km/h हवाएं, IMD का अलर्ट

सारांश

दक्षिण-पश्चिम मानसून मध्य प्रदेश में दस्तक दे चुका है — गोरमी में 72 मिमी बारिश, अशोकनगर में 70 km/h हवाएं और कई जिलों में ओलावृष्टि। IMD ने 31 मई से 3 जून तक राज्य के दर्जनों जिलों में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया है।

मुख्य बातें

गोरमी (भिंड) में 30 मई सुबह 8:30 बजे IST तक सर्वाधिक 72 मिमी बारिश दर्ज की गई।
अशोकनगर में हवा की रफ्तार 70 किलोमीटर प्रति घंटा , ग्वालियर और शिवपुरी में 67 km/h तक पहुँची।
IMD ने 30-31 मई को मंदसौर और नीमच में भारी बारिश, ओलावृष्टि और 50-60 km/h हवाओं का अलर्ट जारी किया।
शिवपुरी, मुरैना, सागर और श्योपुर में ओलावृष्टि; चंबल, ग्वालियर, सागर, उज्जैन, रीवा, शहडोल संभागों में बिजली गिरने की घटनाएं।
31 मई से 3 जून के बीच इंदौर, उज्जैन, देवास, शहडोल, राजगढ़ समेत व्यापक क्षेत्रों में मौसम सक्रिय रहने का अनुमान।
प्रशासन ने किसानों और नागरिकों को सतर्क रहने, खुले में न जाने और फसलों की सुरक्षा के निर्देश दिए।

दक्षिण-पश्चिम मानसून ने मध्य प्रदेश में तेज़ी से पाँव पसारते हुए 30 मई 2026 को राज्य के दर्जनों जिलों में भारी बारिश, ओलावृष्टि, गरज-चमक और तूफानी हवाओं का दौर शुरू कर दिया। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आँकड़ों के अनुसार भिंड जिले के गोरमी में सुबह 8:30 बजे IST तक सर्वाधिक 72 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जबकि अशोकनगर में हवा की रफ्तार 70 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुँच गई। मौसम के इस बदलाव ने एक ओर जहाँ भीषण गर्मी से राहत दी है, वहीं फसलों और बुनियादी ढाँचे को नुकसान की आशंका भी बढ़ा दी है।

मुख्य घटनाक्रम: कहाँ कितनी बारिश

भोपाल स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार 30 मई की सुबह 8:30 बजे IST तक दर्ज आँकड़ों में गोरमी (भिंड) में 72 मिमी के बाद नरवर में 44 मिमी, तेंदूखेड़ा (नरसिंहपुर) में 38 मिमी, बेराड़ में 31 मिमी तथा शुजालपुर और मोहनगढ़ में 29-29 मिमी वर्षा दर्ज की गई। बालदेवगढ़ में 27 मिमी और निवाड़ी में 25 मिमी बारिश हुई, जबकि अन्य कई क्षेत्रों में 15 से 22 मिमी तक वर्षा रिकॉर्ड की गई।

तेज़ हवाओं के मामले में ग्वालियर और शिवपुरी में 67 किलोमीटर प्रति घंटा तथा सीहोर में 59 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार दर्ज की गई। शिवपुरी, मुरैना, सागर और श्योपुर जिलों में ओलावृष्टि की भी खबर है।

IMD का अलर्ट: किन जिलों को रहना होगा सतर्क

IMD ने 30 और 31 मई को मंदसौर और नीमच जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश के साथ बिजली गिरने, ओलावृष्टि और 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज़ हवाएं चलने की चेतावनी जारी की है। ग्वालियर, दतिया, भिंड, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी जिलों में भी मौसम के तीव्र बने रहने का अनुमान है।

31 मई से 3 जून के बीच राजगढ़, आगर मालवा, शहडोल, सीहोर, देवास, इंदौर, उज्जैन और झाबुआ समेत राज्य के व्यापक हिस्सों में गरज-चमक और तूफानी हवाओं का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। चंबल, ग्वालियर, सागर, उज्जैन, रीवा और शहडोल संभागों में बिजली गिरने की घटनाएं भी दर्ज की जा चुकी हैं।

मानसून की आगे की चाल

मौसम विभाग के अनुसार अगले चार से पाँच दिनों में मानसून के अरब सागर, लक्षद्वीप, केरल, तमिलनाडु और बंगाल की खाड़ी के अन्य हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियाँ अनुकूल हैं। उत्तर-पश्चिम उत्तर प्रदेश के ऊपर सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ तथा पाकिस्तान, राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ तक फैली द्रोणिका (ट्रफ) इस मौसमी गतिविधि को बल दे रही है।

आम जनता और किसानों पर असर

प्रशासन ने नागरिकों से आंधी-तूफान के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने, खुले में न रहने और ढीली वस्तुओं को सुरक्षित रखने की अपील की है। किसानों को खेतों में विशेष सावधानी बरतने और बिजली चमकने के दौरान खुले स्थानों पर न जाने की सलाह दी गई है। पशुओं और खड़ी फसलों को ओलावृष्टि व तेज़ हवाओं से बचाने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की यह शुरुआती सक्रियता प्रदेश में लू की स्थिति को काफी हद तक कम करेगी और खरीफ बुवाई के लिए भी अनुकूल साबित हो सकती है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब मई के अंतिम सप्ताह में कई जिलों में तापमान सामान्य से ऊपर बना हुआ था। हालाँकि विभाग हालात पर लगातार नज़र बनाए हुए है और आवश्यकता पड़ने पर नए अलर्ट जारी किए जाएंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो दूसरी ओर 70 km/h से अधिक की हवाएं और ओलावृष्टि उन्हीं फसलों को नुकसान पहुँचा सकती है जिनके लिए बारिश का इंतज़ार था। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के कई जिलों में बुनियादी ढाँचा — विशेषकर बिजली लाइनें और कच्चे मकान — मौसमी आपदाओं के प्रति अब भी संवेदनशील है। IMD की चेतावनी प्रणाली में सुधार हुआ है, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रशासनिक तैयारी और किसानों तक समय पर सूचना पहुँचाना अभी भी असली चुनौती है।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश में मानसून कब आया और किन जिलों में सबसे ज़्यादा बारिश हुई?
दक्षिण-पश्चिम मानसून ने 30 मई 2026 तक मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में सक्रिय रूप से दस्तक दी। IMD के आँकड़ों के अनुसार भिंड जिले के गोरमी में सर्वाधिक 72 मिमी, नरवर में 44 मिमी और तेंदूखेड़ा (नरसिंहपुर) में 38 मिमी बारिश दर्ज की गई।
IMD ने किन जिलों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है?
IMD ने 30-31 मई को मंदसौर और नीमच में भारी बारिश, ओलावृष्टि और 50-60 km/h हवाओं का अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा ग्वालियर, दतिया, भिंड, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में भी मौसम तीव्र रहने का अनुमान है। 31 मई से 3 जून के बीच इंदौर, उज्जैन, देवास, शहडोल और राजगढ़ समेत कई जिले प्रभावित रह सकते हैं।
मध्य प्रदेश में ओलावृष्टि कहाँ-कहाँ हुई?
शिवपुरी, मुरैना, सागर और श्योपुर जिलों में ओलावृष्टि की खबर है। चंबल, ग्वालियर, सागर, उज्जैन, रीवा और शहडोल संभागों के कई हिस्सों में बिजली गिरने की घटनाएं भी दर्ज की गई हैं।
किसानों और आम नागरिकों को क्या सावधानियाँ बरतनी चाहिए?
प्रशासन ने नागरिकों को आंधी-तूफान के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने और खुले में न रहने की सलाह दी है। किसानों को बिजली चमकने के दौरान खेतों और खुले स्थानों पर न जाने तथा पशुओं व खड़ी फसलों को ओलावृष्टि से बचाने के निर्देश दिए गए हैं।
मानसून आगे किन राज्यों में कब तक पहुँचेगा?
IMD के अनुसार अगले चार से पाँच दिनों में मानसून के अरब सागर, लक्षद्वीप, केरल, तमिलनाडु और बंगाल की खाड़ी के अन्य हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियाँ अनुकूल हैं। उत्तर-पश्चिम उत्तर प्रदेश पर सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ तक फैली ट्रफ इस प्रक्रिया को गति दे रही है।
राष्ट्र प्रेस
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