मध्य प्रदेश में मानसून सक्रिय: गोरमी में 72 मिमी बारिश, अशोकनगर में 70 km/h हवाएं, IMD का अलर्ट
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण-पश्चिम मानसून ने मध्य प्रदेश में तेज़ी से पाँव पसारते हुए 30 मई 2026 को राज्य के दर्जनों जिलों में भारी बारिश, ओलावृष्टि, गरज-चमक और तूफानी हवाओं का दौर शुरू कर दिया। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आँकड़ों के अनुसार भिंड जिले के गोरमी में सुबह 8:30 बजे IST तक सर्वाधिक 72 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जबकि अशोकनगर में हवा की रफ्तार 70 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुँच गई। मौसम के इस बदलाव ने एक ओर जहाँ भीषण गर्मी से राहत दी है, वहीं फसलों और बुनियादी ढाँचे को नुकसान की आशंका भी बढ़ा दी है।
मुख्य घटनाक्रम: कहाँ कितनी बारिश
भोपाल स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार 30 मई की सुबह 8:30 बजे IST तक दर्ज आँकड़ों में गोरमी (भिंड) में 72 मिमी के बाद नरवर में 44 मिमी, तेंदूखेड़ा (नरसिंहपुर) में 38 मिमी, बेराड़ में 31 मिमी तथा शुजालपुर और मोहनगढ़ में 29-29 मिमी वर्षा दर्ज की गई। बालदेवगढ़ में 27 मिमी और निवाड़ी में 25 मिमी बारिश हुई, जबकि अन्य कई क्षेत्रों में 15 से 22 मिमी तक वर्षा रिकॉर्ड की गई।
तेज़ हवाओं के मामले में ग्वालियर और शिवपुरी में 67 किलोमीटर प्रति घंटा तथा सीहोर में 59 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार दर्ज की गई। शिवपुरी, मुरैना, सागर और श्योपुर जिलों में ओलावृष्टि की भी खबर है।
IMD का अलर्ट: किन जिलों को रहना होगा सतर्क
IMD ने 30 और 31 मई को मंदसौर और नीमच जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश के साथ बिजली गिरने, ओलावृष्टि और 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज़ हवाएं चलने की चेतावनी जारी की है। ग्वालियर, दतिया, भिंड, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी जिलों में भी मौसम के तीव्र बने रहने का अनुमान है।
31 मई से 3 जून के बीच राजगढ़, आगर मालवा, शहडोल, सीहोर, देवास, इंदौर, उज्जैन और झाबुआ समेत राज्य के व्यापक हिस्सों में गरज-चमक और तूफानी हवाओं का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। चंबल, ग्वालियर, सागर, उज्जैन, रीवा और शहडोल संभागों में बिजली गिरने की घटनाएं भी दर्ज की जा चुकी हैं।
मानसून की आगे की चाल
मौसम विभाग के अनुसार अगले चार से पाँच दिनों में मानसून के अरब सागर, लक्षद्वीप, केरल, तमिलनाडु और बंगाल की खाड़ी के अन्य हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियाँ अनुकूल हैं। उत्तर-पश्चिम उत्तर प्रदेश के ऊपर सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ तथा पाकिस्तान, राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ तक फैली द्रोणिका (ट्रफ) इस मौसमी गतिविधि को बल दे रही है।
आम जनता और किसानों पर असर
प्रशासन ने नागरिकों से आंधी-तूफान के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने, खुले में न रहने और ढीली वस्तुओं को सुरक्षित रखने की अपील की है। किसानों को खेतों में विशेष सावधानी बरतने और बिजली चमकने के दौरान खुले स्थानों पर न जाने की सलाह दी गई है। पशुओं और खड़ी फसलों को ओलावृष्टि व तेज़ हवाओं से बचाने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की यह शुरुआती सक्रियता प्रदेश में लू की स्थिति को काफी हद तक कम करेगी और खरीफ बुवाई के लिए भी अनुकूल साबित हो सकती है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब मई के अंतिम सप्ताह में कई जिलों में तापमान सामान्य से ऊपर बना हुआ था। हालाँकि विभाग हालात पर लगातार नज़र बनाए हुए है और आवश्यकता पड़ने पर नए अलर्ट जारी किए जाएंगे।