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ट्रंप ने भारत के वोटर आईडी सिस्टम को सराहा, विशेषज्ञ वाइल अव्वाद बोले — अमेरिका ले सकता है एशियाई चुनाव मॉडल से सबक

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ट्रंप ने भारत के वोटर आईडी सिस्टम को सराहा, विशेषज्ञ वाइल अव्वाद बोले — अमेरिका ले सकता है एशियाई चुनाव मॉडल से सबक

सारांश

ट्रंप की भारतीय चुनाव व्यवस्था की तारीफ महज शिष्टाचार नहीं — विशेषज्ञ वाइल अव्वाद इसे अमेरिकी सुधार की माँग से जोड़ते हैं। मिड-टर्म चुनाव की पृष्ठभूमि में यह बयान संकेत देता है कि पश्चिम अब एशियाई लोकतांत्रिक मॉडलों को गंभीरता से देख रहा है।

मुख्य बातें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत की वोटर आईडी, आधार वेरिफिकेशन और बर्थ सर्टिफिकेट आधारित चुनावी व्यवस्था की सराहना की।
विदेश मामलों के विशेषज्ञ वाइल अव्वाद के अनुसार ट्रंप का उद्देश्य अमेरिकी चुनाव प्रणाली को बेहतर बनाना है, न कि भारतीय मॉडल की हूबहू नकल करना।
अव्वाद ने कहा कि अमेरिका में मिड-टर्म चुनाव नज़दीक हैं और ट्रंप मतदान प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना चाहते हैं।
विशेषज्ञ ने कहा कि अब पश्चिमी देश एशियाई चुनाव मॉडल अपनाने पर विचार कर सकते हैं — वैश्विक रुझान बदल रहा है।
नवनियुक्त अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर को ट्रंप का करीबी बताते हुए अव्वाद ने भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के और मज़बूत होने की उम्मीद जताई।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय चुनावी व्यवस्था की सराहना किए जाने के बाद विदेश मामलों के विशेषज्ञ वाइल अव्वाद ने 18 अगस्त को कहा कि अमेरिका और भारत की मतदान प्रणाली में बुनियादी अंतर है, लेकिन ट्रंप का उद्देश्य अमेरिकी चुनाव प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ बनाना है। अव्वाद के अनुसार, भारत में वोटर आईडी, आधार कार्ड वेरिफिकेशन और बर्थ सर्टिफिकेट जैसी व्यवस्थाएँ दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को सुव्यवस्थित रूप से संचालित करने में सहायक हैं।

दोनों देशों की चुनाव प्रणाली में क्या अंतर है

अव्वाद ने स्पष्ट किया कि अमेरिका में विकेंद्रीकृत (डिसेंट्रलाइज्ड) चुनाव प्रणाली है, जबकि भारत में केंद्रीय रूप से प्रबंधित मतदाता पहचान ढाँचा लागू है। उन्होंने कहा, 'अमेरिका और भारत के वोटिंग सिस्टम में काफी फर्क है। अगर ट्रंप इसका जिक्र कर रहे हैं तो इसका मकसद वहाँ की चुनाव प्रणाली को और बेहतर बनाना है।' भारत में मतदाता को वोटिंग बूथ पर उपस्थित होना अनिवार्य है, जो अमेरिका की मेल-इन वोटिंग और अर्ली वोटिंग व्यवस्था से भिन्न है।

मिड-टर्म चुनाव की पृष्ठभूमि में ट्रंप का बयान

अव्वाद ने यह भी रेखांकित किया कि अमेरिका में मिड-टर्म चुनाव निकट हैं और राष्ट्रपति ट्रंप स्वयं यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि मतदान प्रक्रिया में कोई अनियमितता न हो। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में चुनावी पारदर्शिता को लेकर बहस तेज़ है। गौरतलब है कि ट्रंप पहले भी अमेरिकी चुनाव प्रणाली में सुधार की वकालत करते रहे हैं।

पश्चिम का एशियाई मॉडल की ओर रुझान

अव्वाद ने कहा कि वैश्विक परिदृश्य बदल रहा है। उनके अनुसार, 'पहले हम पश्चिमी दुनिया का अनुसरण करते थे, लेकिन आज अमेरिका या अन्य पश्चिमी देश एशियाई सिस्टम का इस्तेमाल कर सकते हैं।' उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने के बावजूद अपनी चुनाव प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करता है, इसलिए लोकतांत्रिक व्यवस्था में भारत को उच्च दर्जा दिया जाना उचित है।

राजदूत सर्जियो गोर और भारत-अमेरिका संबंध

अव्वाद ने भारत में नवनियुक्त अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर को राष्ट्रपति ट्रंप का करीबी सहयोगी बताया और कहा कि उनकी नियुक्ति दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय और रणनीतिक साझेदारी को और प्रगाढ़ करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने ट्रंप प्रशासन के साथ संबंधों में दृढ़ता से अपना पक्ष रखा और किसी भी मुद्दे पर समझौता नहीं किया। आगे चलकर यदि दोनों पक्षों में आपसी सहमति बनती है, तो द्विपक्षीय संबंध और मज़बूत हो सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

अव्वाद की तुलना में एक बड़ी खामी है: भारत की आधार-आधारित व्यवस्था एक केंद्रीकृत बायोमेट्रिक ढाँचे पर टिकी है, जिसे अमेरिका की संघीय संरचना और नागरिक स्वतंत्रता परंपराओं में सीधे लागू करना संभव नहीं। यह बहस असल में इस बारे में कम है कि भारत का मॉडल बेहतर है या नहीं — और इस बारे में अधिक है कि ट्रंप अपने चुनावी एजेंडे को अंतरराष्ट्रीय उदाहरणों से वैध ठहराने की कोशिश कर रहे हैं।
RashtraPress
19 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्रंप ने भारत की चुनाव प्रणाली की तारीफ क्यों की?
विशेषज्ञ वाइल अव्वाद के अनुसार, ट्रंप का उद्देश्य भारतीय मॉडल की नकल करना नहीं, बल्कि अमेरिकी चुनाव प्रणाली में सुधार की अपनी माँग को अंतरराष्ट्रीय उदाहरणों से बल देना है। यह बयान अमेरिकी मिड-टर्म चुनाव की पृष्ठभूमि में आया है।
भारत और अमेरिका की वोटिंग प्रणाली में क्या मुख्य अंतर है?
भारत में वोटर आईडी, आधार कार्ड वेरिफिकेशन और बर्थ सर्टिफिकेट पर आधारित केंद्रीकृत व्यवस्था है और मतदान बूथ पर उपस्थिति अनिवार्य है। अमेरिका में विकेंद्रीकृत प्रणाली है जिसमें मेल-इन वोटिंग और अर्ली वोटिंग जैसे विकल्प उपलब्ध हैं।
वाइल अव्वाद कौन हैं और उनकी राय क्यों महत्वपूर्ण है?
वाइल अव्वाद विदेश मामलों के विशेषज्ञ हैं जिन्होंने भारत-अमेरिका संबंधों और चुनावी प्रणालियों पर विश्लेषण दिया है। उनकी टिप्पणी इसलिए प्रासंगिक है क्योंकि वे दोनों देशों के राजनीतिक और कूटनीतिक संदर्भ को जोड़कर देखते हैं।
सर्जियो गोर कौन हैं और भारत-अमेरिका संबंधों पर उनका क्या प्रभाव होगा?
सर्जियो गोर भारत में नवनियुक्त अमेरिकी राजदूत हैं, जिन्हें अव्वाद ने राष्ट्रपति ट्रंप का करीबी सहयोगी बताया है। उनकी नियुक्ति से भारत-अमेरिका द्विपक्षीय और रणनीतिक साझेदारी के और प्रगाढ़ होने की उम्मीद जताई जा रही है।
क्या पश्चिमी देश वाकई भारत जैसी चुनाव प्रणाली अपना सकते हैं?
अव्वाद के अनुसार यह संभव है और वैश्विक रुझान बदल रहा है — पहले एशियाई देश पश्चिम का अनुसरण करते थे, अब स्थिति उलट हो सकती है। हालाँकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि हर देश की संवैधानिक और प्रशासनिक संरचना के अनुसार अनुकूलन ज़रूरी होगा।
राष्ट्र प्रेस
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