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चुनाव आयोग पर सवालों के बीच ट्रंप के बयान को प्रचारित करने पर विपक्ष का हमला

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चुनाव आयोग पर सवालों के बीच ट्रंप के बयान को प्रचारित करने पर विपक्ष का हमला

सारांश

ट्रंप के 'सेव अमेरिका एक्ट' बयान में भारत की चुनाव प्रणाली की तारीफ को सरकार ने प्रमुखता से प्रचारित किया — और विपक्ष ने इसे घेरे में खड़े चुनाव आयोग को बचाने की विदेशी कोशिश करार दिया। कांग्रेस और सपा का सीधा सवाल: जब देश का 80% जनमत आयोग पर संदेह करे, तो ट्रंप का प्रमाणपत्र काफी है?

मुख्य बातें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'सेव अमेरिका एक्ट' के समर्थन में भारत की चुनाव प्रणाली का सकारात्मक उल्लेख किया, जिसे सरकार ने प्रचारित किया।
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में आयोग की साख घटी है और अब विदेशी बयान से उसे बचाने की कोशिश हो रही है।
सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने कहा कि देश के 80 प्रतिशत लोग चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हैं, यह बात ज्ञानेश कुमार ट्रंप को क्यों नहीं बताते।
सपा ने यह भी रेखांकित किया कि अमेरिका में आज भी बैलेट पेपर से चुनाव होते हैं — EVM पर भारत का विपक्षी विवाद अप्रत्यक्ष रूप से उजागर हुआ।
इंडिया गठबंधन ने ट्रंप बयान को राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित प्रचार करार दिया।

लखनऊ, 18 अगस्त: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 'सेव अमेरिका एक्ट' के समर्थन में भारत की चुनाव प्रणाली की तारीफ किए जाने के बाद इंडिया गठबंधन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और समाजवादी पार्टी (सपा) ने आरोप लगाया है कि जब देश में चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं, तब सरकार एक विदेशी नेता के बयान की आड़ में उसे वैध ठहराने की कोशिश कर रही है।

कांग्रेस का आरोप: विदेश से साख बचाने की कोशिश

कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि देश में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर भारी आलोचना हो रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार अब अपनी चुनावी साख बचाने के लिए विदेशी समर्थन की ओर देख रही है।

राजपूत ने कहा, 'भारत का चुनाव आयोग पहले बेहतरीन तरीके से काम करता था। जब तक ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त नहीं बने थे और जब तक भाजपा की सरकार केंद्र में नहीं आई थी, तब तक इस चुनाव आयोग को पूरी दुनिया में प्रशंसा मिली थी।' उन्होंने यह भी कहा कि आज चुनाव आयोग संदेह के घेरे में है और ट्रंप के बयान का सहारा लेकर उस संदेह को गलत साबित करने की कोशिश 'बहुत ही शर्म की बात है।'

सपा का तंज: सवाल ही गलत था

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि ज्ञानेश कुमार ने ट्रंप से यह पूछा था कि बिना फोटो पहचान-पत्र के अमेरिका में इतने बड़े पैमाने पर चुनाव कैसे कराए जा सकते हैं। वर्मा के अनुसार, 'सवाल ही गलत है। इसके बजाय उनको यह पूछना चाहिए था कि आपके देश में लोकतंत्र पर हमला क्यों नहीं हुआ और लोकतंत्र पर सवाल क्यों नहीं उठाए गए।'

वर्मा ने आगे कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त अमेरिका जाकर फोटो आईडी और वोटर आईडी की बात करते हैं, लेकिन यह नहीं बताते कि देश के 80 प्रतिशत लोग उन पर सवाल उठाते हैं।

लोकतंत्र और बैलेट पेपर पर सपा की दलील

सपा प्रवक्ता ने यह भी कहा, 'लोकतंत्र में एक तरफ का संवाद नहीं होना चाहिए। अमेरिका में लोकतंत्र जीवित है और वो हमें दिखता है। आज भी वहाँ बैलेट पेपर से चुनाव होते हैं।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की विश्वसनीयता को लेकर विपक्षी दलों की आपत्तियाँ लंबे समय से चली आ रही हैं।

पृष्ठभूमि: ट्रंप का वह बयान

गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'सेव अमेरिका एक्ट' के समर्थन में बोलते हुए भारत की चुनाव प्रणाली का उल्लेख किया था। इस बयान को भारत में सत्तापक्ष की ओर से प्रमुखता से प्रचारित किया गया, जिसके बाद विपक्ष ने इसे राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित करार दिया। यह पहला मौका नहीं है जब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच टकराव सामने आया हो — आलोचकों का कहना है कि यह विवाद भारतीय लोकतंत्र की संस्थागत विश्वसनीयता के व्यापक प्रश्न को उजागर करता है।

आगे क्या

विपक्षी दलों की इस प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि चुनाव आयोग की स्वायत्तता और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका आने वाले दिनों में संसदीय और सार्वजनिक बहस का केंद्र बनी रहेगी। इंडिया गठबंधन के रुख से यह भी संकेत मिलता है कि वह इस मुद्दे को अगले चुनावी चक्र तक जीवित रखने की रणनीति पर काम कर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह दोधारी तलवार है — क्योंकि ट्रंप की अपनी चुनावी विश्वसनीयता अमेरिका में विवादास्पद रही है। असली सवाल यह है कि क्या भारत का चुनाव आयोग किसी विदेशी नेता के प्रशस्तिपत्र से नहीं, बल्कि पारदर्शी और स्वतंत्र आचरण से अपनी साख पुनः स्थापित करेगा। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है कि यह बहस EVM तक सीमित नहीं — यह संस्थागत स्वायत्तता के क्षरण की व्यापक कहानी का हिस्सा है।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्रंप ने भारत की चुनाव प्रणाली के बारे में क्या कहा था?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'सेव अमेरिका एक्ट' के समर्थन में बोलते हुए भारत की चुनाव प्रणाली का सकारात्मक उल्लेख किया। इस बयान को भारत में सत्तापक्ष की ओर से प्रमुखता से प्रचारित किया गया, जिसके बाद विपक्ष ने इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित करार दिया।
कांग्रेस ने ट्रंप के बयान के प्रचार पर क्या आपत्ति जताई?
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में चुनाव आयोग की साख पर सवाल उठे हैं और अब ट्रंप के बयान का सहारा लेकर उस संदेह को गलत साबित करने की कोशिश 'बहुत ही शर्म की बात है।' उनका आरोप है कि सरकार विदेशी समर्थन से घरेलू आलोचना को दबाना चाहती है।
समाजवादी पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अमेरिका यात्रा पर क्या कहा?
सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने कहा कि ज्ञानेश कुमार अमेरिका जाकर फोटो आईडी और वोटर आईडी की बात करते हैं, लेकिन यह नहीं बताते कि देश के 80 प्रतिशत लोग उन पर सवाल उठाते हैं। वर्मा के अनुसार, ज्ञानेश कुमार को ट्रंप से यह पूछना चाहिए था कि अमेरिका में लोकतंत्र पर सवाल क्यों नहीं उठाए गए।
क्या चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर यह पहली बार सवाल उठे हैं?
नहीं, आलोचकों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में EVM की विश्वसनीयता, चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और आयोग की स्वायत्तता को लेकर विपक्षी दलों की आपत्तियाँ लगातार सामने आती रही हैं। ट्रंप के बयान को लेकर उठा यह विवाद उसी दीर्घकालिक तनाव का नवीनतम अध्याय है।
इंडिया गठबंधन का इस मुद्दे पर आगे क्या रुख रहेगा?
विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया से संकेत मिलता है कि वे चुनाव आयोग की स्वायत्तता और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका को आने वाले संसदीय सत्रों और चुनावी बहसों में केंद्रीय मुद्दा बनाए रखेंगे। इंडिया गठबंधन इसे संस्थागत स्वतंत्रता के व्यापक प्रश्न से जोड़कर जनता के बीच ले जाने की रणनीति पर काम कर रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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