एसआईआर विवाद: सपा सांसद रामजी लाल सुमन का भाजपा पर सीधा हमला — 'भाजपा CEC को बचाने में बेताब क्यों?'
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद रामजी लाल सुमन ने 27 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला और सवाल उठाया कि पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को एसआईआर (SIR) विवाद में बचाने के लिए इतनी आतुर क्यों है। यह बयान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की एसआईआर विवाद पर की गई टिप्पणी के जवाब में आया।
चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सुमन के सवाल
सांसद सुमन ने कहा, 'पहले समाजवादी पार्टी या कांग्रेस पार्टी चुनाव आयोग के काम करने के तरीके की आलोचना करती थीं, लेकिन अब मुख्य चुनाव आयुक्त के दो सहयोगियों ने उन पर आरोप लगाया है कि वे उनकी आपत्तियों को नजरअंदाज करके एकतरफा फैसले लेते हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर शिकायत पर BJP की बेचैनी इस बात का संकेत है कि CEC ने जो भी किया, वह भाजपा के इशारे पर किया।
उनके अनुसार, इस विवाद ने 'पूरी दुनिया में' यह संदेश पहुँचाया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त का कामकाज पारदर्शी और निष्पक्ष नहीं था। सुमन ने दावा किया कि देश के आम नागरिक — जो किसी भी राजनीतिक दल से नहीं जुड़े हैं — भी चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं।
राम मंदिर चढ़ावा मामले पर तीखी प्रतिक्रिया
सपा सांसद ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में चंपत राय को उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से मिली क्लीनचिट पर भी कड़ी आपत्ति जताई। सुमन ने कहा कि यह 'बड़े लोगों को बचाने की कोशिश' है। उन्होंने तर्क दिया कि उत्तर प्रदेश की एसआईटी (SIT) द्वारा की जा रही जाँच उसी राज्य सरकार के अधीन है, इसलिए उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
इंडी अलायंस की बैठक पर सपा का रुख
आगामी इंडी अलायंस की बैठक को लेकर सुमन ने स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी गठबंधन का अभिन्न हिस्सा बनी हुई है। उन्होंने कहा, 'अगर सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव व्यस्त हैं, तो पार्टी का प्रतिनिधित्व जरूर होगा — वे अपनी तरफ से लोगों को भेजेंगे।' यह बयान उन अटकलों के बीच आया है जिनमें सपा की इंडी अलायंस में सक्रिय भागीदारी पर सवाल उठाए जा रहे थे।
व्यापक राजनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि एसआईआर (SIR) विवाद हाल के हफ्तों में विपक्षी दलों और सत्तारूढ़ BJP के बीच टकराव का केंद्रबिंदु बन गया है। यह ऐसे समय में आया है जब चुनाव आयोग की स्वायत्तता और उसके कामकाज को लेकर राष्ट्रीय बहस तेज़ हो रही है। CEC के दो सहयोगियों द्वारा उनके खिलाफ आरोप लगाना अभूतपूर्व माना जा रहा है और विपक्ष इसे संस्थागत संकट के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। भाजपा की ओर से अब तक इन आरोपों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
आने वाले दिनों में इंडी अलायंस की बैठक और संसद सत्र में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।