12 अक्टूबर 2026
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एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सपा सांसदों का निशाना, विपक्ष ने इस्तीफे की माँग दोहराई

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एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सपा सांसदों का निशाना, विपक्ष ने इस्तीफे की माँग दोहराई

सारांश

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली और एसआईआर में कथित अनियमितताओं को लेकर सपा सांसदों और जमात-ए-इस्लामी हिंद ने मोर्चा खोल दिया है। विपक्ष इसे महज राजनीतिक नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान से जुड़ा मुद्दा बता रहा है।

मुख्य बातें

सपा सांसद रामजी लाल सुमन ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज पर युवाओं, छात्रों, बुद्धिजीवियों और वकीलों सहित समाज के विभिन्न वर्गों में विरोध है।
सपा सांसद जिया उर रहमान बर्क ने विपक्ष की इस्तीफे की माँग दोहराई; कहा — संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत विरोध जारी रहेगा।
जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष प्रो.
मोहम्मद सलीम इंजीनियर ने एसआईआर में बड़े पैमाने पर कथित अनियमितताओं और वैध मतदाताओं के नाम हटाए जाने का दावा किया।
10 अक्टूबर 2026 के प्रदर्शन से पहले दिल्ली में ट्रेनें रद्द और मेट्रो स्टेशन बंद किए जाने से कर्फ्यू जैसी स्थिति बनी, ऐसा विपक्ष का आरोप है।
चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विपक्षी दलों का दबाव 12 अक्टूबर 2026 को और तेज़ हो गया। समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद रामजी लाल सुमन और जिया उर रहमान बर्क ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर खुलकर नाराज़गी जताई और संवैधानिक व कानूनी प्रक्रिया के तहत विरोध जारी रखने की घोषणा की। जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष प्रोफेसर मोहम्मद सलीम इंजीनियर ने भी कथित अनियमितताओं और प्रदर्शनों पर प्रतिबंधों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की।

सपा सांसदों के आरोप

उत्तर प्रदेश के बरेली से सपा सांसद रामजी लाल सुमन ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज को लेकर जनता में व्यापक विरोध है। उनके अनुसार, यह मुद्दा केवल राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं है — युवा, छात्र, बुद्धिजीवी और वकील जैसे समाज के विभिन्न वर्ग भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की आलोचना कर रहे हैं।

सपा सांसद जिया उर रहमान बर्क ने कहा कि वे अपनी पार्टी और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ शुरुआत से ही इस विरोध में शामिल रहे हैं। बर्क ने इसे जनता से जुड़ा मुद्दा बताते हुए सभी वर्गों से एकजुट होकर आवाज़ उठाने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष ज़रूरी इस्तीफों की माँग कर रहा है, लेकिन संबंधित पदाधिकारी अब तक इस्तीफा देने से इनकार कर रहे हैं।

एसआईआर पर कथित अनियमितताओं के दावे

जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष प्रोफेसर मोहम्मद सलीम इंजीनियर ने कहा कि देशभर में एसआईआर को लेकर नाराज़गी है। उन्होंने दावा किया — हालाँकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है — कि बड़े पैमाने पर कथित अनियमितताएँ हुई हैं और बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं।

इंजीनियर ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि उसका कामकाज संविधान की मूल भावना के अनुरूप नहीं दिखाई देता। यह आरोप ऐसे समय में आया है जब कई विपक्षी दल एसआईआर की प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं।

10 अक्टूबर के प्रदर्शन और सुरक्षा प्रतिबंध

प्रोफेसर इंजीनियर ने 10 अक्टूबर 2026 के प्रदर्शन से पहले दिल्ली में लागू किए गए सुरक्षा प्रतिबंधों का उल्लेख किया। उनके अनुसार, ट्रेनें रद्द की गईं और मेट्रो स्टेशन बंद किए गए, जिससे शहर में कर्फ्यू जैसी स्थिति बन गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार देशभर में हो रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को दबाने का प्रयास कर रही है।

व्यापक राजनीतिक संदर्भ

गौरतलब है कि एसआईआर को लेकर विवाद पिछले कुछ हफ्तों से उठता रहा है, और अब यह विपक्ष के लिए एक केंद्रीय मुद्दा बनता जा रहा है। विपक्षी दल चुनाव आयोग की स्वायत्तता और पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए इसे लोकतंत्र की बुनियाद से जोड़ रहे हैं। चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

आने वाले दिनों में विपक्ष के रुख और चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया पर सबकी नज़र रहेगी, क्योंकि यह विवाद चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता के सवाल से सीधे जुड़ा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह संकेत गंभीर है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस बात को नज़रअंदाज़ करती है कि प्रदर्शनों पर कथित प्रतिबंध और मतदाता सूची से नाम हटाने के दावे — अगर सत्यापित होते हैं — तो ये लोकतांत्रिक प्रक्रिया की नींव को हिला सकते हैं। चुनाव आयोग को इन आरोपों का सार्वजनिक और तथ्यपूर्ण जवाब देना होगा, अन्यथा चुप्पी खुद एक राजनीतिक संदेश बन जाएगी।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) क्या है और यह विवाद क्यों बना?
एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों को अद्यतन करने की एक प्रक्रिया है। विपक्षी दलों और नागरिक संगठनों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर कथित अनियमितताएँ हुई हैं और वैध मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जिससे यह विवाद का केंद्र बन गया है।
सपा सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त से क्या माँग की है?
सपा सांसद जिया उर रहमान बर्क ने स्पष्ट किया कि विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार सहित संबंधित पदाधिकारियों से इस्तीफे की माँग कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह माँग संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत जारी रहेगी।
10 अक्टूबर 2026 के दिल्ली प्रदर्शन में क्या हुआ था?
प्रोफेसर मोहम्मद सलीम इंजीनियर के अनुसार, 10 अक्टूबर 2026 के शांतिपूर्ण प्रदर्शन से पहले दिल्ली में सुरक्षा प्रतिबंध लगाए गए, ट्रेनें रद्द की गईं और मेट्रो स्टेशन बंद किए गए। उनका दावा है कि इससे शहर में कर्फ्यू जैसी स्थिति बन गई थी।
क्या चुनाव आयोग ने इन आरोपों पर कोई जवाब दिया है?
इस रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयोग की ओर से विपक्ष के इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। विपक्ष का विरोध जारी है और संस्था की चुप्पी खुद सवालों के घेरे में आ रही है।
इस विरोध में राजनीतिक दलों के अलावा और कौन शामिल है?
सपा सांसद रामजी लाल सुमन के अनुसार, यह विरोध केवल राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं है। युवा, छात्र, बुद्धिजीवी और वकील जैसे समाज के विभिन्न वर्ग भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की आलोचना कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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