एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सपा सांसदों का निशाना, विपक्ष ने इस्तीफे की माँग दोहराई
सारांश
मुख्य बातें
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विपक्षी दलों का दबाव 12 अक्टूबर 2026 को और तेज़ हो गया। समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद रामजी लाल सुमन और जिया उर रहमान बर्क ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर खुलकर नाराज़गी जताई और संवैधानिक व कानूनी प्रक्रिया के तहत विरोध जारी रखने की घोषणा की। जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष प्रोफेसर मोहम्मद सलीम इंजीनियर ने भी कथित अनियमितताओं और प्रदर्शनों पर प्रतिबंधों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की।
सपा सांसदों के आरोप
उत्तर प्रदेश के बरेली से सपा सांसद रामजी लाल सुमन ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज को लेकर जनता में व्यापक विरोध है। उनके अनुसार, यह मुद्दा केवल राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं है — युवा, छात्र, बुद्धिजीवी और वकील जैसे समाज के विभिन्न वर्ग भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की आलोचना कर रहे हैं।
सपा सांसद जिया उर रहमान बर्क ने कहा कि वे अपनी पार्टी और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ शुरुआत से ही इस विरोध में शामिल रहे हैं। बर्क ने इसे जनता से जुड़ा मुद्दा बताते हुए सभी वर्गों से एकजुट होकर आवाज़ उठाने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष ज़रूरी इस्तीफों की माँग कर रहा है, लेकिन संबंधित पदाधिकारी अब तक इस्तीफा देने से इनकार कर रहे हैं।
एसआईआर पर कथित अनियमितताओं के दावे
जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष प्रोफेसर मोहम्मद सलीम इंजीनियर ने कहा कि देशभर में एसआईआर को लेकर नाराज़गी है। उन्होंने दावा किया — हालाँकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है — कि बड़े पैमाने पर कथित अनियमितताएँ हुई हैं और बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं।
इंजीनियर ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि उसका कामकाज संविधान की मूल भावना के अनुरूप नहीं दिखाई देता। यह आरोप ऐसे समय में आया है जब कई विपक्षी दल एसआईआर की प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं।
10 अक्टूबर के प्रदर्शन और सुरक्षा प्रतिबंध
प्रोफेसर इंजीनियर ने 10 अक्टूबर 2026 के प्रदर्शन से पहले दिल्ली में लागू किए गए सुरक्षा प्रतिबंधों का उल्लेख किया। उनके अनुसार, ट्रेनें रद्द की गईं और मेट्रो स्टेशन बंद किए गए, जिससे शहर में कर्फ्यू जैसी स्थिति बन गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार देशभर में हो रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को दबाने का प्रयास कर रही है।
व्यापक राजनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि एसआईआर को लेकर विवाद पिछले कुछ हफ्तों से उठता रहा है, और अब यह विपक्ष के लिए एक केंद्रीय मुद्दा बनता जा रहा है। विपक्षी दल चुनाव आयोग की स्वायत्तता और पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए इसे लोकतंत्र की बुनियाद से जोड़ रहे हैं। चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
आने वाले दिनों में विपक्ष के रुख और चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया पर सबकी नज़र रहेगी, क्योंकि यह विवाद चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता के सवाल से सीधे जुड़ा है।