सपा सांसद जियाउर रहमान बर्क का ऐलान: ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा होने तक जारी रहेगा आंदोलन
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद जियाउर रहमान बर्क ने 7 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची से काटे गए वोटों की बहाली तक अपना धरना-प्रदर्शन व आंदोलन जारी रखने का स्पष्ट ऐलान किया। उन्होंने चुनाव आयोग पर पक्षपात के आरोप लगाते हुए संवैधानिक संस्थाओं से जनता के घटते भरोसे को लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी बताया।
मुख्य घटनाक्रम
सपा सांसद जियाउर रहमान बर्क ने कहा, 'भाजपा की नीति है कि कभी भी कोई शांतिपूर्ण तरीके से, संवैधानिक तौर पर धरना-प्रदर्शन करता है, चाहे सांसद-विधायक हो या आम जनता, तो उनको हिरासत में लिया जाता है। उसी के तहत मंगलवार को भी हुआ।' उन्होंने यह भी कहा कि यह मुद्दा केवल विपक्षी दलों का नहीं, बल्कि आम जनता के मतदान अधिकारों से जुड़ा है।
बर्क ने आरोप लगाया कि जिस तरह से नागरिकों के वोट काटे जा रहे हैं और संविधान-प्रदत्त अधिकार छीने जा रहे हैं, उसके विरोध में यह आंदोलन शुरू किया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, प्रदर्शन बंद नहीं होगा।
चुनाव आयोग पर आरोप
सपा नेता ने तीखे सवाल उठाते हुए कहा कि जब वे चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त पर सवाल उठाते हैं, तो भारतीय जनता पार्टी (BJP) जवाब देती है। उनका तर्क था कि सफाई देने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है, न कि किसी राजनीतिक दल की। उन्होंने कहा, 'यह चुनाव आयोग भाजपा की संस्था नहीं है, यह संवैधानिक संस्था है।'
बर्क ने आगे जोड़ा कि यदि चुनाव आयोग निष्पक्ष नहीं रहा तो चुनाव निष्पक्ष नहीं हो सकते और इसके बिना संवैधानिक सरकार का गठन संभव नहीं होगा। उनके अनुसार आम जनता भी धीरे-धीरे इस स्थिति को समझ रही है और यह आगे चलकर एक व्यापक जन-आंदोलन का रूप ले सकता है।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया
कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने भी इस मुद्दे पर स्वर मिलाते हुए कहा कि राहुल गांधी समेत इंडी गठबंधन के नेता अपनी माँगों को लेकर निर्वाचन आयुक्त के दफ्तर जाएंगे। उन्होंने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि रिजिजू इस विरोध को 'ड्रामा' कहते हैं तो वे देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया और नागरिकों की आवाज़ का अपमान कर रहे हैं।
माथेर ने दावा किया कि यह भावना केवल कांग्रेस या इंडिया ब्लॉक तक सीमित नहीं, बल्कि नागरिक समाज, युवा और छात्र भी इसे महसूस कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर की कोई भी कोशिश आंदोलन को नहीं रोक सकती।
आम जनता पर असर
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब कई राज्यों में चुनाव प्रक्रियाओं को लेकर पारदर्शिता की माँग तेज हो रही है। मतदाता सूची में कथित छेड़छाड़ के आरोप न केवल राजनीतिक हलकों, बल्कि नागरिक अधिकार संगठनों में भी चर्चा का विषय बने हैं। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए हों।
क्या होगा आगे
सपा सांसद बर्क ने स्पष्ट किया है कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और काटे गए मतों की बहाली तक उनका आंदोलन निरंतर जारी रहेगा। इंडी गठबंधन के नेताओं की निर्वाचन आयुक्त कार्यालय की संभावित भेंट और आगामी प्रदर्शनों की रूपरेखा आने वाले दिनों में और स्पष्ट होगी। इस पूरे घटनाक्रम पर देश का सियासी नज़रिया टिका हुआ है।