ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा लेकर रहेंगे — इंडिया ब्लॉक की बैठक के बाद विपक्ष का ऐलान, 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग मार्च
सारांश
मुख्य बातें
इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने 30 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में हुई संयुक्त बैठक के बाद स्पष्ट किया कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, उनका विरोध अभियान जारी रहेगा। बैठक में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), EVM और फॉर्म-6 में कथित हेरफेर के मुद्दे प्रमुखता से उठे।
बैठक में क्या तय हुआ
विपक्षी गठबंधन ने 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक राष्ट्रव्यापी अभियान चलाने का निर्णय लिया। 6 अक्टूबर को सभी विपक्षी सांसद चुनाव आयोग के कार्यालय पर जाएंगे और राष्ट्रपति से भी मुलाकात की योजना है। इसके अलावा देश के विभिन्न हिस्सों में बड़ी रैलियाँ आयोजित की जाएंगी।
नेताओं के बयान
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए काम कर रहा है। कांग्रेस सांसद नसीर हुसैन ने कहा कि जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, उनके पीछे की ताकतों की पहचान नहीं होती और जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक यह विरोध जारी रहेगा।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने दावा किया कि फॉर्म-6 में किए गए बदलाव सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद हुए और इस तथ्य को न्यायालय से भी छिपाया जा रहा है। कांग्रेस सांसद जोस के. मणि ने कहा कि फॉर्म-6 में हेरफेर जानबूझकर किया गया है और यह अब साबित हो चुका है।
सुप्रीम कोर्ट चुनौती और जन आंदोलन की तैयारी
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति जिस 2023 के कानून के तहत हुई, उसे भी सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी जाएगी। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इसे जन आंदोलन का रूप देना होगा। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के महासचिव एमए बेबी ने कहा कि राजनीतिक दलों के साथ-साथ सामाजिक आंदोलनों, सिविल सोसाइटी, बुद्धिजीवियों और गैर-सरकारी संगठनों से भी संपर्क साधा जाएगा।
मतदाता सूची और फॉर्म-6 विवाद
कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने अपने कार्यकाल में मतदान की उम्र 21 से घटाकर 18 वर्ष की थी, लेकिन अब फॉर्म-6 को इतना जटिल बना दिया गया है कि नए मतदाताओं के नाम सूची में जुड़ नहीं पा रहे। कांग्रेस नेता नाना पटोले ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग सरकार के साथ मिलकर लोकतंत्र को कमज़ोर कर रहा है।
आगे क्या होगा
विपक्ष की रणनीति तीन स्तरों पर है — सड़क पर जन आंदोलन, 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग मार्च और सर्वोच्च न्यायालय में कानूनी चुनौती। यह देखना होगा कि सरकार और चुनाव आयोग इस समन्वित दबाव पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं — और क्या न्यायालय 2023 के अधिनियम को पुनः जाँचने के लिए तैयार होता है।