CEC ज्ञानेश कुमार इस्तीफा मांग: विपक्ष ने राष्ट्रपति मुर्मु को सौंपा ज्ञापन, 12 अक्टूबर को CJI से मुलाकात
सारांश
मुख्य बातें
विपक्षी दलों के एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने 9 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उन्हें पद से हटाने की माँग को लेकर एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा। मुलाकात के बाद नेताओं ने बताया कि राष्ट्रपति ने उनकी बात ध्यान से सुनी और मामले से जुड़े सबूत प्रस्तुत करने को कहा। प्रतिनिधिमंडल ने घोषणा की है कि 12 अक्टूबर को वे इसी ज्ञापन के साथ सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से भी मिलेंगे।
राष्ट्रपति की प्रतिक्रिया
समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय ने बताया कि राष्ट्रपति ने विपक्ष के दावों को न तो गलत ठहराया और न ही खारिज किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने सबूत प्रस्तुत करने का आग्रह किया और यह आश्वासन दिया कि वे अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली उचित कार्रवाई करेंगी। राष्ट्रपति ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया जाना आवश्यक है।
फॉर्म-6 विवाद और CEC पर आरोप
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के महासचिव एमए बेबी ने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने राष्ट्रपति के समक्ष पूरा ज्ञापन पढ़कर सुनाया, जिसके बाद कई अहम पहलुओं पर विस्तृत चर्चा हुई। बेबी ने फॉर्म-6 में कथित गड़बड़ी का मुद्दा उठाया और कहा कि जब चुनाव आयोग के दो-तिहाई सदस्यों ने इस मामले में अनियमितता की बात कही, तब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने दावा किया कि संबंधित बदलाव सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी और सहमति से किए गए थे। बेबी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने इस दावे को सही नहीं माना।
विपक्ष की रणनीति
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के नेता डी. राजा ने कहा कि देशभर में इस मुद्दे को लेकर आम लोगों में गहरा आक्रोश है और यही कारण है कि विपक्ष ने राष्ट्रपति से संपर्क करने का निर्णय लिया। कांग्रेस नेता रागिनी नायक ने कहा कि राष्ट्रपति ने वोट चोरी के आरोपों को सीधे नकारा नहीं और यह बैठक इस संदर्भ में महत्वपूर्ण रही। उन्होंने यह भी बताया कि राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे को पहले उठाया था।
सत्याग्रह का अगला कदम
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि राहुल गांधी द्वारा शुरू किए गए सत्याग्रह के अंतर्गत राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपना आंदोलन की अगली कड़ी है। उन्होंने जोड़ा कि विपक्ष यह सुनिश्चित करना चाहता था कि बाद में कोई यह न कह सके कि राष्ट्रपति से संपर्क नहीं किया गया। कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने कहा कि राष्ट्रपति द्वारा माँगे गए सबूत जल्द सौंपे जाएँगे और 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भी ज्ञापन दिया जाएगा। यह मामला अब एक साथ संवैधानिक, न्यायिक और राजनीतिक — तीनों मोर्चों पर सक्रिय हो गया है।