सीईसी ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगने राष्ट्रपति मुर्मु से मिला विपक्ष, खड़गे बोले — मौलिक अधिकारों का सवाल
सारांश
मुख्य बातें
विपक्षी दलों के 10 सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल 9 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात करने पहुँचा, जिसका उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की माँग को औपचारिक रूप से राष्ट्रपति तक पहुँचाना था। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक अधिकारी का मसला नहीं, बल्कि देश के नागरिकों के मौलिक अधिकारों से सीधे जुड़ा संवैधानिक संकट है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के नेतृत्व में यह विरोध-प्रदर्शन पिछले कई दिनों से जारी है।
राष्ट्रपति से मुलाकात का घटनाक्रम
प्रतिनिधिमंडल के राष्ट्रपति भवन पहुँचने से पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा और कांग्रेस सांसद कल्याण वैजिनाथराव काले सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने मीडिया के सामने अपनी बात रखी। खड़गे ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल के सभी 10 सदस्य अपने हस्ताक्षर के साथ दरवाज़े पर उपस्थित रहेंगे, परंतु भीतर जाने की अनुमति उन्हीं 10 लोगों को मिलेगी — एक प्रक्रियागत व्यवस्था जिसे खड़गे ने असामान्य बताया।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है, विशेषकर हाल के राज्य विधानसभा चुनावों के परिणामों को लेकर।
नेताओं की प्रतिक्रियाएँ
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'इसे डर कहते हैं, इसे कायरता कहते हैं, इसे आतंक कहते हैं।' उनकी यह टिप्पणी प्रतिनिधिमंडल को अंदर जाने की प्रक्रिया और सरकार के रवैये पर केंद्रित थी।
कांग्रेस नेता अजय माकन ने कहा कि यह मसला केवल ज्ञानेश कुमार तक सीमित नहीं है, बल्कि 'पूरी चुनावी व्यवस्था में सुधार की ज़रूरत है।' उन्होंने ईवीएम हटाने और चुनावी प्रक्रिया में जनता का विश्वास बहाल करने की माँग भी की।
कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र, हरियाणा, पश्चिम बंगाल और बिहार में वोट चोरी के लिए ज्ञानेश कुमार सीधे ज़िम्मेदार हैं। उल्लेखनीय है कि ये आरोप अभी तक सत्यापित नहीं हुए हैं और चुनाव आयोग की ओर से इनका खंडन किया जाता रहा है।
महाराष्ट्र से शुरू हुआ संघर्ष
कांग्रेस सांसद कल्याण वैजिनाथराव काले के अनुसार, वोट चोरी का मुद्दा सबसे पहले महाराष्ट्र में उठा था। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर उठाया, जिसके बाद देशभर में इस विषय पर बहस छिड़ी और यह व्यापक विरोध की शक्ल ले चुका है।
कांग्रेस सांसद जी. कुमार नाइक ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने संसद के ऐतिहासिक सेंट्रल हॉल — जिसे अब 'संविधान सदन' कहा जाता है — में दो घंटे तक विचार-विमर्श किया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था ने अपनी विश्वसनीयता खो दी है और मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा 'पहला कदम' है, जबकि असली लक्ष्य लोकतंत्र की बहाली है।
आगे क्या होगा
विपक्ष ने संकेत दिया है कि यदि सरकार ने इस माँग पर ध्यान नहीं दिया तो विरोध-प्रदर्शन को सड़कों तक ले जाया जाएगा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा 'बस कुछ ही समय की बात है।' सरकार और चुनाव आयोग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में इस मसले पर संसदीय और न्यायिक मोर्चे पर भी हलचल की संभावना बनी हुई है।