8 अक्टूबर 2026
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ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें या विरोध जारी रहेगा — कांग्रेस का 'करो या मरो' का ऐलान

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ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें या विरोध जारी रहेगा — कांग्रेस का 'करो या मरो' का ऐलान

सारांश

विपक्ष ने 'करो या मरो' का ऐलान कर दिया है — मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा न मिलने तक इंडिया गठबंधन का आंदोलन जारी रहेगा। जंतर-मंतर पर 40,000 पुलिसकर्मियों की तैनाती और राहुल गांधी पर एफआईआर ने इस टकराव को नई तल्खी दे दी है।

मुख्य बातें

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 8 अक्टूबर 2026 को लगातार दूसरे दिन इंडिया गठबंधन नेताओं के साथ लंच बैठक आयोजित की।
विपक्ष ने माँग दोहराई — मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रहेगा।
इंडिया गठबंधन ने 2 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात का अनुरोध भेजा था; बैठक अभी लंबित है।
सीपीआई सांसद के अनुसार जंतर-मंतर पर करीब 200-240 सांसदों को रोकने के लिए 40,000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए।
राहुल गांधी और अन्य नेताओं के खिलाफ दर्ज एफआईआर को कांग्रेस ने 'गलत इरादे से दर्ज' बताते हुए कड़ी निंदा की।
समाजवादी पार्टी और सीपीआई सहित गठबंधन के सहयोगी दलों ने एकजुटता की पुष्टि की।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 8 अक्टूबर 2026 को लगातार दूसरे दिन नई दिल्ली के एक रेस्तरां में इंडिया गठबंधन के नेताओं के साथ लंच का आयोजन किया। इस अवसर पर पार्टी ने स्पष्ट किया कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पद से इस्तीफा नहीं देते, विपक्ष का विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। कांग्रेस ने इस लड़ाई को लोकतंत्र और मतदाता अधिकारों की रक्षा की 'करो या मरो' की लड़ाई बताया है।

मुख्य घटनाक्रम

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, 'हम लोकतंत्र की रक्षा के लिए यहां हैं। देश के मतदाताओं और आम लोगों की रक्षा के लिए यह हमारे लिए करो या मरो की लड़ाई है। हमारा सीधा मकसद मतदाताओं और आम लोगों की रक्षा करना है।' यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब इंडिया गठबंधन ने 2 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात का औपचारिक अनुरोध पहले ही भेज दिया था।

वेणुगोपाल ने बताया कि राष्ट्रपति भवन ने बाद में उन नेताओं के नाम मांगे जो बैठक में शामिल होंगे और इंडिया गठबंधन ने सभी शीर्ष नेताओं को इस सूची में शामिल किया है।

पुलिस कार्रवाई पर विपक्ष के आरोप

कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने आरोप लगाया कि चुने हुए जन-प्रतिनिधि होने के बावजूद विपक्षी नेताओं को चुनाव आयुक्तों से मिलने से रोका गया। उन्होंने कहा, 'कल हम जंतर-मंतर जाना चाहते थे, धरना देना चाहते थे, लेकिन वहाँ भी हमें बैठने नहीं दिया गया। पुलिस ने बेरहमी दिखाई।' हुड्डा ने यह भी आरोप लगाया कि सत्ताधारी पक्ष लोगों की आवाज़ दबाने की कोशिश कर रहा है।

सीपीआई सांसद पी. संतोष कुमार ने दावा किया कि करीब 200 से 240 सांसदों को रोकने के लिए 40,000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर, जो परंपरागत रूप से राष्ट्रीय राजधानी में विरोध प्रदर्शन की स्वीकृत जगह है, विपक्ष के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है।

राहुल गांधी पर एफआईआर और कांग्रेस की प्रतिक्रिया

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज एफआईआर — मारपीट और बदसलूकी के आरोपों में — पर वेणुगोपाल ने दिल्ली पुलिस पर विरोध कर रहे नेताओं के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग का आरोप लगाया। कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने तर्क दिया कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा कभी भी जानबूझकर सुरक्षाकर्मियों से दुर्व्यवहार नहीं कर सकते। उन्होंने कहा, 'जब कोई काम बचाव में किया जाता है, तो वह अपराध नहीं माना जाता।' तन्खा ने एफआईआर को गलत इरादे से दर्ज बताते हुए कड़ी निंदा की।

विपक्ष की माँग और आगे की रणनीति

कांग्रेस सांसद जेबी माथर ने स्पष्ट किया कि लंच बैठकों के बावजूद विरोध प्रदर्शन रुकने वाला नहीं है। उन्होंने कहा, 'जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, हम अपना विरोध जारी रखेंगे।' यह प्रदर्शन राहुल गांधी, खड़गे, प्रियंका गांधी वाड्रा, वेणुगोपाल और इंडिया गठबंधन के अन्य नेताओं के नेतृत्व में चलता रहेगा।

तन्खा ने कहा, 'सबसे बड़ी बात यह है कि ज्ञानेश कुमार को जाना होगा। जब तक चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और उस पर भरोसा बहाल नहीं होता, तब तक इसका कोई समाधान नहीं है।' समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव कुमार राय ने भी पुष्टि की कि उनकी पार्टी इस लड़ाई में इंडिया गठबंधन के साथ खड़ी है।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि इंडिया गठबंधन का राष्ट्रपति भवन से मिलने का अनुरोध अभी लंबित है और बैठक की तारीख तय नहीं हुई है। विपक्ष की यह एकजुटता आने वाले दिनों में चुनाव आयोग की स्वायत्तता और नियुक्ति प्रक्रिया पर बड़ी राजनीतिक बहस को जन्म दे सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

अगर सही है, तो यह असेंबली के अधिकार पर गंभीर सवाल खड़े करता है। दूसरी तरफ, राहुल गांधी पर एफआईआर विपक्ष को एक 'उत्पीड़न की कथा' देती है जो उसके एजेंडे को और धार देती है — यह संयोग हो या रणनीति, इसकी जाँच ज़रूरी है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर लंच-बैठकों और बयानबाजी पर टिक जाती है; असली सवाल यह है कि क्या यह आंदोलन चुनाव आयोग नियुक्ति प्रक्रिया में ठोस सुधार की माँग तक पहुँचेगा, या महज़ एक प्रतीकात्मक दबाव अभियान बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंडिया गठबंधन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा क्यों माँग रहा है?
इंडिया गठबंधन का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग की स्वायत्तता और निष्पक्षता संदिग्ध हो गई है। विपक्ष ने इस मसले को लोकतंत्र और मतदाता अधिकारों की रक्षा से जोड़ते हुए इसे 'करो या मरो' की लड़ाई बताया है।
8 अक्टूबर को खड़गे की लंच बैठक में क्या तय हुआ?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 8 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में इंडिया गठबंधन के वरिष्ठ नेताओं के साथ लंच बैठक की, जिसमें आगे की रणनीति तय की गई। बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
इंडिया गठबंधन ने राष्ट्रपति से मिलने का अनुरोध कब किया?
इंडिया गठबंधन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात का पहला अनुरोध 2 अक्टूबर 2026 को भेजा था। इसके बाद राष्ट्रपति भवन ने बैठक में शामिल होने वाले नेताओं के नाम माँगे, जो गठबंधन ने उपलब्ध करा दिए हैं; बैठक की तारीख अभी तय नहीं हुई है।
राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज एफआईआर किस बात को लेकर है?
दिल्ली पुलिस ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान मारपीट और बदसलूकी के आरोपों में एफआईआर दर्ज की है। कांग्रेस ने इसे गलत इरादे से दर्ज बताते हुए कड़ी निंदा की है और तर्क दिया है कि बचाव में की गई कोई भी कार्रवाई अपराध नहीं मानी जाती।
जंतर-मंतर पर कितने पुलिसकर्मी तैनात किए गए और क्यों?
सीपीआई सांसद पी. संतोष कुमार के अनुसार करीब 200 से 240 सांसदों को रोकने के लिए जंतर-मंतर पर 40,000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए। विपक्ष का आरोप है कि परंपरागत विरोध स्थल जंतर-मंतर को उनके लिए बंद कर दिया गया, जो असेंबली के मौलिक अधिकार का हनन है।
राष्ट्र प्रेस
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