CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, SIR वापस और बैलेट पेपर — खड़गे ने रखीं कांग्रेस की 3 अटल मांगें
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 5 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर चुनाव आयोग (ECI) से जुड़े विवाद पर पार्टी की तीन गैर-समझौता योग्य माँगें सार्वजनिक कीं। इन माँगों में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार का तत्काल इस्तीफा, स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) को रद्द करना और आगामी चुनाव बैलेट पेपर से कराना शामिल है।
तीन माँगें — बिना किसी समझौते के
खड़गे ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'कांग्रेस पार्टी की 3 माँगें ऐसी हैं, जिन पर कोई समझौता नहीं हो सकता। पहली, ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा; दूसरी, SIR को रद्द करना; और तीसरी, बैलेट पेपर से चुनाव कराना।' उन्होंने यह भी कहा कि 'पूरे देश में कांग्रेस कार्यकर्ता और इंडिया ब्लॉक के सहयोगी इन तीन मुद्दों को लेकर सड़कों पर हैं।'
यह ऐसे समय में आया है जब मतदाता सूची के SIR में कथित अनियमितताओं को लेकर इंडिया ब्लॉक के नेतृत्व में देश के कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। आलोचकों का कहना है कि इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम काटे जाने की आशंका है।
महिला पत्रकारों से बदसलूकी का मुद्दा उठाया
खड़गे ने शनिवार, 4 अक्टूबर को जंतर-मंतर, नई दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में ली गई तीन महिला पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, 'भाजपा ने दिल्ली में महिला पत्रकारों को परेशान किया है, जो बेहद निंदनीय है। तानाशाह बहुत घबराया हुआ है — ध्यान भटकाने वाली चालों के एक और अध्याय के लिए तैयार हो जाइए।'
तीनों महिला पत्रकारों ने दिल्ली पुलिस के कर्मचारियों पर यौन दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए शिकायतें दर्ज कराई हैं। पुलिस ने रविवार, 5 अक्टूबर को बताया कि इन शिकायतों को निष्पक्ष जाँच के लिए क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया है।
मुंबई में 'गर्जना मोर्चा' — ठाकरे बंधुओं की एकजुटता
राजधानी दिल्ली के साथ-साथ मुंबई में भी विपक्षी दलों ने एकजुटता दिखाई। राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गठबंधन ने चुनाव आयोग के खिलाफ 'गर्जना मोर्चा' का आयोजन किया। गौरतलब है कि दोनों ठाकरे गुट आमतौर पर अलग राजनीतिक राहों पर चलते हैं — इस मंच पर उनकी एकता को विपक्ष ने SIR-विरोधी आंदोलन की व्यापकता का प्रमाण बताया।
हालाँकि, भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिवसेना ने इस प्रदर्शन पर पलटवार करते हुए कहा कि यह 'दोहरे मापदंड और पब्लिसिटी स्टंट' से अधिक कुछ नहीं था।
SIR विवाद की पृष्ठभूमि
स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) मतदाता सूचियों को अद्यतन करने की एक प्रक्रिया है, जिसे चुनाव आयोग ने हाल ही में शुरू किया। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में मनमाने तरीके से नाम हटाए जा रहे हैं, जिससे वंचित तबकों और अल्पसंख्यक मतदाताओं पर असंगत प्रभाव पड़ सकता है। चुनाव आयोग ने अब तक इन आरोपों को सिरे से नकारा है।
आगे क्या होगा
इंडिया ब्लॉक ने संकेत दिया है कि यदि उनकी माँगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। CEC ज्ञानेश कुमार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। महिला पत्रकारों के मामले में क्राइम ब्रांच की जाँच के नतीजे आने वाले दिनों में इस विवाद की दिशा तय कर सकते हैं।