5 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, SIR वापस और बैलेट पेपर — खड़गे ने रखीं कांग्रेस की 3 अटल मांगें

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, SIR वापस और बैलेट पेपर — खड़गे ने रखीं कांग्रेस की 3 अटल मांगें

सारांश

कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने एक्स पर तीन अटल माँगें रखीं — CEC का इस्तीफा, SIR रद्द और बैलेट पेपर से चुनाव। इंडिया ब्लॉक सड़कों पर है, मुंबई में 'गर्जना मोर्चा' निकला और दिल्ली में महिला पत्रकारों से कथित दुर्व्यवहार का मामला क्राइम ब्रांच पहुँचा। चुनावी निष्पक्षता पर सियासी टकराव गहरा रहा है।

मुख्य बातें

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 5 अक्टूबर 2026 को एक्स पर पार्टी की तीन गैर-समझौता योग्य माँगें सार्वजनिक कीं।
माँगें: CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न) रद्द करना और बैलेट पेपर से चुनाव।
जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान हिरासत में ली गई 3 महिला पत्रकारों ने दिल्ली पुलिस पर यौन दुर्व्यवहार का आरोप लगाया; मामला क्राइम ब्रांच को सौंपा गया।
मुंबई में राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में 'गर्जना मोर्चा' आयोजित।
BJP और शिवसेना ने विरोध प्रदर्शन को 'दोहरे मापदंड और पब्लिसिटी स्टंट' करार दिया।

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 5 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर चुनाव आयोग (ECI) से जुड़े विवाद पर पार्टी की तीन गैर-समझौता योग्य माँगें सार्वजनिक कीं। इन माँगों में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार का तत्काल इस्तीफा, स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) को रद्द करना और आगामी चुनाव बैलेट पेपर से कराना शामिल है।

तीन माँगें — बिना किसी समझौते के

खड़गे ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'कांग्रेस पार्टी की 3 माँगें ऐसी हैं, जिन पर कोई समझौता नहीं हो सकता। पहली, ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा; दूसरी, SIR को रद्द करना; और तीसरी, बैलेट पेपर से चुनाव कराना।' उन्होंने यह भी कहा कि 'पूरे देश में कांग्रेस कार्यकर्ता और इंडिया ब्लॉक के सहयोगी इन तीन मुद्दों को लेकर सड़कों पर हैं।'

यह ऐसे समय में आया है जब मतदाता सूची के SIR में कथित अनियमितताओं को लेकर इंडिया ब्लॉक के नेतृत्व में देश के कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। आलोचकों का कहना है कि इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम काटे जाने की आशंका है।

महिला पत्रकारों से बदसलूकी का मुद्दा उठाया

खड़गे ने शनिवार, 4 अक्टूबर को जंतर-मंतर, नई दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में ली गई तीन महिला पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, 'भाजपा ने दिल्ली में महिला पत्रकारों को परेशान किया है, जो बेहद निंदनीय है। तानाशाह बहुत घबराया हुआ है — ध्यान भटकाने वाली चालों के एक और अध्याय के लिए तैयार हो जाइए।'

तीनों महिला पत्रकारों ने दिल्ली पुलिस के कर्मचारियों पर यौन दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए शिकायतें दर्ज कराई हैं। पुलिस ने रविवार, 5 अक्टूबर को बताया कि इन शिकायतों को निष्पक्ष जाँच के लिए क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया है।

मुंबई में 'गर्जना मोर्चा' — ठाकरे बंधुओं की एकजुटता

राजधानी दिल्ली के साथ-साथ मुंबई में भी विपक्षी दलों ने एकजुटता दिखाई। राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गठबंधन ने चुनाव आयोग के खिलाफ 'गर्जना मोर्चा' का आयोजन किया। गौरतलब है कि दोनों ठाकरे गुट आमतौर पर अलग राजनीतिक राहों पर चलते हैं — इस मंच पर उनकी एकता को विपक्ष ने SIR-विरोधी आंदोलन की व्यापकता का प्रमाण बताया।

हालाँकि, भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिवसेना ने इस प्रदर्शन पर पलटवार करते हुए कहा कि यह 'दोहरे मापदंड और पब्लिसिटी स्टंट' से अधिक कुछ नहीं था।

SIR विवाद की पृष्ठभूमि

स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) मतदाता सूचियों को अद्यतन करने की एक प्रक्रिया है, जिसे चुनाव आयोग ने हाल ही में शुरू किया। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में मनमाने तरीके से नाम हटाए जा रहे हैं, जिससे वंचित तबकों और अल्पसंख्यक मतदाताओं पर असंगत प्रभाव पड़ सकता है। चुनाव आयोग ने अब तक इन आरोपों को सिरे से नकारा है।

आगे क्या होगा

इंडिया ब्लॉक ने संकेत दिया है कि यदि उनकी माँगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। CEC ज्ञानेश कुमार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। महिला पत्रकारों के मामले में क्राइम ब्रांच की जाँच के नतीजे आने वाले दिनों में इस विवाद की दिशा तय कर सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इनमें से प्रत्येक की अपनी अलग जमीन है — CEC का इस्तीफा संवैधानिक प्रक्रिया से टकराता है, SIR-विरोध में जायज़ मतदाता-संरक्षण की चिंता है, जबकि बैलेट पेपर की माँग एक ऐसे मुद्दे को हवा देती है जिस पर तकनीकी विशेषज्ञों में आम सहमति EVM के पक्ष में रही है। मुख्यधारा की कवरेज इन तीनों को एकसाथ लपेटती है, जबकि असली बहस SIR की पारदर्शिता पर केंद्रित होनी चाहिए। महिला पत्रकारों का मामला अलग और गंभीर है — उसे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के शोर में दबने से बचाना ज़रूरी है।
RashtraPress
5 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कांग्रेस की SIR को लेकर क्या आपत्ति है?
कांग्रेस और इंडिया ब्लॉक का आरोप है कि चुनाव आयोग की 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) प्रक्रिया में मनमाने तरीके से मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं, जिससे वंचित तबकों पर असंगत असर पड़ सकता है। पार्टी ने इसे रद्द करने की माँग को अपनी तीन गैर-समझौता माँगों में शामिल किया है।
CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग क्यों की जा रही है?
विपक्ष का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में SIR प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियाँ हुई हैं और चुनावी निष्पक्षता पर सवाल उठे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने 5 अक्टूबर 2026 को उनके इस्तीफे को पार्टी की पहली अटल माँग बताया।
जंतर-मंतर पर महिला पत्रकारों के साथ क्या हुआ?
4 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में ली गई तीन महिला पत्रकारों ने दिल्ली पुलिस कर्मचारियों पर यौन दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए शिकायतें दर्ज कराई हैं। पुलिस ने बताया कि मामले को निष्पक्ष जाँच के लिए क्राइम ब्रांच को सौंपा गया है।
मुंबई में 'गर्जना मोर्चा' क्या था?
'गर्जना मोर्चा' मुंबई में चुनाव आयोग के खिलाफ आयोजित एक विपक्षी रैली थी, जिसमें राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के गुट साझा मंच पर आए। यह विरोध SIR और EVM के मुद्दे पर इंडिया ब्लॉक के राष्ट्रव्यापी आंदोलन का हिस्सा था।
BJP ने विपक्ष के इस प्रदर्शन पर क्या कहा?
भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिवसेना ने विपक्ष के प्रदर्शन को 'दोहरे मापदंड और पब्लिसिटी स्टंट' करार दिया। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन चुनावी पारदर्शिता की वास्तविक चिंता नहीं, बल्कि राजनीतिक ध्यान खींचने की कोशिश है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 दिन पहले
  2. 5 दिन पहले
  3. 5 दिन पहले
  4. 1 सप्ताह पहले
  5. 1 सप्ताह पहले
  6. 1 सप्ताह पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले