डीएमके सांसदों ने CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने, SIR रद्द करने और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की माँग की
सारांश
मुख्य बातें
द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के सांसदों ने शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को रद्द करने और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की जगह बैलेट पेपर से मतदान कराने की माँग की। यह माँगें चेन्नई स्थित पार्टी मुख्यालय अन्ना अरिवालयम में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में पारित चार प्रस्तावों के ज़रिए सामने आईं।
बैठक का विवरण और प्रस्ताव
DMK अध्यक्ष एवं तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की अध्यक्षता में यह बैठक सुबह 11 बजे मुरासोली मारन बैठक हॉल में आयोजित की गई। बैठक में पार्टी के सांसदों ने चुनावी प्रशासन को लेकर अपनी गहरी असहमति दर्ज कराई। पार्टी की ओर से जारी बयान के अनुसार कुल चार प्रस्ताव पास किए गए।
पहले प्रस्ताव में CEC ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की माँग की गई। हालाँकि, पार्टी की ओर से जारी संक्षिप्त विवरण में उन्हें हटाने के लिए कोई विशिष्ट आधार या कथित अनियमितताओं के ठोस उदाहरण सार्वजनिक नहीं किए गए।
SIR और EVM पर विरोध
चौथे प्रस्ताव में पार्टी ने SIR को पूरी तरह रद्द करने और EVM की जगह बैलेट पेपर से मतदान कराने की माँग दोहराई। गौरतलब है कि EVM और SIR को लेकर विपक्षी दलों की आपत्तियाँ नई नहीं हैं — यह ऐसे समय में आई हैं जब कई राज्यों में आगामी चुनावों की तैयारियाँ चल रही हैं। DMK का कहना है कि SIR प्रक्रिया से मतदाता सूचियों में अनियमितताएँ हो सकती हैं, हालाँकि पार्टी ने इस संदर्भ में विशिष्ट मामलों का उल्लेख नहीं किया।
राष्ट्रपति को याचिका और छात्र आंदोलन को समर्थन
बैठक में यह भी तय किया गया कि पार्टी राष्ट्रपति को एक ज्ञापन सौंपेगी, जिसमें चुनावी अनियमितताओं को दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाने की माँग की जाएगी। ज्ञापन का विस्तृत मसौदा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
दूसरे प्रस्ताव में छात्र संगठनों के विरोध प्रदर्शनों को समर्थन देने का फ़ैसला लिया गया। हालाँकि, पार्टी ने इन छात्र संगठनों के नाम, उनकी विशिष्ट माँगें या प्रदर्शन स्थलों का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया।
कांग्रेस और TVK पर निशाना
तीसरे प्रस्ताव में DMK ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) दोनों पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। हालाँकि, पार्टी ने इस आलोचना के पीछे के बयानों या घटनाओं का विस्तृत विवरण नहीं दिया, जिससे यह स्पष्ट नहीं हो सका कि किन विशेष मुद्दों पर यह टकराव है।
आगे क्या होगा
DMK संसदीय दल अब राष्ट्रपति को याचिका सौंपने की प्रक्रिया में आगे बढ़ेगा। इन प्रस्तावों के ज़रिए पार्टी ने चुनाव आयोग के प्रति अपना कड़ा रुख स्पष्ट किया है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र सरकार और चुनाव आयोग इन माँगों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।