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पश्चिम बंगाल SIR विवाद: नौशाद सिद्दीकी का मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग

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पश्चिम बंगाल SIR विवाद: नौशाद सिद्दीकी का मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग

सारांश

ISF चेयरमैन नौशाद सिद्दीकी का बड़ा आरोप — पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया ने हजारों वैध मतदाताओं को बाहर किया, जिनके लिए ISF ने गाँव-गाँव फॉर्म भरवाए थे। अब वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और न्यायिक जाँच माँग रहे हैं।

मुख्य बातें

ISF चेयरमैन नौशाद सिद्दीकी ने 23 सितंबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR की न्यायिक जाँच की माँग की।
ISF ने 2002 की मतदाता सूची में नाम होने पर छूट के निर्देशों के आधार पर गाँव-गाँव SIR फॉर्म भरवाए, लेकिन बाद में इन्हीं मतदाताओं के नाम कथित रूप से हटाए गए।
सिद्दीकी के अनुसार जिन क्षेत्रों में मुकाबला कुछ सौ से कुछ हजार वोटों के अंतर पर था, वहाँ प्रभावित मतदाताओं की संख्या निर्णायक थी — हालाँकि ये दावे ISF के अपने हैं।
BJP उम्मीदवार हासी रानी रावत (नंदी विक्रम) की शैक्षणिक योग्यता और जन्म से जुड़ा मामला अदालत में विचाराधीन है।
ISF के चुनाव चिह्न को बदलकर अन्य को देने का आरोप; पार्टी ने चुनाव आयोग से जवाब न मिलने पर अदालत का दरवाजा खटखटाया।

इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के चेयरमैन नौशाद सिद्दीकी ने 23 सितंबर 2026 को कोलकाता में पश्चिम बंगाल में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग (ECI) पर गंभीर सवाल उठाए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे तथा पूरे मामले की न्यायिक जाँच की माँग की। सिद्दीकी के अनुसार, SIR की कथित विसंगतियों के चलते हजारों वैध मतदाता मतदान प्रक्रिया से बाहर हो गए, जिससे उन क्षेत्रों में चुनावी परिणाम प्रभावित हुए जहाँ मुकाबला कुछ सौ से कुछ हजार मतों के अंतर पर था।

SIR प्रक्रिया में क्या थे निर्देश

सिद्दीकी ने बताया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के शुरुआती बयानों के अनुसार, जिन मतदाताओं का नाम 2002 की मतदाता सूची में दर्ज है, उन्हें SIR के दौरान अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं होगी। यह छूट उन मतदाताओं को भी दी गई थी, जिनके माता, पिता, दादा या दादी का नाम उक्त सूची में मौजूद हो। इन्हीं निर्देशों के आधार पर ISF ने गाँव-गाँव जाकर लोगों से SIR फॉर्म भरवाने का व्यापक अभियान चलाया।

मुख्य आरोप: हजारों मतदाता प्रक्रिया से बाहर

सिद्दीकी ने दावा किया कि इन स्पष्ट निर्देशों के बावजूद बाद में बड़ी संख्या में ऐसे मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए, जिनके या उनके निकट परिजनों के नाम 2002 की सूची में दर्ज थे। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन विधानसभा क्षेत्रों में चुनावी मुकाबला कुछ सौ से लेकर कुछ हजार वोटों के अंतर से हुआ, वहाँ प्रभावित मतदाताओं की संख्या निर्णायक रूप से अधिक रही। हालाँकि, ये आँकड़े और आरोप ISF के अपने दावों पर आधारित हैं और स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं।

चुनाव आयोग पर शिकायतें अनसुनी रहने का आरोप

ISF चेयरमैन ने कहा कि इस मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग के समक्ष लगातार शिकायतें दर्ज कराई गईं, परंतु अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। सिद्दीकी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और पूरे एसआईआर विवाद की न्यायिक जाँच की माँग दोहराई। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में विपक्षी दलों की ओर से मतदाता सूची की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं।

BJP उम्मीदवार की योग्यता और ISF चुनाव चिह्न विवाद

सिद्दीकी ने नंदी विक्रम क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (BJP) उम्मीदवार हासी रानी रावत की शैक्षणिक योग्यता और जन्म संबंधी दावों को लेकर चल रही चर्चा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह मामला अदालत में विचाराधीन है और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो नामांकन रद्द होने का सवाल उठ सकता है। इसके अतिरिक्त, सिद्दीकी ने आरोप लगाया कि ISF को पहले आवंटित चुनाव चिह्न बाद में बदलकर किसी अन्य उम्मीदवार या पार्टी को दे दिया गया। उन्होंने बताया कि इस संबंध में चुनाव आयोग को पत्र भेजा गया, किंतु कोई जवाब न मिलने पर पार्टी ने संबंधित दस्तावेजों के साथ अदालत का रुख किया है।

आगे क्या होगा

ISF द्वारा दायर मामले अदालत में विचाराधीन हैं और न्यायिक प्रक्रिया के पूरा होने तक अंतिम निर्णय स्पष्ट नहीं होगा। चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं हुई है। पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया को लेकर यह विवाद आगामी चुनावी चक्र में मतदाता सूची की पारदर्शिता के बड़े सवाल को केंद्र में ले आया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन वे अभी तक ISF के अपने दावों पर टिके हैं — स्वतंत्र सत्यापन और चुनाव आयोग का पक्ष सार्वजनिक नहीं हुआ है। SIR प्रक्रिया को लेकर पश्चिम बंगाल में यह पहला विरोध नहीं है; विपक्षी दलों ने इसे पहले भी अल्पसंख्यक और गरीब मतदाताओं के खिलाफ हथियार बताया है। असली सवाल यह है कि क्या चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया में दस्तावेजी छूट के निर्देश और ज़मीनी क्रियान्वयन के बीच वास्तव में कोई खाई थी — और यदि थी, तो उसकी जवाबदेही किसकी बनती है। न्यायिक प्रक्रिया से ही यह स्पष्ट होगा कि ये आरोप राजनीतिक बयानबाजी हैं या व्यवस्थागत खामी।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ISF चेयरमैन नौशाद सिद्दीकी ने ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा क्यों माँगा?
सिद्दीकी का आरोप है कि पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया के दौरान हजारों वैध मतदाताओं के नाम कट गए, जबकि चुनाव आयोग ने शुरू में 2002 की सूची में नाम होने पर छूट का वादा किया था। उनकी शिकायतों पर कार्रवाई न होने के कारण उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और न्यायिक जाँच की माँग की।
पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) क्या है?
SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण, चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची को अद्यतन और सत्यापित करने की एक प्रक्रिया है। इसमें मतदाताओं से दस्तावेज़ और फॉर्म माँगे जाते हैं, और 2002 की मतदाता सूची में नाम होने पर कुछ मतदाताओं को अतिरिक्त कागजात से छूट दिए जाने का प्रावधान बताया गया था।
ISF के चुनाव चिह्न विवाद का मामला क्या है?
नौशाद सिद्दीकी के अनुसार ISF को पहले जो चुनाव चिह्न आवंटित किया गया था, उसे बाद में बदलकर किसी अन्य उम्मीदवार या पार्टी को दे दिया गया। चुनाव आयोग को शिकायती पत्र भेजने के बाद भी जवाब न मिलने पर ISF ने अदालत में याचिका दायर की है।
नंदी विक्रम से BJP उम्मीदवार हासी रानी रावत के खिलाफ क्या मामला है?
सिद्दीकी के अनुसार BJP उम्मीदवार हासी रानी रावत की शैक्षणिक योग्यता और जन्म संबंधी दावों को लेकर अदालत में मामला विचाराधीन है। उन्होंने कहा कि यदि नामांकन नियमों का उल्लंघन सिद्ध होता है तो नामांकन रद्द होने का प्रश्न उठ सकता है, लेकिन अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही आएगा।
क्या चुनाव आयोग ने ISF के आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
अभी तक चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर कोई सार्वजनिक आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। सिद्दीकी का कहना है कि उनकी शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद पार्टी ने अदालत का रुख किया।
राष्ट्र प्रेस
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