कल्पना पटवारी की 'छठ गीतमाला': बिहार की 5 भाषाओं में 7 गीत, असम से उठी आवाज़
सारांश
मुख्य बातें
लोक गायिका कल्पना पटवारी छठ महापर्व के अवसर पर बिहार की पाँच भाषाओं में सात छठ गीतों की एक विशेष 'छठ गीतमाला' प्रस्तुत करने जा रही हैं। असम से ताल्लुक रखने वाली इस लोक गायिका का बिहार की मिट्टी, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से गहरा जुड़ाव है। यह गीतमाला जल्द ही म्यूजिक बॉक्स के यूट्यूब चैनल पर रिलीज़ होगी।
गीतमाला में क्या है खास
इस विशेष प्रस्तुति में मैथिली, भोजपुरी, मगही, अंगिका और बज्जिका — बिहार की पाँच प्रमुख भाषाओं के पारंपरिक छठ गीत शामिल किए गए हैं। एक ही गायिका द्वारा पाँच अलग अलग भाषाओं में सात गीत एक साथ प्रस्तुत करना अपने आप में एक दुर्लभ और उल्लेखनीय प्रयास है।
गीतमाला में शामिल गीत इस प्रकार हैं — मैथिली के 'चारि पहर राति जल थल सेविलहुं' और 'कातिक मास इजोरिया', भोजपुरी के 'जगत के पालक दीनानाथ' और 'दरसन मांगीला तोहार हे गंगा मैया', मगही के 'छोटी मुटी मालिन बेटी के भुइयां लोटे केस', अंगिका के 'छठि मइया अइतई अंगनमा सजन हम करबई बरतिया' तथा बज्जिका के 'रिमझिम बुन्दवा बरसि गेल ओरियानी मोती चूए'।
गीतों का स्रोत और सांस्कृतिक महत्त्व
इन सभी गीतों को हृदय नारायण झा की पुस्तक 'छठ गीत (सर्वसौभाग्यदायकम्)' से लिया गया है। उल्लेखनीय है कि इस पुस्तक को इन्टैक (इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज) द्वारा तैयार उस दस्तावेज़ में भी स्थान मिला है, जो छठ महापर्व को यूनेस्को की विशेष सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल कराने के लिए तैयार किया गया था। इस पुस्तक में छठ पर्व से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के साथ बिहार की विभिन्न भाषाओं के पुराने और नए छठ गीत संकलित हैं।
कल्पना पटवारी की भावना और प्रेरणा
कल्पना पटवारी ने कहा, "मैं असम की रहने वाली हूँ, लेकिन मुझे बिहार की संस्कृति और यहाँ की पुरानी परंपराओं से बहुत लगाव है। बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग से राष्ट्रीय कला पुरस्कार मिलने के बाद भी मैं बिहार की संस्कृति के लिए काम करना चाहती थी। इसी सोच के साथ मैं इस बार छठ पर बिहार की पाँच अलग अलग भाषाओं में गीत गा रही हूँ। मेरे लिए बतौर गायिका पाँच भाषाओं में सात छठ गीत गाना अपने आप में खास बात है।"
उन्होंने आगे जोड़ा, "बिहार सिर्फ़ एक राज्य नहीं है, बल्कि इसकी अपनी अलग पहचान और संस्कृति है। यहाँ की परंपराएँ, रीति रिवाज और लोक गीत सदियों पुराने हैं।" उन्होंने एक बड़े सांस्कृतिक आयोजन की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया, जहाँ बिहार की लोककला, लोकगीत और संगीत को विशेष स्थान मिले।
बिहार की लोक विरासत को आगे बढ़ाने की माँग
कल्पना पटवारी के अनुसार, लोकगीतों में गौरी, अछरिया और गणपति पूजा के गीतों का भी अपना महत्त्व है। ऐसे गीत हमारी संस्कृति और पुरानी परंपराओं को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाते हैं। उनकी यह प्रस्तुति न केवल बिहार, बल्कि पूर्वी भारत की सांस्कृतिक विविधता को एक सूत्र में पिरोने का प्रयास है। आने वाले दिनों में यह गीतमाला यूट्यूब पर रिलीज़ होने के बाद व्यापक दर्शकों तक पहुँचने की उम्मीद है।