पंकज धीर पहले 'महाभारत' में अर्जुन बनने वाले थे, 4 महीने बाद कर्ण का किरदार बना पहचान
सारांश
मुख्य बातें
बॉलीवुड और टेलीविजन के वरिष्ठ अभिनेता पंकज धीर का नाम आते ही बीआर चोपड़ा की महाकाव्य धारावाहिक 'महाभारत' में उनके द्वारा निभाए गए दानवीर कर्ण का चेहरा आँखों के सामने उभर आता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि 1988 में प्रसारित इस ऐतिहासिक धारावाहिक में उन्हें पहले अर्जुन के किरदार के लिए चुना गया था, और करीब 4 महीने बाद अचानक भूमिका बदलकर उन्हें कर्ण सौंपा गया — एक फैसला जिसने उनकी पूरी ज़िंदगी की दिशा बदल दी।
पर्दे के पीछे से शुरू हुआ सफर
9 नवंबर 1956 को पंजाब में जन्मे पंकज धीर के घर में कला और सिनेमा की परंपरा पहले से थी — उनके पिता सीएल धीर जाने-माने फिल्मनिर्माता थे। कुछ लेखों के अनुसार शुरुआत में पंकज का सपना पर्दे के पीछे रहकर फिल्म निर्देशक बनने का था, लेकिन किस्मत उन्हें अभिनय की राह पर ले आई। 1980 के दशक में उन्होंने छोटे पर्दे और बड़े पर्दे दोनों पर छोटी भूमिकाएँ निभाते हुए अपनी पहचान बनानी शुरू की।
वे बीआर चोपड़ा के स्टूडियो में काम करते थे। उन्हीं दिनों 'महाभारत' धारावाहिक के लिए ऑडिशन की प्रक्रिया शुरू हुई। स्टूडियो के इंचार्ज मदन चोपड़ा ने पंकज को ऑडिशन में हिस्सा लेने की सलाह दी। पंकज ने खुद स्वीकार किया है कि उन्हें उम्मीद बहुत कम थी, क्योंकि देशभर से लाखों लोगों की अर्जियाँ आ चुकी थीं।
अर्जुन से कर्ण तक का अनोखा सफर
जब पंकज ऑडिशन देने पहुँचे तो वहाँ हजारों प्रतिभागी मौजूद थे। बावजूद इसके, कुछ ही महीनों में उनकी कद-काठी और चेहरे की बनावट के आधार पर उन्हें अर्जुन के किरदार के लिए चुन लिया गया। करीब 3-4 महीने तक वे अपने परिचितों और साथियों के बीच 'अर्जुन' के रूप में ही जाने जाते रहे।
फिर अचानक उन्हें दफ्तर में बुलाया गया और बताया गया कि उन्हें अब कर्ण का किरदार निभाना होगा। पंकज धीर ने शुरुआत में इनकार किया — उनकी असली वजह थी कि कर्ण के किरदार के लिए उन्हें अपनी मूँछें हटानी पड़तीं, और उन्हें डर था कि बिना मूँछों के वे अच्छे नहीं दिखेंगे। लेकिन परिजनों और सहयोगियों के समझाने पर उन्होंने 'हाँ' कह दी — और यही वह क्षण था जिसने उनके करियर की धारा मोड़ दी।
शूटिंग के दौरान आँख के पास तीर लगा, बड़ा हादसा टला
पंकज धीर ने खुद एक साक्षात्कार में बताया था कि 'महाभारत' की शूटिंग के दौरान एक बार वे बड़े हादसे से बाल-बाल बचे थे। कर्ण और अर्जुन के बीच युद्ध के दृश्य की शूटिंग के दौरान एक तीर उनके धनुष को छूकर टूटना था, लेकिन किसी तकनीकी खराबी के कारण वह तीर उनकी आँख के कोने में जा लगा। तीर बाहर निकालने पर आँख के पास से काफी खून बह गया। यह घटना उन्होंने खुद अपनी ज़बान से साझा की है।
लोकप्रियता में राजीव गांधी और अमिताभ बच्चन के बाद तीसरे स्थान पर
एक इंटरव्यू में पंकज धीर ने स्वयं कहा था कि कर्ण के रोल ने उनकी ज़िंदगी बदल दी। उस दौर के एक लोकप्रियता सर्वेक्षण में वे तीसरे स्थान पर रहे — पहले और दूसरे स्थान पर क्रमशः राजीव गांधी और अमिताभ बच्चन थे। यह इस बात का प्रमाण था कि दर्शकों ने कर्ण के किरदार में उन्हें किस हद तक अपना लिया था।
'महाभारत' के बाद 1994 से 1996 के बीच पंकज धीर ने टीवी सीरीज 'चंद्रकांता' में राजा शिवदत्त का यादगार किरदार निभाया, जो लेखक देवकी नंदन खत्री के 1888 के उपन्यास पर आधारित थी। बड़े पर्दे पर उनकी उल्लेखनीय फिल्मों में बॉबी देओल की 'सोल्जर', शाहरुख खान की 'बादशाह', अक्षय कुमार की 'अंदाज', और अजय देवगन की 'जमीन' तथा 'टार्जन' शामिल हैं।
एक किरदार, एक अमर पहचान
पंकज धीर का 1981 से मनोरंजन जगत में सक्रिय रहा करियर टेलीविजन, फिल्म और निर्देशन के क्षेत्र में फैला हुआ है। लेकिन भारतीय दर्शकों की सामूहिक स्मृति में वे सदा के लिए दानवीर कर्ण के रूप में बसे हुए हैं — एक ऐसा किरदार जो उन्हें लगभग मिला ही नहीं था। उनकी यह यात्रा यह भी बताती है कि कभी-कभी वह भूमिका जो हम नहीं चाहते, वही हमें अमर बना देती है।