कानपुर में छत गिरने से 21 दिन के नवजात समेत एक परिवार के तीन लोगों की मौत
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के कानपुर में पनकी थाना क्षेत्र के पनकी पड़ाव इलाके में रविवार, 8 नवंबर 2026 की सुबह एक मकान की छत अचानक ढह गई, जिसमें एक ही परिवार के तीन लोगों की जान चली गई। मृतकों में 21 दिन का एक नवजात शिशु, उसकी माँ और उसकी नानी शामिल हैं। पश्चिमी क्षेत्र के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) कासिम आबिदी ने इस दर्दनाक हादसे की पुष्टि की।
घटनाक्रम: कैसे हुआ हादसा
सुबह लगभग 8 बजे पनकी पड़ाव स्थित मकान की छत भरभराकर गिर पड़ी। मलबे में तीन लोग दब गए। सूचना मिलते ही पुलिस और राहत-बचाव दल तुरंत मौके पर पहुँचे। रेस्क्यू टीमों ने मलबा हटाकर तीनों को बाहर निकाला और तत्काल अस्पताल पहुँचाया, जहाँ चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
डीसीपी कासिम आबिदी ने पत्रकारों को बताया, 'रविवार सुबह 8 बजे पनकी थाना क्षेत्र के पनकी पड़ाव इलाके में एक मकान की छत गिर गई, जिसमें तीन लोगों की दुखद मौत हो गई। मृतकों में एक महिला, उसका 21 दिन का बेटा और उसकी सास शामिल हैं।'
गाजियाबाद में एक दिन पहले भी हुई थी ऐसी घटना
कानपुर हादसे से ठीक एक दिन पहले, शनिवार, 7 नवंबर को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के मोदीनगर थाना क्षेत्र में एक निर्माणाधीन मकान का छत का स्लैब गिर गया। इस हादसे में एक मजदूर की मौत हो गई जबकि पाँच अन्य घायल हुए, जिन्हें सुरक्षित निकालकर अस्पताल में भर्ती कराया गया। फायर सर्विस, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की टीमों ने बचाव अभियान चलाया।
दिल्ली के चावड़ी बाजार हादसे की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि यह घटनाएँ दिल्ली के चावड़ी बाजार इलाके में हुए एक बड़े भवन हादसे के ठीक बाद सामने आई हैं। उस हादसे में सात लोगों की मौत हो गई थी, जब गुरुवार को गली सितारा में चावड़ी बाजार मेट्रो स्टेशन के पास एक निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत अचानक ढह गई थी। अधिकारियों के मुताबिक इमारत गिरने की सूचना सुबह 9:50 बजे मिली थी, जिसके बाद दिल्ली पुलिस, एनडीआरएफ, दिल्ली फायर सर्विस और दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की टीमों ने संयुक्त बचाव अभियान चलाया था।
आम जनता पर असर और सुरक्षा का सवाल
कानपुर, गाजियाबाद और दिल्ली में एक के बाद एक हुई इन घटनाओं ने पुरानी व जर्जर इमारतों की सुरक्षा और भवन निर्माण मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 21 दिन के नवजात की मौत ने इस त्रासदी को और अधिक मार्मिक बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने आवासीय क्षेत्रों में नियमित संरचनात्मक जाँच और समय पर मरम्मत की सख्त जरूरत है।
क्या होगा आगे
पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है। प्रशासन से उम्मीद की जा रही है कि पनकी और आसपास के इलाकों में जर्जर मकानों का सर्वे किया जाएगा। इस तरह की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्थानीय अधिकारियों पर जवाबदेही तय करने की माँग भी उठ रही है।