दिल्ली के जय प्रकाश नगर में छत गिरने से दंपति की मौत, मलबे में दबा बच्चा सुरक्षित बचा
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर-पूर्वी दिल्ली के जय प्रकाश नगर स्थित एच ब्लॉक में रविवार रात करीब 9:30 बजे एक जर्जर मकान के ग्राउंड फ्लोर की छत अचानक ढह गई, जिससे उसमें सो रहे एक दंपति की मौत हो गई। हादसे के वक्त कमरे में मौजूद उनका छोटा बच्चा चमत्कारिक रूप से सुरक्षित बच गया। यह घटना न्यू उस्मानपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आती है।
हादसे का घटनाक्रम
अधिकारियों के अनुसार, छत रात करीब 9:30 बजे गिरी, लेकिन दिल्ली फायर सर्विसेज को इसकी सूचना रात 11:30 बजे मिली — यानी हादसे के करीब दो घंटे बाद। सूचना मिलते ही बचाव दल मौके पर पहुँचा और मलबे से दंपति को बाहर निकाला। उन्हें नज़दीकी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। बचाव अभियान में दिल्ली फायर सर्विस के 4 दमकल वाहन, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और अन्य आपातकालीन एजेंसियाँ तैनात की गईं।
स्थानीय लोगों की भूमिका और गवाही
मलबे के नीचे से आवाज़ें सुनकर स्थानीय निवासी भी तत्काल राहत कार्य में जुट गए और अपने हाथों से ईंटें, कंक्रीट के स्लैब और मुड़ी हुई लोहे की छड़ें हटाने लगे। पड़ोसी सोनू ने बताया, 'इस घर की हालत बहुत खराब थी। इमारत खतरनाक हालत में थी। गली में आगे जाकर देखा जा सकता है कि कुछ और घरों की छतें भी गिर गई हैं। मैंने उन्हें पहले ही कमरा खाली करने की सलाह दी थी।' स्थानीय लोगों का आरोप है कि इमारत में कुछ समय से संरचनात्मक कमज़ोरी के संकेत दिख रहे थे, लेकिन समय रहते कोई कार्रवाई नहीं हुई।
जाँच और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
पुलिस और नागरिक अधिकारियों ने छत गिरने का सटीक कारण जानने के लिए जाँच शुरू कर दी है। प्रारंभिक संकेत इमारत की जर्जर स्थिति और रखरखाव की कमी की ओर इशारा करते हैं, हालाँकि आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
दिल्ली में बढ़ती इमारत-हादसों की चिंता
यह हादसा ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में पुरानी और जर्जर इमारतों की सुरक्षा को लेकर चिंताएँ गहरी होती जा रही हैं। गौरतलब है कि बीते महीने रोहिणी सेक्टर 16 में भारी बारिश के बाद एक निर्माणाधीन इमारत ढहने से कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई थी और एक व्यक्ति घायल हुआ था। विशेषज्ञों का कहना है कि राजधानी के घनी आबादी वाले इलाकों में दशकों पुरानी इमारतें बिना किसी नियमित संरचनात्मक जाँच के खड़ी हैं, जो एक गंभीर सार्वजनिक सुरक्षा खतरा बन चुकी हैं।
आगे क्या
जाँच एजेंसियाँ इमारत की संरचनात्मक स्थिति और ज़िम्मेदारी तय करने में जुटी हैं। इस हादसे के बाद उम्मीद की जा रही है कि नागरिक निकाय क्षेत्र की अन्य जर्जर इमारतों का सर्वेक्षण करेंगे।