18 सितंबर 2026
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मदनलाल ढींगरा जयंती: रेखा गुप्ता, धामी, भजनलाल सहित कई मुख्यमंत्रियों ने अमर शहीद को दी श्रद्धांजलि

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मदनलाल ढींगरा जयंती: रेखा गुप्ता, धामी, भजनलाल सहित कई मुख्यमंत्रियों ने अमर शहीद को दी श्रद्धांजलि

सारांश

18 सितंबर को अमृतसर में जन्मे क्रांतिकारी मदनलाल ढींगरा की जयंती पर दिल्ली से उत्तराखंड और बिहार तक के मुख्यमंत्रियों ने एक्स पर श्रद्धांजलि दी — उस शहीद को, जिसने 1909 में लंदन में ब्रिटिश अधिकारी को गोली मारकर 25 साल की उम्र में फाँसी का वरण किया।

मुख्य बातें

18 सितंबर 2026 को क्रांतिकारी मदनलाल ढींगरा की जयंती पर देशभर के नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता , राजस्थान के भजनलाल शर्मा , उत्तराखंड के पुष्कर सिंह धामी , बिहार के सम्राट चौधरी और यूपी के केशव प्रसाद मौर्या ने एक्स पर नमन किया।
ढींगरा का जन्म 18 सितंबर 1883 को अमृतसर में हुआ था।
1 जुलाई 1909 को उन्होंने लंदन में ब्रिटिश अधिकारी सर विलियम हट कर्जन वायली की हत्या की थी।
17 अगस्त 1909 को पेंटनविल जेल , लंदन में फाँसी दी गई — उस समय वे मात्र 25 वर्ष के थे।

अमर क्रांतिकारी मदनलाल ढींगरा की जयंती पर 18 सितंबर 2026 को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सहित अनेक राज्यों के मुख्यमंत्रियों और नेताओं ने एक्स पर पोस्ट करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। ढींगरा वह क्रांतिकारी थे जिन्होंने 1 जुलाई 1909 को लंदन में ब्रिटिश अधिकारी सर विलियम हट कर्जन वायली की हत्या कर औपनिवेशिक सत्ता को चुनौती दी थी।

मुख्यमंत्रियों की श्रद्धांजलि

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक्स पर लिखा, 'मां भारती की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करने वाले अमर क्रांतिकारी मदनलाल ढींगरा की जयंती पर श्रद्धापूर्वक नमन। उनका साहस, राष्ट्रभक्ति और सर्वोच्च बलिदान आने वाली पीढ़ियों को सदैव देश के प्रति कर्तव्य और समर्पण की प्रेरणा देता रहेगा।'

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने एक्स पर पोस्ट किया, 'भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारी मदनलाल ढींगरा की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन! उनका अदम्य साहस, राष्ट्रप्रेम और सर्वोच्च बलिदान सदैव देशवासियों को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।'

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी एक्स पोस्ट में लिखा, 'मां भारती की सेवा में अपना सर्वस्व अर्पित करने वाले महान क्रांतिकारी मदनलाल ढींगरा जी की जयंती पर कोटिशः नमन। आपका अदम्य साहस, राष्ट्र के प्रति समर्पण और सर्वोच्च बलिदान सदैव हमें राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देता रहेगा।'

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक्स पर कहा, 'महान क्रांतिकारी एवं राष्ट्रभक्त अमर शहीद मदनलाल ढींगरा की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए उनका अदम्य साहस, त्याग और सर्वोच्च बलिदान राष्ट्र के प्रति समर्पण की अमर मिसाल है।'

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या ने एक्स पर लिखा, 'मां भारती के वीर सपूत, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारी अमर शहीद मदनलाल ढींगरा की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन! मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए उनका अदम्य साहस, राष्ट्रभक्ति और सर्वोच्च बलिदान सदैव देशवासियों को प्रेरित करता रहेगा।' केंद्रीय मंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने भी एक्स पर नमन करते हुए कहा, 'राष्ट्रभक्ति, साहस और त्याग से ओत-प्रोत उनका जीवन देशवासियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।'

कौन थे मदनलाल ढींगरा

मदनलाल ढींगरा का जन्म 18 सितंबर 1883 को पंजाब के अमृतसर में हुआ था। वे लंदन में उच्च शिक्षा ग्रहण करते हुए भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन से जुड़ गए। इंडिया हाउस में सक्रिय रहे ढींगरा पर ब्रिटिश गुप्त पुलिस की पैनी नज़र थी, क्योंकि यह संस्था भारत में ब्रिटिश शासन के विरोध का केंद्र बन चुकी थी।

1 जुलाई 1909 को ढींगरा ने लंदन में एक सार्वजनिक समारोह में सर विलियम हट कर्जन वायली की गोली मारकर हत्या कर दी। कर्जन वायली भारत सचिव के राजनीतिक सहायक और ब्रिटिश गुप्त पुलिस के प्रमुख थे, जो इंडिया हाउस की गतिविधियों पर निगरानी रखते थे।

ऐतिहासिक मुकदमा और बलिदान

23 जुलाई 1909 को ओल्ड बेली कोर्ट में ढींगरा पर मुकदमा शुरू हुआ। उन्होंने स्वयं अपनी पैरवी की और ब्रिटिश अदालत की वैधता को सिरे से नकार दिया — यह रवैया उनकी राष्ट्रीय चेतना की अभिव्यक्ति था। 17 अगस्त 1909 को लंदन की पेंटनविल जेल में उन्हें फाँसी दे दी गई। मात्र 25 वर्ष की आयु में दिया गया उनका बलिदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक प्रखर अध्याय बन गया।

आम जनता और राजनीतिक प्रासंगिकता

गौरतलब है कि हर वर्ष ढींगरा की जयंती पर इस तरह की सामूहिक श्रद्धांजलि राजनीतिक दलों, विशेषकर BJP शासित राज्यों में, तेज़ हो रही है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में राष्ट्रीय नायकों की विरासत को लेकर सार्वजनिक विमर्श लगातार बढ़ रहा है। ढींगरा की कहानी युवा पीढ़ी को स्वतंत्रता संग्राम के उन पहलुओं से परिचित कराती है जो पाठ्यपुस्तकों में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं।

आने वाले समय में यह संभव है कि केंद्र और राज्य सरकारें उनकी स्मृति को और अधिक संस्थागत स्वरूप देने की दिशा में कदम उठाएँ, जैसा कि अन्य क्रांतिकारियों के साथ हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि उनका साहस और विचारधारा किसी भी बड़े स्वतंत्रता सेनानी से कम न थी। सवाल यह है कि क्या यह स्मरण-अभियान ढींगरा की विरासत को पाठ्यक्रम और संस्थाओं में स्थायी जगह दिलाने की ओर ले जाएगा, या सोशल मीडिया पोस्ट तक ही सिमटा रहेगा।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मदनलाल ढींगरा कौन थे?
मदनलाल ढींगरा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारी थे, जिनका जन्म 18 सितंबर 1883 को पंजाब के अमृतसर में हुआ था। उन्होंने 1 जुलाई 1909 को लंदन में ब्रिटिश अधिकारी सर विलियम हट कर्जन वायली की हत्या कर औपनिवेशिक शासन को सीधी चुनौती दी और 17 अगस्त 1909 को पेंटनविल जेल में फाँसी पर चढ़ गए।
मदनलाल ढींगरा ने कर्जन वायली की हत्या क्यों की?
कर्जन वायली भारत सचिव के राजनीतिक सहायक और ब्रिटिश गुप्त पुलिस के प्रमुख थे, जो लंदन स्थित इंडिया हाउस की क्रांतिकारी गतिविधियों पर निगरानी रखते थे। ढींगरा ने उनकी हत्या ब्रिटिश अत्याचारों के प्रतिशोध और भारत की स्वतंत्रता के संदेश के रूप में की।
ढींगरा के मुकदमे और फाँसी का विवरण क्या है?
23 जुलाई 1909 को लंदन के ओल्ड बेली कोर्ट में उनका मुकदमा शुरू हुआ। ढींगरा ने स्वयं अपनी पैरवी की और ब्रिटिश अदालत की वैधता को नकार दिया। 17 अगस्त 1909 को उन्हें पेंटनविल जेल, लंदन में फाँसी दी गई।
2026 में ढींगरा जयंती पर किन नेताओं ने श्रद्धांजलि दी?
18 सितंबर 2026 को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, यूपी के मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या और केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी ने एक्स पर श्रद्धांजलि दी।
इंडिया हाउस क्या था और ढींगरा से इसका क्या संबंध था?
इंडिया हाउस लंदन में भारतीय क्रांतिकारियों का केंद्र था, जहाँ ब्रिटिश शासन के विरुद्ध विचार और योजनाएँ बनती थीं। ढींगरा इस संस्था से सक्रिय रूप से जुड़े थे, जिसकी वजह से वे ब्रिटिश गुप्त पुलिस की नज़र में थे।
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