8 नवंबर 2026
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भारत-पाक विवाद बातचीत से सुलझें, युद्ध समाधान नहीं: पाकिस्तान के कानून मंत्री आजम नजीर तरार

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भारत-पाक विवाद बातचीत से सुलझें, युद्ध समाधान नहीं: पाकिस्तान के कानून मंत्री आजम नजीर तरार

सारांश

पाकिस्तान के कानून मंत्री आजम नजीर तरार का नई दिल्ली में बड़ा बयान — युद्ध नहीं, बातचीत से सुलझेंगे भारत-पाक विवाद। सिंधु जल संधि, आतंकवाद और कश्मीर पर संवाद की ज़रूरत बताई, 170 करोड़ की आबादी और परमाणु शक्ति के मद्देनज़र शांति को अपरिहार्य बताया।

मुख्य बातें

पाकिस्तान के कानून एवं न्याय मंत्री आजम नजीर तरार ने 8 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में भारत के साथ बातचीत की वकालत की।
तरार ने कहा — युद्ध और बल प्रयोग किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हैं।
सिंधु जल संधि (1960) पर कहा कि 1965 , 1971 के युद्ध और 1999 के कारगिल के बावजूद यह संधि कायम रही, अब स्थिति बदल गई है।
दोनों देशों की संयुक्त जनसंख्या 170 करोड़ से अधिक, दोनों परमाणु शक्ति संपन्न — शांति अनिवार्य: तरार।
आतंकवाद के आरोपों को नकारते हुए कहा — आरोप-प्रत्यारोप छोड़कर दोनों देश साथ बैठकर समाधान तलाशें।
पाकिस्तान ने अमेरिका-ईरान तनाव में मध्यस्थ भूमिका का दावा किया।

पाकिस्तान के कानून एवं न्याय मंत्री आजम नजीर तरार ने 8 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों से चले आ रहे विवाद — जिनमें सिंधु जल संधि और आतंकवाद के मुद्दे शामिल हैं — केवल बातचीत और कूटनीतिक संवाद से ही सुलझाए जा सकते हैं। तरार ने स्पष्ट किया कि युद्ध और बल प्रयोग किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकते।

मुख्य बयान और तर्क

विश्व बैंक की एक बैठक के अवसर पर पहुँचे तरार ने कहा, 'दुनिया में कई बड़े विवाद बातचीत और समझौतों के ज़रिए सुलझाए गए हैं। भारत और पाकिस्तान को भी आपसी मतभेद दूर करने के लिए संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए।' उन्होंने यूरोपीय देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि शताब्दियों की शत्रुता के बावजूद यूरोप आज शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की मिसाल है और दोनों दक्षिण एशियाई पड़ोसियों को इससे सीख लेनी चाहिए।

तरार ने यह भी कहा कि दोनों देशों की संयुक्त जनसंख्या 170 करोड़ से अधिक है और दोनों परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र हैं — इस संदर्भ में शांति और सह-अस्तित्व की आवश्यकता और भी अधिक बढ़ जाती है।

सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान का रुख

सिंधु जल संधि (1960) पर तरार ने कहा कि यह संधि अपने आप में ऐतिहासिक रूप से विशिष्ट रही है — 1965 और 1971 के युद्धों तथा 1999 के कारगिल संघर्ष के बावजूद यह समझौता कायम रहा। उन्होंने स्वीकार किया कि अब इस संधि को लेकर स्थिति बदल गई है। तरार के अनुसार, 'पानी जीवन का आधार है और अंतरराष्ट्रीय कानून में निचले तटवर्ती देशों के जल अधिकारों का भी महत्व है।' उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस मुद्दे को विश्व बैंक के समक्ष भी उठा चुका है और द्विपक्षीय बातचीत के ज़रिए स्थायी समाधान की माँग करता रहा है।

आतंकवाद और आरोप-प्रत्यारोप पर टिप्पणी

आतंकवाद के मुद्दे पर तरार ने कहा कि 'पाकिस्तान दशकों से आतंकवाद का सामना कर रहा है।' उन्होंने बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में जारी हिंसा का उल्लेख किया। आतंकवाद के समर्थन के आरोपों पर पाकिस्तान की भूमिका से उन्होंने इनकार किया। उन्होंने तर्क दिया कि 'आरोप-प्रत्यारोप से किसी देश को सकारात्मक नतीजा नहीं मिल सकता — दोनों देशों को एक साथ बैठकर मुद्दों की पहचान करनी चाहिए और समाधान तलाशना चाहिए।'

सांस्कृतिक समानता और कश्मीर

तरार ने भारत और पाकिस्तान के लोगों के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक समानताओं को रेखांकित करते हुए कहा कि दोनों देशों के कुछ हिस्सों में खानपान, संस्कृति और परंपराओं में गहरी समानता है। हालाँकि, उन्होंने माना कि कश्मीर जैसे मुद्दे और राजनीतिक कारण इन संबंधों पर प्रभाव डालते हैं। कश्मीर पर पाकिस्तान के पारंपरिक रुख का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि दोनों सरकारों को भावी पीढ़ियों के हितों को ध्यान में रखकर निर्णय लेने चाहिए।

क्षेत्रीय और वैश्विक शांति में पाकिस्तान की भूमिका

तरार ने पाकिस्तान की हालिया कूटनीतिक सक्रियता का उल्लेख करते हुए कहा कि इस्लामाबाद ने अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के प्रयासों में मध्यस्थ भूमिका निभाई है। उनके अनुसार, 'पाकिस्तान क्षेत्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी शांति की कोशिशों में भूमिका निभाना चाहता है।' उन्होंने कहा कि अतिवादी और कठोर रुख अपनाने के बजाय तार्किक संवाद ही आगे बढ़ने का रास्ता है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावना को लेकर तरार आशावादी दिखे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पाकिस्तान के कानून मंत्री आजम नजीर तरार ने भारत के बारे में क्या कहा?
तरार ने 8 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद — जिनमें सिंधु जल संधि और आतंकवाद शामिल हैं — केवल बातचीत और कूटनीतिक संवाद से सुलझाए जा सकते हैं, युद्ध से नहीं। उन्होंने दोनों देशों की 170 करोड़ से अधिक जनसंख्या और परमाणु शक्ति संपन्न होने का हवाला देते हुए शांति को अपरिहार्य बताया।
सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान का क्या रुख है?
पाकिस्तान के कानून मंत्री तरार ने कहा कि 1960 में हुई सिंधु जल संधि तीन युद्धों के बावजूद कायम रही, लेकिन अब स्थिति बदल गई है। पाकिस्तान ने इस मुद्दे को विश्व बैंक के समक्ष उठाया है और द्विपक्षीय बातचीत के ज़रिए स्थायी समाधान की माँग की है।
आतंकवाद के मुद्दे पर तरार ने क्या कहा?
तरार ने कहा कि पाकिस्तान खुद दशकों से आतंकवाद का शिकार रहा है और बलूचिस्तान तथा खैबर पख्तूनख्वा में हिंसा का उल्लेख किया। उन्होंने आतंकवाद के समर्थन के आरोपों को नकारते हुए कहा कि आरोप-प्रत्यारोप छोड़कर दोनों देशों को साथ बैठकर समाधान खोजना चाहिए।
तरार के बयान का भारत-पाक संबंधों पर क्या महत्व है?
तरार का यह बयान ऐसे समय में आया है जब सिंधु जल संधि पर तनाव और कश्मीर विवाद के कारण दोनों देशों के संबंध तनावपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत के लिए अभी भी गुंजाइश मौजूद है और सरकारों को भावी पीढ़ियों के हितों को ध्यान में रखकर फैसले लेने चाहिए।
पाकिस्तान ने क्षेत्रीय शांति में क्या भूमिका का दावा किया है?
तरार ने दावा किया कि पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के प्रयासों में मध्यस्थ भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि इस्लामाबाद क्षेत्रीय के साथ-साथ वैश्विक शांति प्रयासों में भी सक्रिय भूमिका निभाना चाहता है।
राष्ट्र प्रेस
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