2 अगस्त 2026
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सिंधु जल संधि निलंबन: क्वात्रा बोले — पाकिस्तान ने आतंक नहीं, सद्भावना को किया नष्ट

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सिंधु जल संधि निलंबन: क्वात्रा बोले — पाकिस्तान ने आतंक नहीं, सद्भावना को किया नष्ट

सारांश

राजदूत क्वात्रा का न्यूजवीक लेख महज कूटनीतिक बयानबाजी नहीं — यह भारत की उस नई रणनीति का सार्वजनिक दस्तावेज़ है जो जल को आतंक-विरोध के हथियार के रूप में स्थापित करती है। 40,000 मौतों का आँकड़ा और पाकिस्तान के कुप्रबंधन पर सीधा आरोप, वाशिंगटन से दिया गया सबसे तीखा भारतीय कूटनीतिक संदेश है।

मुख्य बातें

अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने 2 अगस्त 2026 को न्यूजवीक में लेख लिखकर सिंधु जल संधि निलंबन का बचाव किया।
1960 की सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान को बेसिन के कुल जल का 80 प्रतिशत मिला, फिर भी उसने संधि की भावना को नष्ट किया।
पाकिस्तान के आतंकवादी अभियान में भारत में 40,000 से अधिक लोगों की मौत हुई — संसद, मुंबई, उरी, पठानकोट और पहलगाम हमले शामिल।
पहलगाम हमले के बाद भारत ने संधि निलंबित की; यह तब तक जारी रहेगा जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद अपरिवर्तनीय रूप से नहीं त्यागता।
PM मोदी के शब्दों में: 'पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते।' क्वात्रा ने पाकिस्तान की जल समस्या को उसके अपने कुप्रबंधन का नतीजा बताया, 'जल आक्रमणकारी' के आरोप को खारिज किया।

अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने 2 अगस्त 2026 को न्यूजवीक में लिखे एक लेख में स्पष्ट किया कि सिंधु जल संधि का निलंबन कोई नई आक्रामकता नहीं, बल्कि पाकिस्तान के दशकों के आचरण की औपचारिक स्वीकृति मात्र है। उनके अनुसार, 1960 में 'सद्भावना और मित्रता की भावना' से की गई इस संधि को पाकिस्तान ने आधी सदी में स्वयं ही निरर्थक बना दिया।

संधि की पृष्ठभूमि और जल-असमानता

सिंधु जल संधि 1960 के तहत भारत को तीन पूर्वी नदियों पर नियंत्रण मिला, जिनमें बेसिन के कुल जल का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा है। वहीं पाकिस्तान को तीन पश्चिमी नदियों का पानी मिला, जो कुल जल का लगभग 80 प्रतिशत है। क्वात्रा ने लिखा, 'इस असमानता की वजह से दशकों तक भारत के उन क्षेत्रों का विकास रुक गया, जिन्हें बेहतर जल अधिकारों से फायदा हो सकता था। इसके बावजूद भारत ने संधि का ईमानदारी से पालन किया।'

पहलगाम हमले के बाद निलंबन

पिछले वर्ष हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया। यह निलंबन तब तक जारी रहेगा जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के समर्थन को विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय रूप से नहीं त्याग देता।

पाकिस्तान के आचरण का लेखा-जोखा

क्वात्रा के अनुसार, भारत के प्रति पाकिस्तान का रवैया युद्धों, दुश्मनी और सीमा पार से आतंकवादी हमलों से पहचाना गया है — जिसमें भारतीय संसद पर हमला, मुंबई आतंकी हमला, उरी, पठानकोट और पहलगाम के हमले शामिल हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पाकिस्तान के आतंकवादी अभियान के कारण भारत में 40,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। इसके अलावा, 2012 में तुलबुल नेविगेशन प्रोजेक्ट पर हुए आतंकी हमले समेत भारतीय परियोजना स्थलों को बार-बार निशाना बनाया गया, जिससे भारत संधि के तहत अपने अधिकारों का समुचित उपयोग नहीं कर सका।

मोदी का कड़ा रुख और पाकिस्तान को संदेश

बातचीत पुनः शुरू करने के आह्वान पर प्रतिक्रिया देते हुए क्वात्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शब्द उद्धृत किए: 'आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते, आतंक और व्यापार एक साथ नहीं चल सकते, पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते।' उन्होंने पाकिस्तान पर भारत को 'जल आक्रमणकारी' बताने की कोशिश को खारिज करते हुए कहा कि पाकिस्तान में पानी की कमी उसकी अपनी सरकार के कुप्रबंधन का परिणाम है।

आगे की राह

क्वात्रा ने पाकिस्तान सरकार से सीधे कहा कि वह भारत पर आरोप लगाने और धमकियाँ देने के बजाय अपनी खराब जल उत्पादकता को सुधारे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि पाकिस्तान वास्तव में द्विपक्षीय संबंध सुधारना चाहता है, तो उसे सबसे पहले अपने बनाए हुए आतंकी ढाँचे को समाप्त करना होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि आत्मरक्षा है। 40,000 मौतों का आँकड़ा और तुलबुल जैसी ठोस मिसाल देकर भारत ने नैतिक आधार मज़बूत किया है। लेकिन असली चुनौती यह है कि अंतरराष्ट्रीय जल कानून में आतंकवाद के जवाब में जल-रोक की कोई स्थापित मिसाल नहीं है — और पाकिस्तान इसी कानूनी शून्य का फायदा उठाने की कोशिश करेगा। भारत को कूटनीतिक आख्यान के साथ-साथ एक ठोस कानूनी ढाँचा भी खड़ा करना होगा।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिंधु जल संधि को भारत ने क्यों निलंबित किया?
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सिंधु जल संधि को निलंबित किया। यह निलंबन तब तक जारी रहेगा जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के समर्थन को विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय रूप से नहीं त्याग देता।
विनय क्वात्रा ने सिंधु जल संधि पर क्या कहा?
राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने न्यूजवीक में लिखे लेख में कहा कि 1960 की संधि सद्भावना और मित्रता की भावना से हुई थी, लेकिन पाकिस्तान ने आधी सदी में उस सद्भावना को स्वयं नष्ट कर दिया। उनके अनुसार संधि का निलंबन केवल उसी हकीकत की औपचारिक स्वीकृति है।
सिंधु जल संधि 1960 में पानी का बँटवारा कैसे हुआ था?
संधि के तहत भारत को तीन पूर्वी नदियों पर नियंत्रण मिला जिनमें बेसिन के कुल जल का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा है, जबकि पाकिस्तान को तीन पश्चिमी नदियों का पानी मिला जो कुल जल का लगभग 80 प्रतिशत है। क्वात्रा के अनुसार इस असमानता के बावजूद भारत ने दशकों तक संधि का ईमानदारी से पालन किया।
पाकिस्तान में पानी की कमी के लिए कौन ज़िम्मेदार है?
राजदूत क्वात्रा ने स्पष्ट रूप से कहा कि पाकिस्तान में पानी की कमी उसकी अपनी सरकार के कुप्रबंधन का परिणाम है, न कि भारत की किसी कार्रवाई का। उन्होंने पाकिस्तान द्वारा भारत को 'जल आक्रमणकारी' बताने के प्रयास को सिरे से खारिज किया।
भारत-पाकिस्तान बातचीत फिर कब शुरू हो सकती है?
क्वात्रा ने PM मोदी के बयान का हवाला देते हुए कहा कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते। भारत का रुख स्पष्ट है — जब तक पाकिस्तान अपने आतंकी ढाँचे को समाप्त नहीं करता, द्विपक्षीय वार्ता संभव नहीं।
राष्ट्र प्रेस
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