सिंधु जल संधि निलंबन: क्वात्रा बोले — पाकिस्तान ने आतंक नहीं, सद्भावना को किया नष्ट
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने 2 अगस्त 2026 को न्यूजवीक में लिखे एक लेख में स्पष्ट किया कि सिंधु जल संधि का निलंबन कोई नई आक्रामकता नहीं, बल्कि पाकिस्तान के दशकों के आचरण की औपचारिक स्वीकृति मात्र है। उनके अनुसार, 1960 में 'सद्भावना और मित्रता की भावना' से की गई इस संधि को पाकिस्तान ने आधी सदी में स्वयं ही निरर्थक बना दिया।
संधि की पृष्ठभूमि और जल-असमानता
सिंधु जल संधि 1960 के तहत भारत को तीन पूर्वी नदियों पर नियंत्रण मिला, जिनमें बेसिन के कुल जल का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा है। वहीं पाकिस्तान को तीन पश्चिमी नदियों का पानी मिला, जो कुल जल का लगभग 80 प्रतिशत है। क्वात्रा ने लिखा, 'इस असमानता की वजह से दशकों तक भारत के उन क्षेत्रों का विकास रुक गया, जिन्हें बेहतर जल अधिकारों से फायदा हो सकता था। इसके बावजूद भारत ने संधि का ईमानदारी से पालन किया।'
पहलगाम हमले के बाद निलंबन
पिछले वर्ष हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया। यह निलंबन तब तक जारी रहेगा जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के समर्थन को विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय रूप से नहीं त्याग देता।
पाकिस्तान के आचरण का लेखा-जोखा
क्वात्रा के अनुसार, भारत के प्रति पाकिस्तान का रवैया युद्धों, दुश्मनी और सीमा पार से आतंकवादी हमलों से पहचाना गया है — जिसमें भारतीय संसद पर हमला, मुंबई आतंकी हमला, उरी, पठानकोट और पहलगाम के हमले शामिल हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पाकिस्तान के आतंकवादी अभियान के कारण भारत में 40,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। इसके अलावा, 2012 में तुलबुल नेविगेशन प्रोजेक्ट पर हुए आतंकी हमले समेत भारतीय परियोजना स्थलों को बार-बार निशाना बनाया गया, जिससे भारत संधि के तहत अपने अधिकारों का समुचित उपयोग नहीं कर सका।
मोदी का कड़ा रुख और पाकिस्तान को संदेश
बातचीत पुनः शुरू करने के आह्वान पर प्रतिक्रिया देते हुए क्वात्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शब्द उद्धृत किए: 'आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते, आतंक और व्यापार एक साथ नहीं चल सकते, पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते।' उन्होंने पाकिस्तान पर भारत को 'जल आक्रमणकारी' बताने की कोशिश को खारिज करते हुए कहा कि पाकिस्तान में पानी की कमी उसकी अपनी सरकार के कुप्रबंधन का परिणाम है।
आगे की राह
क्वात्रा ने पाकिस्तान सरकार से सीधे कहा कि वह भारत पर आरोप लगाने और धमकियाँ देने के बजाय अपनी खराब जल उत्पादकता को सुधारे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि पाकिस्तान वास्तव में द्विपक्षीय संबंध सुधारना चाहता है, तो उसे सबसे पहले अपने बनाए हुए आतंकी ढाँचे को समाप्त करना होगा।