सिंधु जल संधि स्थगित रहेगी जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद नहीं रोकता: विदेश मंत्रालय
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार, 5 जून 2026 को स्पष्ट किया कि सिंधु जल संधि (IWT) तब तक स्थगित रहेगी जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह और विश्वसनीय तरीके से समाप्त नहीं कर देता। नई दिल्ली में साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान MEA प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने यह बयान दिया, जो पाकिस्तान द्वारा भारत की कुछ जल-संबंधी परियोजनाओं पर आपत्ति जताए जाने के बाद आया है।
पाकिस्तान की आपत्ति और भारत का जवाब
पाकिस्तान ने चिनाब-ब्यास लिंक टनल परियोजना और सलाल बांध जलाशय से गाद निकालने की भारत की योजनाओं पर एतराज जताते हुए आरोप लगाया था कि भारत पानी को 'हथियार' के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा है। इस पर प्रवक्ता जायसवाल ने सीधे शब्दों में कहा, 'हमने सिंधु जल संधि को स्थगित कर रखा है और यह तब तक स्थगित रहेगी जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह समाप्त नहीं कर देता।'
मध्यस्थता न्यायालय के फैसले को भारत की अस्वीकृति
भारत ने पिछले महीने भी 15 मई 2026 को तथाकथित मध्यस्थता न्यायालय (कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन) द्वारा जारी फैसले को 'शून्य और अवैध' करार दिया था। यह फैसला सिंधु जल संधि की व्याख्या और अधिकतम जल भंडारण क्षमता से जुड़े विवाद पर था। विदेश मंत्रालय का कहना है कि भारत ने इस न्यायाधिकरण के गठन को कभी मान्यता नहीं दी, इसलिए इसकी कोई भी कार्यवाही, फैसला या आदेश भारत की दृष्टि में कानूनी रूप से मान्य नहीं है।
गौरतलब है कि भारत ने इससे पहले जम्मू-कश्मीर में स्थित किशनगंगा और रतले जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े मामलों में भी इसी न्यायाधिकरण के फैसलों को खारिज किया था। भारत का आरोप है कि यह पूरा तंत्र ही सिंधु जल संधि का उल्लंघन है और पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों का दुरुपयोग कर जवाबदेही से बचने की कोशिश करता रहा है।
संधि की पृष्ठभूमि और स्थगन का कारण
सिंधु जल संधि पर भारत और पाकिस्तान के बीच 19 सितंबर 1960 को हस्ताक्षर हुए थे। यह संधि सिंधु नदी प्रणाली की नदियों के जल उपयोग को नियंत्रित करती है और दशकों से दोनों देशों के बीच जल-बँटवारे का आधार रही है। पिछले वर्ष पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपने संप्रभु अधिकारों का हवाला देते हुए इस संधि को स्थगित करने का निर्णय लिया था। यह ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान संबंध पहले से ही गहरे तनाव में हैं।
संप्रभुता और कश्मीर पर भारत का स्पष्ट रुख
जम्मू-कश्मीर में स्विट्जरलैंड के राजदूत की यात्रा पर पाकिस्तान की टिप्पणी के संदर्भ में भी जायसवाल ने दो-टूक कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और स्विस राजदूत सहित किसी भी देश के राजदूत को वहाँ जाने की पूरी स्वतंत्रता है। विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि संधि के स्थगन की अवधि में भारत उसके तहत अपने दायित्वों का पालन करने के लिए बाध्य नहीं है।
आगे क्या
भारत की यह स्थिति संकेत देती है कि जब तक पाकिस्तान की ओर से ठोस और सत्यापन-योग्य कार्रवाई नहीं होती, सिंधु जल संधि की बहाली की कोई तत्काल संभावना नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार यह गतिरोध दोनों देशों के बीच व्यापक कूटनीतिक संबंधों को भी प्रभावित करता रहेगा।