14 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान को भारत की कड़ी चेतावनी: 'दुस्साहस किया तो नक्शे से मिट जाएगा'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान को भारत की कड़ी चेतावनी: 'दुस्साहस किया तो नक्शे से मिट जाएगा'

सारांश

सिंधु जल संधि पर शहबाज शरीफ की 'रेड लाइन' के बाद भारत में सत्तापक्ष और विपक्ष एक सुर में खड़े हो गए। BJP से लेकर कांग्रेस और AAP तक — सबने पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी दी। यह दुर्लभ राजनीतिक एकता बताती है कि सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का रुख अब पहले से कहीं ज़्यादा सख्त है।

मुख्य बातें

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सिंधु जल संधि को अपने देश की 'रेड लाइन' बताया।
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा — भारत अपने राष्ट्रीय हितों की 'दृढ़ता से रक्षा' करता है।
सिंह ने चेतावनी दी कि दुस्साहस पर पाकिस्तान 'दुनिया के नक्शे से मिट जाएगा।' कांग्रेस नेता तारिक अनवर और AAP सांसद संजय सिंह ने भी पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया।
राजदूत विनय क्वात्रा ने कहा — पाकिस्तान ने पाँच दशकों में संधि की सद्भावना खुद नष्ट की।
भारत का स्पष्ट रुख: सीमा पार आतंकवाद बंद होने तक IWT स्थगित रहेगी।

भारत के प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं ने 14 अगस्त 2026 को सिंधु जल संधि (IWT) पर पाकिस्तान की कथित धमकी के जवाब में एकजुट होकर कड़ी चेतावनी जारी की है। नेताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि पाकिस्तान ने कोई दुस्साहस किया, तो उसे भारी कीमत चुकानी पड़ेगी और वह 'दुनिया के नक्शे से हमेशा के लिए मिट जाएगा।' यह प्रतिक्रिया पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने सिंधु जल के मुद्दे को अपने देश की 'रेड लाइन' करार दिया था।

पाकिस्तान की 'रेड लाइन' और भारत का रुख

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सिंधु जल संधि को लेकर कहा था कि इस मामले में पाकिस्तान किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा और यह उनके देश की 'रेड लाइन' है। इसके जवाब में भारत का स्पष्ट रुख यह है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह बंद नहीं करता, तब तक सिंधु जल संधि स्थगित रहेगी।

गौरतलब है कि 1960 में हस्ताक्षरित यह संधि दशकों तक दोनों देशों के बीच जल-बँटवारे का आधार रही, लेकिन सीमा पार आतंकवाद की बढ़ती घटनाओं के बाद भारत ने इसे स्थगित करने का निर्णय लिया।

केंद्रीय मंत्री और भाजपा की प्रतिक्रिया

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा, 'दुनिया में चाहे कोई भी ताकत हो, पाकिस्तान की हैसियत ही क्या है? हम अपने हित में काम करते हैं और अपने हितों की दृढ़ता से रक्षा करते हैं।' उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार ही हर निर्णय लेता है।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आर.पी. सिंह ने शहबाज शरीफ को याद दिलाया कि वे शायद ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की दुर्दशा भूल गए हैं, जब पाकिस्तान के आतंकवादी ढाँचे और एयरपोर्ट्स को भारी नुकसान पहुँचाया गया था। उन्होंने चेतावनी दी, 'अगर उन्होंने कोई दुस्साहस किया तो पाकिस्तान हमेशा के लिए दुनिया के नक्शे से मिट जाएगा।'

विपक्षी दलों की एकजुट आवाज़

कांग्रेस नेता तारिक अनवर ने भी पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित करने का निर्णय एक ठोस कारण से लिया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की ओर से लगातार आतंकवादी गतिविधियाँ और कश्मीर में हाल के हमलों में निर्दोष लोगों की जान जाने के चलते भारत के लिए पाकिस्तान के साथ सामान्य संबंध बनाए रखना बेहद मुश्किल हो गया है।

आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान को हर तरह की 'रेड, येलो और ब्लू लाइन' दिखा दी है। उन्होंने कहा कि भारत के पास पाकिस्तान की किसी भी कार्रवाई का 'हजार गुना ज़्यादा ताकत' से मुंहतोड़ जवाब देने की क्षमता है और इस मुद्दे पर पूरा देश केंद्र सरकार और भारतीय सशस्त्र बलों के साथ खड़ा है।

राजदूत विनय क्वात्रा का बयान

अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने कहा था कि 1960 में सिंधु जल संधि सद्भावना और मित्रता की भावना से हुई थी, लेकिन पाकिस्तान ने पाँच दशकों में इस भावना को स्वयं नष्ट कर दिया। उनके अनुसार, संधि को स्थगित करना केवल इस वास्तविकता को स्वीकार करना है कि पाकिस्तान के आचरण ने पहले ही उस सद्भावना को समाप्त कर दिया था।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान संबंध पहले से ही तनावपूर्ण हैं और ऑपरेशन सिंदूर के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद लगभग ठप है। सिंधु जल संधि का स्थगन अब एक व्यापक रणनीतिक संदेश बनता जा रहा है — कि भारत आतंकवाद को बर्दाश्त करते हुए किसी भी द्विपक्षीय समझौते को जारी नहीं रखेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

'नक्शे से मिटाने' जैसी भाषा कूटनीतिक जोखिम भी उठाती है, खासकर तब जब दोनों देश परमाणु-सशस्त्र हों। असली प्रश्न यह है कि क्या IWT स्थगन को एक सत्यापन-योग्य आतंकवाद-रोधी ढाँचे से जोड़ा जाएगा, या यह केवल दबाव का एक अस्थायी औज़ार बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिंधु जल संधि (IWT) क्या है और इसे क्यों स्थगित किया गया?
सिंधु जल संधि 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच छह नदियों के जल-बँटवारे के लिए हस्ताक्षरित हुई थी। भारत ने इसे सीमा पार आतंकवाद की बढ़ती घटनाओं और कश्मीर में हमलों के बाद स्थगित कर दिया, यह स्पष्ट करते हुए कि आतंकवाद बंद होने तक संधि बहाल नहीं होगी।
पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि को 'रेड लाइन' क्यों कहा?
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि सिंधु नदी का पानी पाकिस्तान की कृषि और जनजीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और इस मुद्दे पर कोई समझौता संभव नहीं। उन्होंने इसे अपने देश की 'रेड लाइन' करार दिया।
ऑपरेशन सिंदूर क्या था और इसका इस विवाद से क्या संबंध है?
ऑपरेशन सिंदूर एक भारतीय सैन्य कार्रवाई थी जिसमें पाकिस्तान के आतंकवादी ढाँचे और एयरपोर्ट्स को नुकसान पहुँचाया गया था। BJP प्रवक्ता आर.पी. सिंह ने शहबाज शरीफ को इस ऑपरेशन की याद दिलाते हुए कहा कि पाकिस्तान को अपनी सीमाएँ पहचाननी चाहिए।
भारत के किन-किन दलों ने पाकिस्तान के खिलाफ एकजुट रुख अपनाया?
इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (BJP), भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) — तीनों ने एकजुट होकर पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी दी। यह राजनीतिक एकमत राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर भारतीय राजनीति की साझा सोच को दर्शाता है।
राजदूत विनय क्वात्रा ने IWT स्थगन पर क्या कहा?
अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने कहा कि 1960 में यह संधि सद्भावना की भावना से हुई थी, लेकिन पाकिस्तान ने पाँच दशकों में उस भावना को स्वयं नष्ट कर दिया। उनके अनुसार, IWT का स्थगन केवल इस कड़वी वास्तविकता को औपचारिक स्वीकृति देना है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 घंटे पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 4 महीने पहले