यूएन महासभा में शहबाज शरीफ की युद्ध-धमकी: सिंधु जल रोका तो 'युद्ध की कार्रवाई' मानेंगे
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने 26 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान भारत को कड़ी चेतावनी दी — कहा कि पाकिस्तान के हिस्से के सिंधु नदी के पानी को रोकने, उसमें बाधा डालने या उसका रुख बदलने की किसी भी कोशिश को युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा। शरीफ का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था।
सिंधु जल संधि पर सीधी चेतावनी
शरीफ ने यूएन महासभा के मंच से कहा, 'भारत, भारत, भारत... इस बारे में कोई गलती न करे।' उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान के हिस्से का पानी रोकना उनके देश के लिए युद्ध जैसी स्थिति होगी। गौरतलब है कि भारत ने पहलगाम हमले के बाद — जिसमें पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों ने धार्मिक आधार पर 26 लोगों की हत्या की थी — छह दशक पुरानी सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था।
कश्मीर और जनमत संग्रह का पुराना राग
शरीफ ने कश्मीर का मुद्दा भी उठाया और भारत पर वहाँ मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि कश्मीर के लोग संयुक्त राष्ट्र द्वारा 'स्वतंत्र और निष्पक्ष जनमत संग्रह' कराने के वादे की प्रतीक्षा कर रहे हैं। हालाँकि, विशेषज्ञों के अनुसार 21 अप्रैल 1948 को अपनाए गए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 47 में जनमत संग्रह से पूर्व पाकिस्तान से अपनी सेनाएँ, कबायली लड़ाके और नागरिक कश्मीर से हटाने की शर्त थी — जिसे पाकिस्तान ने कभी पूरा नहीं किया। शरीफ ने कश्मीर को पाकिस्तान की 'जुगुलर वेन' (गले की प्रमुख नस) बताया — एक ऐसा रूपक जो आलोचकों के अनुसार ताकत नहीं बल्कि उनकी संवेदनशीलता और कमज़ोरी को ही उजागर करता है।
संयुक्त राष्ट्र के बाहर पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन
उसी समय संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर बलूच और पश्तून समुदाय के लोग पाकिस्तान सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर महिलाओं और बच्चों की हत्या, बलूच व पश्तून लोगों को यातना देने, मनमानी गिरफ्तारी और जबरन गुमशुदगी जैसे गंभीर आरोप लगाए। एक मानवाधिकार संगठन के हवाले से दावा किया गया है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में हाल के महीनों में 90 से अधिक लोग पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कार्रवाई में मारे गए हैं।
इस्लामोफोबिया के आरोप — और पाकिस्तान का अपना दर्पण
शरीफ ने भारत पर इस्लामोफोबिया का आरोप लगाया, लेकिन उसी दौरान संयुक्त राष्ट्र के बाहर पाकिस्तान में ईसाइयों के कथित उत्पीड़न के विरुद्ध भी प्रदर्शन हो रहे थे। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों के एक समूह ने अप्रैल में पाकिस्तान में हिंदू और ईसाई महिलाओं तथा नाबालिग लड़कियों — जिनमें कुछ की उम्र 12 वर्ष तक बताई गई — के कथित अपहरण पर चिंता जताई थी। पाकिस्तान में मंदिरों और चर्चों पर हमले तथा ईशनिंदा के आरोपों के बाद भीड़ द्वारा हत्याओं की घटनाएँ दर्ज की गई हैं।
सेना की प्रशंसा और सुरक्षा परिषद सुधार पर रुख
शरीफ ने अपने भाषण में पाकिस्तानी फील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर की जमकर सराहना की और खाड़ी क्षेत्र में कथित कूटनीतिक प्रयासों का श्रेय उन्हें दिया। साथ ही, भारत पर अप्रत्यक्ष निशाना साधते हुए शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में नए स्थायी सदस्य जोड़ने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि परिषद को 'अधिक प्रतिनिधित्व वाला' बनाया जाए, लेकिन उसमें 'कुछ चुनिंदा देशों की महत्वाकांक्षाएँ' नहीं दिखनी चाहिए — यह टिप्पणी भारत की स्थायी सदस्यता की माँग के संदर्भ में देखी जा रही है, जिसे इस शिखर सम्मेलन में कई नेताओं का समर्थन मिला।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान संबंध पहलगाम हमले के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर हैं और दोनों देशों के बीच कूटनीतिक गतिरोध जारी है। आने वाले हफ्तों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारत इस भाषण पर औपचारिक रूप से कैसी प्रतिक्रिया देता है।