26 सितंबर 2026
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UNGA में शहबाज का भारत-विरोधी एजेंडा बेनकाब: फॉर्म-47 से आतंकवाद तक, हर मोर्चे पर घिरे

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UNGA में शहबाज का भारत-विरोधी एजेंडा बेनकाब: फॉर्म-47 से आतंकवाद तक, हर मोर्चे पर घिरे

सारांश

UNGA के मंच पर शहबाज शरीफ का भारत-विरोधी एजेंडा दो मोर्चों पर उल्टा पड़ा — भारतीय राजनयिक पेटल गहलोत ने फॉर्म-47, ओसामा और सैटेलाइट साक्ष्यों से पाकिस्तान को निरुत्तर किया, जबकि पत्रकारों के सामने शहबाज हाफिज सईद और आतंकवाद के सवालों पर चुप्पी साधकर निकल गए।

मुख्य बातें

शहबाज शरीफ ने 25 सितंबर 2026 को UNGA के 81वें सत्र में भारत पर सिंधु जल विवाद और कश्मीर को लेकर निशाना साधा और युद्ध की चेतावनी दी।
भारत की फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने 'राइट टू रिप्लाई' के तहत पाकिस्तान के आतंकवाद रिकॉर्ड, ओसामा बिन लादेन की मौजूदगी और अल्पसंख्यकों की स्थिति पर कड़ा जवाब दिया।
गहलोत ने कहा कि सैटेलाइट तस्वीरें पुष्टि करती हैं कि भारतीय कार्रवाई में पाकिस्तानी सैन्य एयरबेस तबाह हुए और पाकिस्तानी सेना ने खुद सीजफायर माँगा था।
फॉर्म-47 का मुद्दा उठाकर भारत ने पाकिस्तान की 2024 चुनाव वैधता पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर सवाल खड़े किए।
पत्रकारों द्वारा हाफिज सईद और आतंकवाद पर सीधे सवाल किए जाने पर शहबाज शरीफ बिना जवाब दिए आगे बढ़ गए।

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने 25 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र में भारत पर जमकर निशाना साधा — कश्मीर को 'गले की नस' बताया, सिंधु जल संधि पर भारत को कटघरे में खड़ा किया और युद्ध की चेतावनी देने से भी परहेज नहीं किया। लेकिन न्यूयॉर्क में उनकी यह यात्रा दो मोर्चों पर उल्टी पड़ी — भारत के कड़े पलटवार ने उनके दावों की धज्जियाँ उड़ाईं और पत्रकारों के सीधे सवालों के सामने वे चुपचाप आगे बढ़ गए।

UNGA मंच से भारत-विरोधी एजेंडा

शहबाज शरीफ ने अपने संबोधन में कहा कि सिंधु नदी प्रणाली केवल पाकिस्तान के लिए नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की जीवनरेखा है। उन्होंने भारत पर पानी को 'हथियार' बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि नदियाँ देशों को जोड़ती हैं, बाँटती नहीं। इसी भाषण में उन्होंने भारत को सिंधु जल विवाद पर युद्ध की चेतावनी भी दे डाली — यानी एक ही मंच पर शांति और संघर्ष, दोनों का विरोधाभासी संदेश।

भारत का करारा पलटवार: राइट टू रिप्लाई

शहबाज के भाषण के तुरंत बाद यूएन में भारत की फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने 'राइट टू रिप्लाई' का उपयोग करते हुए पाकिस्तान के एक-एक दावे का जवाब दिया। गहलोत ने 9/11 हमलों के मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन के पाकिस्तान में शरण पाने का उल्लेख करते हुए कहा कि आतंकवाद पर पाकिस्तान के दावों को उसके अपने रिकॉर्ड के आलोक में परखा जाना चाहिए।

भारत ने पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति, ईशनिंदा कानूनों और कट्टरपंथ का मुद्दा भी उठाया। रावलकोट में अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों के हनन का सवाल उठाकर गहलोत ने पाकिस्तान की 'शांति-प्रिय' छवि को चुनौती दी।

ऑपरेशन और 'काल्पनिक जीत' पर तीखा जवाब

शहबाज शरीफ के पाकिस्तान की 'जीत' के दावे पर पेटल गहलोत ने कहा: 'पूरी दुनिया के सामने सैटेलाइट तस्वीरें और सबूत मौजूद हैं कि भारतीय कार्रवाई में पाकिस्तान के सैन्य एयरबेस तबाह हुए थे। अगर तबाह रनवे और जले हैंगर पाकिस्तान को जीत लगते हैं, तो वह इस काल्पनिक जीत का जश्न मनाने के लिए स्वतंत्र है। पाकिस्तान की सेना ने खुद सीजफायर की माँग की थी और यह पूरी दुनिया जानती है।' यह जवाब UNGA के मंच पर भारत की अब तक की सबसे तीखी राजनयिक प्रतिक्रियाओं में गिना जा रहा है।

फॉर्म-47 और पाकिस्तानी लोकतंत्र की वैधता पर सवाल

भारत के पलटवार में फॉर्म-47 के विवाद का भी संदर्भ सामने आया। गौरतलब है कि पाकिस्तान के 2024 के आम चुनाव के बाद विपक्षी दलों और उम्मीदवारों ने कई निर्वाचन क्षेत्रों में प्रारंभिक और अंतिम परिणामों के बीच अंतर के गंभीर आरोप लगाए थे। फॉर्म-47 तब से पाकिस्तान की सत्ता की राजनीतिक वैधता पर सवाल उठाने का प्रतीक बन चुका है। आलोचकों का कहना है कि पाकिस्तान में सेना की परोक्ष भूमिका और 27वें संविधान संशोधन के ज़रिए 'वास्तविक शासकों' को दी गई छूट, देश में नागरिक शासन की विश्वसनीयता को कमज़ोर करती है।

पत्रकारों के सामने चुप्पी: आतंकवाद और हाफिज सईद पर जवाब नहीं

यूएन मुख्यालय में प्रवेश के दौरान जब पत्रकारों ने शहबाज शरीफ को घेरा, तो सवाल भारत के नहीं, बल्कि पाकिस्तान के अपने आतंकवाद रिकॉर्ड पर था। एक पत्रकार ने सीधे पूछा कि पाकिस्तान आतंकवादियों को पनाह देना कब बंद करेगा — शहबाज ने कोई जवाब नहीं दिया और आगे बढ़ गए। इसके बाद हाफिज सईद को लेकर भी सवाल किया गया, लेकिन इस पर भी वे मौन रहे। यह चुप्पी उस वैश्विक मंच पर अत्यंत महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है जहाँ पाकिस्तान खुद को शांति का पैरोकार बताता आया है।

क्या होगा आगे

यह ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान संबंध पहले से ही अत्यंत तनावपूर्ण हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान के आतंकवाद-विरोधी दावों को संदेह से देख रहा है। राजनयिक जानकारों के अनुसार भारत की इस बार की रणनीति — आतंकवाद, लोकतांत्रिक वैधता और सैन्य विफलता, तीनों मुद्दों को एक साथ उठाना — UNGA में अधिक प्रभावी साबित हुई। शहबाज शरीफ की यह यात्रा अपने घोषित उद्देश्यों के बजाय पाकिस्तान के लिए कूटनीतिक असहजता का कारण बनती नज़र आई।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक आक्रामक राजनयिक प्रतिआक्रमण था जिसने लोकतांत्रिक वैधता, आतंकवाद और सैन्य विफलता — तीनों पर पाकिस्तान को बचाव की मुद्रा में ला खड़ा किया। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूक जाती है वह यह है: जब पाकिस्तान का प्रधानमंत्री अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों के हाफिज सईद संबंधी सवालों से मुँह फेर लेता है, तो यह चुप्पी उनके किसी भी भाषण से अधिक वाक्पटु होती है।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

UNGA में शहबाज शरीफ ने भारत के बारे में क्या कहा?
शहबाज शरीफ ने 25 सितंबर 2026 को UNGA के 81वें सत्र में कश्मीर को पाकिस्तान की 'गले की नस' बताया, भारत पर सिंधु नदी के पानी को 'हथियार' बनाने का आरोप लगाया और सिंधु जल विवाद पर युद्ध की चेतावनी भी दी।
भारत ने UNGA में शहबाज के भाषण का जवाब कैसे दिया?
भारत की फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने 'राइट टू रिप्लाई' का उपयोग करते हुए पाकिस्तान के आतंकवाद रिकॉर्ड, ओसामा बिन लादेन की पाकिस्तान में मौजूदगी, अल्पसंख्यकों के अधिकार हनन और फॉर्म-47 विवाद का हवाला देकर पाकिस्तान के दावों को चुनौती दी। उन्होंने सैटेलाइट साक्ष्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि पाकिस्तानी सेना ने खुद सीजफायर की माँग की थी।
फॉर्म-47 विवाद क्या है और इसे UNGA में क्यों उठाया गया?
फॉर्म-47 पाकिस्तान के 2024 आम चुनाव से जुड़ा विवाद है जिसमें विपक्षी दलों ने कई निर्वाचन क्षेत्रों में प्रारंभिक और अंतिम परिणामों के बीच हेरफेर के आरोप लगाए थे। भारत ने इसे UNGA में पाकिस्तानी सरकार की लोकतांत्रिक वैधता पर सवाल उठाने के लिए उद्धृत किया।
हाफिज सईद और आतंकवाद पर पत्रकारों के सवालों पर शहबाज शरीफ ने क्या जवाब दिया?
शहबाज शरीफ ने पत्रकारों के उन सवालों का कोई जवाब नहीं दिया जिनमें पूछा गया था कि पाकिस्तान आतंकवादियों को पनाह देना कब बंद करेगा और हाफिज सईद के बारे में क्या रुख है। वे बिना जवाब दिए आगे बढ़ गए।
पेटल गहलोत ने पाकिस्तान की 'जीत' के दावे पर क्या कहा?
पेटल गहलोत ने कहा कि सैटेलाइट तस्वीरें और सबूत पुष्टि करते हैं कि भारतीय कार्रवाई में पाकिस्तान के सैन्य एयरबेस तबाह हुए। उन्होंने इसे 'काल्पनिक जीत' करार देते हुए कहा कि पाकिस्तानी सेना ने खुद सीजफायर की माँग की थी और यह पूरी दुनिया जानती है।
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