यूएनजीए में भारत का पाकिस्तान पर पलटवार: शहबाज को बताया 'सेना की कठपुतली', 9/11 और ऑपरेशन सिंदूर का दिया हवाला
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में 26 सितंबर 2026 को भारत ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के भाषण को 'बेतुका' करार देते हुए कड़ा जवाब दिया। संयुक्त राष्ट्र में भारतीय मिशन की प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने कहा कि शरीफ 'सेना की, सेना द्वारा और सेना के लिए' चलने वाली सरकार की महज एक 'कठपुतली' हैं। यह प्रतिक्रिया न्यूयॉर्क में उसी मंच से दी गई, जहाँ ठीक 25 साल पहले 9/11 आतंकी हमलों की भीषण त्रासदी दुनिया ने देखी थी।
मुख्य घटनाक्रम
शुक्रवार को शहबाज शरीफ के महासभा-भाषण के तत्काल बाद पेटल गहलोत ने 'राइट ऑफ रिप्लाई' का प्रयोग करते हुए भारत का पक्ष रखा। उन्होंने कहा, 'उनके कठपुतली नेता आते-जाते रह सकते हैं, लेकिन इसमें कोई भ्रम नहीं होना चाहिए कि असली फैसले कौन करता है। दिन में वे सुरक्षा की बात करते हैं और रात में आतंकवाद को अंजाम देते हैं।' गहलोत ने शरीफ के भाषण में पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल सैयद असीम मुनीर की बार-बार तारीफ किए जाने पर भी तीखा प्रहार किया और कहा कि मुनीर कोई निर्वाचित जनप्रतिनिधि नहीं हैं।
9/11 और ओसामा बिन लादेन का संदर्भ
गहलोत ने याद दिलाया कि 9/11 हमले के मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन को अमेरिकी नेवी सील्स ने पाकिस्तान के एबटाबाद में मार गिराया था, जो पाकिस्तान मिलिट्री अकादमी के ठीक नज़दीक स्थित है। उन्होंने कहा कि जिस संस्था के लिए शरीफ ने इतनी श्रद्धा दिखाई, उसी के परिसर से सटे इलाके में दुनिया का सबसे खतरनाक आतंकवादी छिपा था। गौरतलब है कि यह सभा न्यूयॉर्क में होती है — 9/11 से महज कुछ किलोमीटर की दूरी पर — और भारत ने इस भौगोलिक प्रतीकात्मकता का पूरा उपयोग अपने तर्क में किया।
'फॉर्म 47 सरकार' और संविधान संशोधन पर निशाना
गहलोत ने पाकिस्तान में प्रचलित 'फॉर्म 47 सरकार' पदावली का उल्लेख करते हुए कहा कि 2024 के पाकिस्तानी चुनाव में सेना ने इस चुनावी दस्तावेज में हेरफेर कर शरीफ को सत्ता में बिठाया। उन्होंने पाकिस्तान के 27वें संविधान संशोधन का भी जिक्र किया, जिसके बारे में उनका कहना था कि यह सेनाध्यक्ष असीम मुनीर को जीवनभर की कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है। यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद को कथित तौर पर अपने ही नागरिकों से बचाव के लिए किले में तब्दील कर दिया गया है।
धार्मिक असहिष्णुता और अल्पसंख्यक अधिकारों पर पलटवार
शरीफ द्वारा भारत में धार्मिक असहिष्णुता के लगाए गए आरोपों पर गहलोत ने कहा कि पाकिस्तान की व्यवस्था में ईशनिंदा कानूनों की केंद्रीय भूमिका है, जिनमें मौत की सजा का प्रावधान है। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार इन कानूनों का इस्तेमाल धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने के लिए किया जाता रहा है। गहलोत ने कहा, 'दुनिया जानती है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ कैसा व्यवहार होता है।'
जम्मू-कश्मीर और ऑपरेशन सिंदूर पर भारत का कड़ा रुख
जम्मू-कश्मीर पर भारत का रुख दोहराते हुए गहलोत ने स्पष्ट कहा, 'भारत का केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर मेरे देश का अभिन्न और अटूट हिस्सा है और हमेशा रहेगा।' उन्होंने शरीफ द्वारा ऑपरेशन सिंदूर पर किए गए दावों को भी सिरे से खारिज किया। भारत के अनुसार यह ऑपरेशन 26 भारतीयों की धार्मिक आधार पर की गई हत्या के जवाब में चलाया गया था, जिसके पीछे पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े द रेजिस्टेंस फ्रंट का हाथ बताया गया। गहलोत ने चेतावनी दी, 'हमने पिछले साल दिखा दिया कि आतंकवादियों के पास न भागने की जगह होगी और न छिपने की।' आगे इस तरह की चुनौतियों का सामना करने के लिए भारत ने अपने आत्मरक्षा के अधिकार का उपयोग जारी रखने की बात दोहराई।