अनिल शास्त्री बोले — ऑपरेशन सिंदूर में PM मोदी की सोच मेरे पिता जैसी, पाकिस्तान को लौटानी होगी POK की ज़मीन
सारांश
मुख्य बातें
पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर उनके पुत्र एवं पूर्व सांसद अनिल शास्त्री ने 2 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि पाकिस्तान के विरुद्ध जवाबी सैन्य कार्रवाई के मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके पिता की सोच एक समान रही है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को 'बिल्कुल सही निर्णय' बताते हुए दोनों नेताओं के दृष्टिकोण की तुलना की।
1965 युद्ध और ऑपरेशन सिंदूर की तुलना
अनिल शास्त्री ने कहा, ‘जब पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर छंब सेक्टर में हमला किया — 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान — तो शास्त्री जी ने सशस्त्र बलों को जवाबी हमला करने और उसमें लाहौर को भी शामिल करने का आदेश दिया। निर्देशों का पालन करते हुए हमारी सेना लाहौर की ओर बढ़ी। और अब, ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से, हमारे सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान में आतंकवादियों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक की। इस संदर्भ में मेरा मानना है कि दोनों नेताओं की सोच एक जैसी रही है।’
गौरतलब है कि यह तुलना राष्ट्रीय स्वाभिमान और सैन्य निर्णायकता के प्रतीक के रूप में की गई है, न कि किसी दलीय रुझान के आधार पर। अनिल शास्त्री स्वयं कांग्रेस पृष्ठभूमि से हैं, इसलिए उनका यह वक्तव्य राजनीतिक दृष्टि से भी उल्लेखनीय है।
जम्मू-कश्मीर और POK पर कड़ा रुख
पूर्व सांसद ने स्पष्ट किया कि जम्मू और कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और राष्ट्रीय एकता व अखंडता का प्रतीक है। उन्होंने कहा, ‘अगर पाकिस्तान सोचता है कि वह जम्मू और कश्मीर पर कब्जा कर सकता है, तो उसके इरादे हमेशा विफल होंगे।’
उन्होंने यह भी माँग की कि पाकिस्तान को वह भूमि वापस करनी चाहिए जिस पर उसने कथित तौर पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है। उनका कहना था, ‘चाहे पाकिस्तान चीन की मदद माँगे, अमेरिका की, या किसी और की — वह कश्मीर को भारत से अलग नहीं कर सकता।’
शास्त्री जी की विरासत और आज की प्रासंगिकता
अनिल शास्त्री ने अपने पिता की सादगी और समर्पण को याद करते हुए कहा कि समय के साथ सोच भी बदलती है, परंतु मूल्य स्थायी रहते हैं। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि प्रधानमंत्री मोदी हर वर्ष 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से लाल बहादुर शास्त्री का उल्लेख करते हैं और उनके प्रसिद्ध नारे 'जय जवान, जय किसान' को दोहराते हैं।
उन्होंने कहा, ‘चाहे जो भी सरकार सत्ता में आए, शास्त्री जी के प्रति सभी के मन में सम्मान है।’ यह टिप्पणी उल्लेखनीय है क्योंकि यह दलीय सीमाओं से परे एक राष्ट्रीय भावना को रेखांकित करती है।
जयंती पर शास्त्री जी को याद करने का संदेश
पूर्व प्रधानमंत्री के पुत्र ने अपील की कि इस जयंती पर देशवासी लाल बहादुर शास्त्री को केवल एक व्यक्ति के रूप में नहीं, बल्कि उनके आदर्शों, ईमानदारी, विचारधारा और देश के प्रति प्रतिबद्धता के रूप में याद करें। उन्होंने कहा कि यह विचार करना आवश्यक है कि इन मूल्यों को आज की पीढ़ी में कैसे समाहित किया जा सकता है।
उनका यह संदेश ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान संबंध ऑपरेशन सिंदूर के बाद एक नए मोड़ पर हैं और सैन्य निर्णायकता को लेकर राष्ट्रीय विमर्श तेज़ है।