शहबाज शरीफ ने UNGA में हाफिज सईद पर पत्रकारों के सवाल टाले, आतंकवाद पर साधी चुप्पी
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ 25 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में 81वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में शिरकत करने पहुंचे, लेकिन मीडिया रिपोर्टों के अनुसार वे वहाँ आतंकवाद को लेकर पूछे गए सीधे सवालों से बचते नजर आए। प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद पर मुकदमे को लेकर पूछे गए सवालों पर शरीफ ने कोई जवाब नहीं दिया।
यूएन मुख्यालय पर क्या हुआ
सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में शहबाज शरीफ को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय पहुँचते दिखाया गया है, जहाँ पत्रकारों ने उनसे पूछा, 'आप आतंकियों को पनाह देना कब बंद करेंगे?' शरीफ बिना कोई प्रतिक्रिया दिए आगे बढ़ गए।
यूएन भवन से निकलते वक्त पत्रकारों ने उनसे यही सवाल दोहराया — 'आप लश्कर-ए-तैयबा प्रमुख हाफिज सईद पर मुकदमा कब चलाएंगे?' इस बार भी पाकिस्तानी प्रधानमंत्री बिना कुछ बोले आगे निकल गए। यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद वित्तपोषण को लेकर दबाव लगातार बढ़ रहा है।
हाफिज सईद कौन है
हाफिज सईद पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक है और भारत के सर्वाधिक वांछित आतंकियों में से एक है। संयुक्त राष्ट्र ने उसे वैश्विक आतंकी घोषित किया हुआ है और अमेरिकी सरकार ने उस पर 1 करोड़ डॉलर का इनाम रखा है।
गौरतलब है कि सईद पाकिस्तान में कथित तौर पर कानूनी प्रक्रिया से बाहर रहते हुए सक्रिय बताया जाता है, जो अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ इस्लामाबाद के संबंधों में एक स्थायी विवाद का विषय रहा है।
भारत की कड़ी प्रतिक्रिया
इससे पहले बुधवार को यूएन मानवाधिकार परिषद में भारतीय राजनयिक क्षितिज त्यागी ने पाकिस्तान को कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान अपनी जनता की बेहतर सेवा तब करेगा जब वह दूसरों की जमीन हड़पने या आतंक निर्यात करने के बजाय विकास पर ध्यान दे, क्योंकि न तो ये हरकतें और न ही परिषद में उसका नाटक उसकी अर्थव्यवस्था को बचाने वाले कर्ज चुकाने में मदद करेगा।'
त्यागी ने यह भी स्पष्ट किया कि इस्लामाबाद को क्षेत्रीय महत्वाकांक्षा पालने या सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देने के बजाय अपनी कर्ज पर टिकी अर्थव्यवस्था पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
पाक-अधिकृत कश्मीर पर भारत का आरोप
भारतीय राजनयिक ने पाकिस्तान के घरेलू रिकॉर्ड को भी उजागर किया। उन्होंने पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर (POK) में नागरिकों के दमन का हवाला दिया, जहाँ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों को कथित तौर पर घातक बल से दबाया गया।
क्षितिज त्यागी ने परिषद में कहा, 'पिछले शुक्रवार को इस परिषद को बताया गया था कि पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्र में जून से अब तक कई नागरिक मारे गए हैं, इस्लामाबाद और रावलपिंडी में छात्रों को गिरफ्तार किया गया है और खाद्य सामग्री तथा दवाओं को रोका गया है।'
आगे क्या
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब 81वीं UNGA में पाकिस्तान पर आतंकवाद के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ रहा है। शरीफ की चुप्पी को कूटनीतिक हलकों में उल्लेखनीय माना जा रहा है। भारत-पाकिस्तान संबंधों के संदर्भ में यूएन मंच एक बार फिर सीमा पार आतंकवाद के सवाल पर तीखा बन गया है।