2 नवंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

शहबाज शरीफ का बड़ा कबूलनामा: 2019-20 में अफगानिस्तान से आतंकी लाकर KP में बसाए गए

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
शहबाज शरीफ का बड़ा कबूलनामा: 2019-20 में अफगानिस्तान से आतंकी लाकर KP में बसाए गए

सारांश

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खुद माना कि 2019-20 में अफगानिस्तान से आतंकी लाकर KP में बसाए गए — और दोष डाला इमरान खान पर। लेकिन सेना की भूमिका, 800 अरब रुपये का हिसाब और 8,000 खाली पुलिस पदों का सवाल अनुत्तरित है। यह बयान पाकिस्तान की आतंकवाद-रोधी विश्वसनीयता पर नया प्रश्नचिह्न लगाता है।

मुख्य बातें

शहबाज शरीफ ने 31 अक्टूबर को स्वीकार किया कि 2019-20 में अफगानिस्तान से आतंकवादियों को वापस लाकर खैबर पख्तूनख्वा में पुनर्वासित किया गया।
इसके बाद पाकिस्तान में आतंकी घटनाओं में तेज़ी आई और देश को भारी जान-माल का नुकसान हुआ — यह दावा शरीफ का है।
KP को NFC पुरस्कार के तहत अब तक लगभग 800 अरब पाकिस्तानी रुपये मिले, फिर भी प्रांत में करीब 8,000 पुलिस पद खाली बताए जा रहे हैं।
शरीफ ने सारी जिम्मेदारी इमरान खान सरकार पर डाली; सुरक्षा प्रतिष्ठान की भूमिका पर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया।
PTI के केंद्रीय सूचना सचिव शेख वकास अकरम ने शरीफ के आरोपों को 'नैतिक रूप से खोखला' बताकर खारिज किया।
पाकिस्तान ने आतंकवाद में कथित तौर पर 80,000 जानें और 150-200 अरब डॉलर का आर्थिक नुकसान झेला है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने 31 अक्टूबर 2026 को स्वीकार किया कि 2019 और 2020 में अफगानिस्तान से आतंकवादियों को वापस लाकर खैबर पख्तूनख्वा (KP) प्रांत में पुनर्वासित किया गया, जिसके बाद देश में आतंकवादी घटनाओं में तेज़ी आई। यह बयान पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) के KP संसदीय दल और पार्टी पदाधिकारियों की एक आंतरिक बैठक में दिया गया। इस स्वीकारोक्ति ने पाकिस्तान की आतंकवाद-रोधी नीति, सुरक्षा प्रतिष्ठान की भूमिका और राजनीतिक जवाबदेही पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

शहबाज का बयान: क्या कहा प्रधानमंत्री ने

शरीफ ने अपने संबोधन में कहा, 'नवाज शरीफ के कार्यकाल में सामूहिक प्रयासों से आतंकवाद को काफी हद तक खत्म कर दिया गया था। 2017-18 तक हालात में सुधार हुआ था, लेकिन 2019 और 2020 में आतंकवादियों की वापसी और उनके पुनर्वास के कारण सुरक्षा स्थिति फिर बिगड़ गई।' उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया की जिम्मेदारी पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सरकार पर डाली। हालांकि, शरीफ ने यह स्पष्ट नहीं किया कि इस पुनर्वास प्रक्रिया में कितने लोग शामिल थे, किस स्तर पर अनुमति दी गई और देश की खुफिया एजेंसियों की भूमिका क्या थी।

800 अरब रुपये के बावजूद सुरक्षा तंत्र की विफलता

शरीफ ने 2010 के राष्ट्रीय वित्त आयोग (NFC) पुरस्कार के तहत KP को दिए गए अतिरिक्त एक प्रतिशत वित्तीय हिस्से का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, इस व्यवस्था के तहत खैबर पख्तूनख्वा को अब तक लगभग 800 अरब पाकिस्तानी रुपये मिल चुके हैं। बावजूद इसके, प्रांत में पर्याप्त 'सेफ सिटी प्रोजेक्ट' स्थापित नहीं हुए, आतंकवाद निरोधक विभाग (CTD) को नाकाफी संसाधन मिले और पुलिस के करीब 8,000 पद खाली पड़े रहे — यह आँकड़ा रिपोर्टों पर आधारित है।

गौरतलब है कि यही वह प्रांत है जहाँ से पाकिस्तान की आतंकवाद-रोधी मुहिम का केंद्र रहा है। ऐसे में वित्तीय संसाधनों के उपयोग को लेकर उठाए गए सवाल एक गंभीर प्रशासनिक विफलता की ओर संकेत करते हैं।

विरोधाभास: आरोप और जिम्मेदारी का सवाल

शरीफ के बयान में एक स्पष्ट विरोधाभास उभरता है — एक तरफ वह आतंकवादियों की वापसी के लिए इमरान खान की सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, दूसरी तरफ KP को मिले 800 अरब रुपये के इस्तेमाल पर सवाल भी उठा रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि पाकिस्तान में सेना और सुरक्षा प्रतिष्ठान की निर्णायक भूमिका को देखते हुए, आतंकवादियों की वापसी जैसे संवेदनशील मुद्दे की जिम्मेदारी केवल निर्वाचित सरकार पर डालना पर्याप्त नहीं है। शरीफ ने अपने संबोधन में इस पर कोई विस्तृत स्पष्टीकरण नहीं दिया।

PTI का पलटवार

शरीफ के आरोपों पर पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने तीखी प्रतिक्रिया दी। पार्टी के केंद्रीय सूचना सचिव शेख वकास अकरम ने कहा, 'प्रधानमंत्री को लोकतंत्र और शासन व्यवस्था पर उनकी पार्टी को उपदेश देने का नैतिक अधिकार नहीं है।' PTI ने यह भी दावा किया कि इमरान खान के कार्यकाल में KP में शांति और स्थिरता बेहतर थी और संघीय सरकार ने आतंकवाद-रोधी अभियानों के लिए प्रांतीय प्रशासन को जरूरी संसाधन और उपकरण उपलब्ध नहीं कराए।

KP में आपातकाल और भारत के लिए निहितार्थ

शरीफ ने खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल और गवर्नर शासन लागू करने के फैसले को अपरिहार्य बताया, हालांकि PTI पहले ही इसे प्रांतीय स्वायत्तता पर हमला बता चुकी है। शरीफ ने यह भी रेखांकित किया कि पाकिस्तान ने आतंकवाद की लड़ाई में लगभग 80,000 लोगों की जान गंवाई और 150 से 200 अरब डॉलर तक का आर्थिक नुकसान उठाया। उन्होंने पेशावर के आर्मी पब्लिक स्कूल पर हुए हमले को पाकिस्तान के इतिहास की सबसे दर्दनाक घटनाओं में शामिल बताया।

भारत लंबे समय से पाकिस्तान की जमीन से संचालित आतंकवादी नेटवर्क और सीमा पार आतंकवाद को लेकर चिंता जताता रहा है। शरीफ का यह बयान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उस बुनियादी सवाल को नई धार देता है कि क्या पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ वास्तविक जवाबदेही तय करने को तैयार है। यह देखना बाकी है कि इस स्वीकारोक्ति के बाद पाकिस्तान की सुरक्षा नीति में कोई ठोस बदलाव आता है या यह बयान राजनीतिक दोषारोपण तक सीमित रह जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 खाली पुलिस पद यह संकेत देते हैं कि विफलता संरचनागत है, न कि केवल किसी एक सरकार की। भारत के नज़रिए से देखें तो यह बयान उन तर्कों को नई ताकत देता है जो वह वर्षों से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पेश करता रहा है। असली परीक्षा यह है कि क्या यह स्वीकारोक्ति नीतिगत सुधार में बदलती है, या पाकिस्तान की राजनीति में 'दूसरे पर दोष' के चिरपरिचित खेल का एक और अध्याय बनकर रह जाती है।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शहबाज शरीफ ने आतंकवादियों के पुनर्वास पर क्या कहा?
शहबाज शरीफ ने 31 अक्टूबर को PML-N की आंतरिक बैठक में कहा कि 2019 और 2020 में अफगानिस्तान से आतंकवादियों को वापस लाकर खैबर पख्तूनख्वा में बसाया गया, जिससे देश में सुरक्षा स्थिति फिर बिगड़ी। उन्होंने इसकी जिम्मेदारी तत्कालीन इमरान खान सरकार पर डाली।
इस बयान से पाकिस्तान की आतंकवाद-रोधी नीति पर क्या सवाल उठते हैं?
यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पाकिस्तान के सर्वोच्च निर्वाचित पदाधिकारी ने खुद माना कि आतंकवादियों को देश में वापस लाकर बसाया गया। इससे सुरक्षा प्रतिष्ठान की निगरानी भूमिका, खुफिया एजेंसियों की जानकारी और KP को मिले 800 अरब रुपये के उपयोग पर गंभीर प्रश्न उठते हैं।
PTI ने शहबाज के आरोपों का जवाब कैसे दिया?
PTI के केंद्रीय सूचना सचिव शेख वकास अकरम ने कहा कि प्रधानमंत्री को उनकी पार्टी को लोकतंत्र पर उपदेश देने का नैतिक अधिकार नहीं है। PTI ने यह भी दावा किया कि इमरान खान के कार्यकाल में KP में शांति और स्थिरता बेहतर थी और संघीय सरकार ने प्रांत को जरूरी संसाधन नहीं दिए।
खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल क्यों लगाया गया?
शहबाज शरीफ ने KP में आपातकाल और गवर्नर शासन लागू करने को अपरिहार्य बताया, क्योंकि उनके अनुसार प्रांत में सुरक्षा और प्रशासनिक स्थिति बुरी तरह बिगड़ चुकी थी। PTI ने इसे प्रांतीय स्वायत्तता पर राजनीतिक हमला करार दिया है।
पाकिस्तान के इस बयान का भारत के लिए क्या महत्व है?
भारत लंबे समय से पाकिस्तान की जमीन से संचालित आतंकवादी नेटवर्क और सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ आवाज़ उठाता रहा है। शरीफ की यह स्वीकारोक्ति उन्हीं चिंताओं को पुष्ट करती है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की जवाबदेही तय करने की माँग को नई धार देती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 1 साल पहले