खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी के बाद पंजाब पुलिस की बगावत, 25,000 जवानों की केपी तैनाती पर बड़ा विवाद
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान की संघीय सरकार द्वारा खैबर पख्तूनख्वा (केपी) में आपातकाल लागू किए जाने के बाद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रहीं। अब पंजाब पुलिस के जवानों ने केपी में तैनाती से इनकार का संकेत देकर सरकार की योजनाओं को एक नया झटका दिया है। 12 अक्टूबर 2026 को सामने आई इस स्थिति ने पाकिस्तान में राजनीतिक और प्रशासनिक संकट को और गहरा कर दिया है।
आपातकाल की पृष्ठभूमि
पाकिस्तान की संघीय सरकार ने रविवार, 12 अक्टूबर को पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) शासित प्रांत खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल घोषित किया। इसके पीछे दो प्रमुख कारण बताए गए — पहला, प्रांत में लगातार बढ़ती आतंकी गतिविधियाँ, और दूसरा, इमरान खान की पार्टी PTI द्वारा 'संवैधानिक मूल्यों की बहाली' के नाम पर निकाले जाने वाले लॉन्ग मार्च को रोकना।
इस्लामाबाद की नजर से देखें तो यह कदम केंद्र के लिए एक सुनियोजित रणनीति थी, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी कह रही है।
पंजाब पुलिस में असंतोष की असल वजह
रावलपिंडी डिवीजन में PTI के मार्च को रोकने के लिए तैनात पंजाब पुलिस के जवानों को जब यह खबर मिली कि गवर्नर शासन लागू होने के बाद कुल 40,000 जवानों में से 25,000 को अटक (पंजाब) से खैबर पख्तूनख्वा भेजा जा सकता है, तो उनकी चिंताएँ और बढ़ गईं।
प्रमुख पाकिस्तानी दैनिक डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, थकान, नींद की कमी और खराब रहन-सहन की परिस्थितियों से जूझ रहे एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि थके-हारे जवान केपी भेजे जाने को एक नई चुनौती और बड़ी मुसीबत के रूप में देख रहे हैं, 'खासकर तब जब उन्हें पहले से ही जरूरी सुविधाएँ नहीं मिल रही हैं।'
मौतें और बदहाली — जवानों का दर्द
रिपोर्टों के अनुसार, रावलपिंडी डिवीजन पुलिस प्रशासन पर तैनात जवानों को सड़ा-गला और बासी खाना परोसने के कई आरोप पिछले कुछ हफ्तों में सामने आए हैं। PTI विरोध मार्च के दौरान ड्यूटी पर रहते हुए अटक और वाह कैंट में पिछले दो हफ्तों में पाँच पुलिसकर्मियों की मौत की पुष्टि हुई है।
मौतों का विवरण इस प्रकार है: दो की मौत हार्ट अटैक से, एक नहर में डूबने से, और दो अन्य की मौत स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों के कारण हुई। इसके अलावा, एक कॉन्स्टेबल सर्पदंश के बाद गंभीर हालत में है।
डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, जवान बासी भोजन, खराब कैटरिंग, वॉशरूम की बदहाल स्थिति और रहने की खराब परिस्थितियों की शिकायतें करते रहे हैं।
अफसरों में भी दो फाड़
पुलिस महानिरीक्षक (IGP) ने इन रिपोर्टों को खारिज किया है। हालाँकि कुछ वरिष्ठ अधिकारी अपनी फोर्स के समर्थन में सामने आए और रावलपिंडी पुलिस अधिकारियों को कुप्रबंधन के लिए जिम्मेदार ठहराया। कुछ अन्य ने इसे साजिश करार दिया — अफसरशाही में यह विभाजन संकट की गंभीरता को और उजागर करता है।
पंजाब IGP का स्पष्टीकरण और आगे की राह
पंजाब के इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (IGP) अब्दुल करीम ने स्पष्ट किया कि पंजाब से केपी में पुलिस फोर्स भेजने के बारे में अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है और न ही कोई आधिकारिक निर्देश जारी किए गए हैं।
गौरतलब है कि यह स्थिति ऐसे समय में उभरी है जब पाकिस्तान में राजनीतिक तनाव अपने उच्चतम बिंदु पर है। केपी में आपातकाल, पुलिस की बदहाली और जवानों में असंतोष — ये सब मिलकर शहबाज सरकार के लिए एक बहु-आयामी प्रशासनिक संकट खड़ा कर रहे हैं। आने वाले दिनों में केंद्र और प्रांत के बीच यह टकराव और भी पेचीदा होने की आशंका है।