26 अक्टूबर 2026
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खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन खत्म करो: पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग की माँग, CM सोहेल अफरीदी की रिहाई का आग्रह

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खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन खत्म करो: पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग की माँग, CM सोहेल अफरीदी की रिहाई का आग्रह

सारांश

पाकिस्तान में एकमात्र विपक्ष-शासित प्रांत खैबर पख्तूनख्वा में संघीय सरकार के आपातकाल और गवर्नर शासन को दो हफ्ते पूरे होने पर मानवाधिकार आयोग ने तीखी आपत्ति जताई है — निर्वाचित मुख्यमंत्री की गिरफ्तारी को लोकतांत्रिक मानदंडों का खुला उल्लंघन बताते हुए तत्काल रिहाई और विधानसभा बहाली की माँग की है।

मुख्य बातें

पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) ने 25 अक्टूबर 2026 को खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल और गवर्नर शासन तत्काल खत्म करने की माँग की।
संघीय सरकार ने 12 अक्टूबर 2026 को प्रांतीय सरकार निलंबित कर मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी , जुनैद अकबर और विधानसभा अध्यक्ष बाबर सलीम स्वाती को 'प्रिवेंटिव कस्टडी' में लिया।
खैबर पख्तूनख्वा पाकिस्तान का एकमात्र विपक्ष-शासित प्रांत है; आयोग ने संघीय हस्तक्षेप को विशेष रूप से चिंताजनक बताया।
कथित तौर पर बारा में 2,000 से 4,000 लोगों की सभा पर लाठीचार्ज हुआ; पेशावर, स्वात और खैबर में पीटीआई कार्यकर्ताओं पर छापेमारी की खबरें।
एचआरसीपी ने इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं की बंदी, वजीरिस्तान , बन्नू और मिरानशाह में कर्फ्यू से आम जनजीवन प्रभावित होने पर भी आपत्ति जताई।
आयोग ने सरकार और पीटीआई से नागरिक समाज के साथ मिलकर राजनीतिक संवाद पुनः शुरू करने का आग्रह किया।

पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) ने 25 अक्टूबर 2026 को खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में लागू आपातकाल और गवर्नर शासन को तत्काल समाप्त करने की माँग की, साथ ही मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी समेत सभी मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए नेताओं की रिहाई का आग्रह किया। आयोग ने यह बयान एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किया, जिसमें संघीय सरकार के इस कदम को लोकतांत्रिक मानदंडों का घोर उल्लंघन करार दिया गया।

मुख्य घटनाक्रम

12 अक्टूबर 2026 को पाकिस्तान की संघीय सरकार ने खैबर पख्तूनख्वा की प्रांतीय सरकार को आपातकाल के तहत निलंबित कर दिया था। इसके बाद मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी, नेशनल असेंबली सदस्य जुनैद अकबर और विधानसभा अध्यक्ष बाबर सलीम स्वाती को 'प्रिवेंटिव कस्टडी' में लिया गया। डॉन अखबार की रिपोर्ट के अनुसार यह जानकारी सामने आई।

गौरतलब है कि खैबर पख्तूनख्वा पाकिस्तान का एकमात्र ऐसा प्रांत है जहाँ विपक्षी दल पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) की सरकार है। ऐसे में एचआरसीपी का कहना है कि यह हस्तक्षेप विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि यह राजनीतिक प्रतिस्पर्धी के खिलाफ संघीय शक्ति के संभावित दुरुपयोग का संकेत देता है।

आयोग की प्रमुख चिंताएँ

एचआरसीपी ने अपने बयान में कहा कि उसने दो सप्ताह पहले भी अधिकारियों को आपातकाल लागू करने के विरुद्ध कड़ी चेतावनी दी थी। आयोग के अनुसार उनकी चिंताएँ निम्न बिंदुओं पर केंद्रित हैं — लोकतांत्रिक दायरे का सिमटना, मतदाताओं का मताधिकार से वंचित होना, मनमानी और निवारक हिरासत, तथा आम नागरिकों पर सुरक्षा उपायों का असंगत प्रभाव।

आयोग ने यह भी कहा कि हिरासत में लिए गए सभी लोगों को गिरफ्तारी के आधार की जानकारी दी जानी चाहिए, वकीलों और परिजनों से मिलने की अनुमति मिलनी चाहिए और कानूनी समय-सीमा के भीतर अदालत में पेश किया जाना चाहिए। आयोग ने कहा कि प्रांत में 'अपारदर्शी नजरबंदी केंद्रों' का इतिहास इन सुरक्षा उपायों को और अधिक अनिवार्य बनाता है।

सैन्य कार्रवाई और नागरिकों पर असर

एचआरसीपी ने बताया कि उत्तरी और दक्षिणी वजीरिस्तान, बन्नू और मिरानशाह में कर्फ्यू और सैन्य तैनाती के कारण आम जनजीवन प्रभावित है। आयोग ने चेतावनी दी कि सैन्य अभियानों में नागरिकों के हताहत होने और बड़े पैमाने पर विस्थापन का जोखिम बना हुआ है, और यह कि केवल बलप्रयोग से स्थायी शांति स्थापित करने के प्रयास बार-बार विफल साबित हुए हैं।

इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं पर शुरुआती पाबंदी को लेकर भी संघीय सरकार की आलोचना करते हुए आयोग ने कहा कि इससे सूचना तक पहुँच, शिक्षा, संचार और आजीविका पर प्रतिकूल असर पड़ता है।

पीटीआई कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई

एचआरसीपी ने पेशावर, स्वात और खैबर में पीटीआई कार्यकर्ताओं पर पुलिस छापेमारी और सभाओं को तितर-बितर किए जाने की खबरों पर भी चिंता व्यक्त की। आयोग के अनुसार, कथित तौर पर बारा में पुलिस ने 2,000 से 4,000 लोगों की एक सभा पर लाठीचार्ज किया। आयोग ने स्पष्ट किया कि इन खबरों की स्वतंत्र पुष्टि अभी आवश्यक है, लेकिन जानकारी के अभाव को अधिकारों के उल्लंघन न होने का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।

पंजाब में पीटीआई की महिला कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी का भी उल्लेख करते हुए आयोग ने इसे राजनीतिक गतिविधियों पर व्यापक कार्रवाई का संकेत बताया और हिरासत में रखी गई महिलाओं के साथ हुए व्यवहार की जाँच की माँग की।

आयोग की माँगें और आगे का रास्ता

एचआरसीपी ने माँग की है कि मुख्यमंत्री और सभी मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए लोगों को तत्काल रिहा किया जाए, आपातकाल और गवर्नर शासन समाप्त हो और प्रांतीय विधानसभा बहाल की जाए। आयोग ने पाकिस्तान सरकार और पीटीआई दोनों से आग्रह किया कि वे नागरिक समाज की भागीदारी के साथ व्यापक राजनीतिक संवाद पुनः प्रारंभ करें। आयोग ने यह भी कहा, 'राज्य को समझना चाहिए कि आम सहमति और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की जगह आपातकाल के माध्यम से शासन चलाने का प्रयास पाकिस्तान के लोकतंत्र को अपूरणीय क्षति पहुँचा सकता है।'

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या पाकिस्तान की न्यायपालिका और संसद इस हस्तक्षेप पर स्वतंत्र जाँच की हिम्मत दिखा पाएँगे। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूक जाती है, वह यह है कि खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल का औचित्य 'आतंकवाद-रोधी' बताया जा रहा है — जबकि निर्वाचित प्रतिनिधियों को 'प्रिवेंटिव कस्टडी' में रखना इस दावे की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। बार-बार के सैन्य हस्तक्षेपों का इतिहास बताता है कि आपातकाल अक्सर समस्या का हल नहीं, बल्कि गहरे असंतोष की जड़ें मजबूत करता है।
RashtraPress
26 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन क्यों लगाया गया?
पाकिस्तान की संघीय सरकार ने 12 अक्टूबर 2026 को खैबर पख्तूनख्वा की प्रांतीय सरकार को आपातकाल के तहत निलंबित करते हुए गवर्नर शासन लागू किया। सरकार ने इसका औचित्य आतंकवाद-रोधी कार्रवाई बताया, हालाँकि मानवाधिकार समूहों ने इस पर सवाल उठाए हैं।
एचआरसीपी (HRCP) ने क्या माँगें रखी हैं?
पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग ने मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी सहित सभी हिरासत में लिए गए नेताओं की तत्काल रिहाई, आपातकाल और गवर्नर शासन समाप्त करने तथा प्रांतीय विधानसभा की बहाली की माँग की है। साथ ही सरकार और पीटीआई से नागरिक समाज के साथ राजनीतिक संवाद पुनः शुरू करने का आग्रह किया गया है।
कौन-कौन से नेता हिरासत में हैं?
डॉन अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी , नेशनल असेंबली सदस्य जुनैद अकबर और विधानसभा अध्यक्ष बाबर सलीम स्वाती को 'प्रिवेंटिव कस्टडी' में रखा गया है। पंजाब में पीटीआई की महिला कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी की भी खबर है।
आम नागरिकों पर इस कार्रवाई का क्या असर पड़ा है?
उत्तरी और दक्षिणी वजीरिस्तान, बन्नू और मिरानशाह में कर्फ्यू और सैन्य तैनाती से आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है। इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं पर शुरुआती पाबंदी से शिक्षा, संचार और आजीविका भी प्रभावित हुई।
पाकिस्तान में पीटीआई कार्यकर्ताओं पर क्या कार्रवाई हुई?
एचआरसीपी के अनुसार पेशावर, स्वात और खैबर में पीटीआई कार्यकर्ताओं पर पुलिस छापेमारी हुई है। कथित तौर पर बारा में पुलिस ने 2,000 से 4,000 लोगों की एक सभा पर लाठीचार्ज किया, हालाँकि आयोग ने स्वीकार किया कि इन खबरों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।
राष्ट्र प्रेस
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