हिमंता बिस्वा सरमा का एआई 'गंगनम स्टाइल' डांस वीडियो वायरल, इंस्टाग्राम पर 33 लाख से ज़्यादा व्यूज़
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) द्वारा तैयार किया गया डांस वीडियो रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को इंस्टाग्राम पर 33 लाख से अधिक बार देखा गया। वीडियो में उन्हें दक्षिण कोरियाई गायक पीएसवाई के विश्वविख्यात गीत 'गंगनम स्टाइल' पर अपने दो कैबिनेट सहयोगियों के साथ थिरकते हुए दिखाया गया है। मुख्यमंत्री के आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट से साझा इस क्लिप ने सोशल मीडिया पर तेज़ चर्चा छेड़ दी है।
वीडियो में क्या है
एआई-निर्मित इस क्लिप में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा, कृषि मंत्री पीयूष हजारिका और वित्त मंत्री जयंता मल्लबारुआ को 'गंगनम स्टाइल' के प्रतिष्ठित 'हॉर्स-राइडिंग' डांस मूव्स करते दिखाया गया है। यह वीडियो मुख्यमंत्री के सामान्य राजनीतिक प्रचार शैली — भाजपा के चुनावी गीतों और रैली-मंच के ऊर्जावान प्रदर्शन — से बिल्कुल अलग है।
तीनों नेताओं को एक अनूठे अवतार में प्रस्तुत किया गया है, जो किसी राजनीतिक कार्यक्रम की परिचित पृष्ठभूमि की जगह अंतरराष्ट्रीय पॉप-संस्कृति के माहौल में दिखाई देता है। दर्शकों ने इस अप्रत्याशित चित्रण पर जमकर प्रतिक्रियाएँ दी हैं।
गंगनम स्टाइल का वैश्विक असर
2012 में रिलीज़ हुए पीएसवाई के 'गंगनम स्टाइल' ने अपने विशिष्ट डांस, आकर्षक इलेक्ट्रॉनिक बीट और हास्यपूर्ण वीडियो के दम पर दुनियाभर में अभूतपूर्व लोकप्रियता हासिल की थी। इसका 'हॉर्स-राइडिंग' डांस उस दशक के सबसे पहचाने जाने वाले डांस मूव्स में गिना जाता है। यह गीत कई देशों और भाषाओं के इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के बीच आज भी सांस्कृतिक प्रतीक बना हुआ है।
सरमा की सोशल मीडिया उपस्थिति
हिमंता बिस्वा सरमा चुनावी रैलियों और भाजपा के प्रचार कार्यक्रमों में अपने ऊर्जावान नृत्य प्रदर्शन के लिए पहले भी सुर्खियों में रहे हैं। उनके नाचते हुए वीडियो — जिनमें तालबद्ध तालियाँ, जीवंत हाथों की हरकतें और उत्साहित उछल-कूद देखी जाती है — पहले भी सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं। हालाँकि, एआई-जनित यह क्लिप उनकी अब तक की डिजिटल उपस्थिति से गुणात्मक रूप से अलग है।
राजनीतिक संचार में एआई का बढ़ता दखल
यह वायरल वीडियो एक बड़ी प्रवृत्ति का हिस्सा है — राजनीतिक हस्तियाँ परंपरागत भाषणों और प्रेस कॉन्फ्रेंस से परे दर्शकों तक पहुँचने के लिए अपरंपरागत डिजिटल सामग्री का सहारा ले रही हैं। गौरतलब है कि एआई-जनित राजनीतिक सामग्री का यह प्रसार भारत में एक नई बहस को भी जन्म दे रहा है — विशेष रूप से इस बारे में कि कृत्रिम रूप से तैयार किए गए वीडियो को किस हद तक प्रामाणिक जन-संपर्क का माध्यम माना जा सकता है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय राजनीतिक दलों के बीच डिजिटल कंटेंट के ज़रिये युवा मतदाताओं से जुड़ने की होड़ तेज़ी से बढ़ रही है। 33 लाख से अधिक व्यूज़ यह दर्शाते हैं कि इस तरह की एआई सामग्री पारंपरिक प्रचार से कहीं अधिक तेज़ी से फैलती है।